श्रावस्ती के इकौना थाना क्षेत्र स्थित जगतजीत इंटर कॉलेज में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित बौद्धि पथ कार्यशाला का 5वां दिन हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य संरक्षण जीव-विज्ञान और जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य राम बिहारी वाजपेई ने अपने संबोधन में कहा कि संरक्षण जीव-विज्ञानी जैव विविधता क्षति, प्रजातियों के विलोपन की प्रवृत्ति और प्रक्रिया पर शोध करते हैं। उन्होंने मानव समाज के कल्याण पर इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य अतिथि युवा समाजसेवी नरेंद्र जयसवाल ने बताया कि संरक्षण जीव-विज्ञानी विभिन्न क्षेत्रों जैसे सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों, गैर-लाभकारी संगठनों और उद्योगों में कार्यरत हैं। उनका कार्य अनुसंधान, निगरानी और पृथ्वी के हर कोने की सूची तैयार करने के साथ-साथ समाज के साथ उसके संबंधों का अध्ययन करना है। जायसवाल ने आगे कहा कि यह क्षेत्र जैविक और सामाजिक विज्ञान सहित अंतर्विषयक नेटवर्क के साथ विविधतापूर्ण है। उन्होंने आचार, नैतिकता और वैज्ञानिक कारणों के आधार पर वर्तमान जैव विविधता संकट के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया की वकालत की। उन्होंने बताया कि संगठन और नागरिक समाज वैश्विक मानदंडों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर चिंताओं को दूर करने वाले शैक्षिक कार्यक्रमों और संरक्षण कार्य योजनाओं के साथ इस संकट का जवाब दे रहे हैं। इस अवसर पर पिंकी, छाया, दिव्यांशी, अनुप्रिया और अंजलि सहित कई बच्चों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इकौना में बौद्धिक पथ कार्यशाला:संरक्षण जीव-विज्ञान और जैव विविधता पर हुई चर्चा
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