बख्शी का तालाब। सावन के पावन महीने में चारों तरफ शिव भक्ति की बहार है। इसी कड़ी में सोमवार को इटौंजा का इलाका पूरी तरह शिवमय हो गया। कानपुर के बिठूर घाट से पवित्र गंगाजल लेकर निकले लगभग 1300 कांवड़ियों का विशाल समूह करीब 130 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर वापस इटौंजा लौटा। ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के साथ जब कांवड़ियों का यह जत्था कस्बे में दाखिल हुआ, तो पूरा माहौल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
कांवड़ियों के स्वागत के लिए सुबह से ही इटौंजा बाजार में भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। जैसे ही भगवा वस्त्र धारी शिवभक्तों का हुजूम मुख्य बाजार में पहुंचा, स्थानीय व्यापारियों और आम जनता ने उन पर जमकर फूल बरसाए। चारों तरफ से हो रही पुष्पवर्षा के बीच कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पैरों में छाले और थकान के बावजूद भोले के भक्तों के चेहरे पर गजब की चमक और आस्था की ऊर्जा साफ झलक रही थी।
स्थानीय व्यवसायी और विनायक ज्वैलर्स के मालिक एस. सोनी ने बताया कि, इस भव्य कांवड़ यात्रा का दायरा बहुत बड़ा था। इटौंजा क्षेत्र के करीब 50 अलग-अलग गांवों के श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने बिठूर गए थे। सोमवार को जब वे अपने क्षेत्र में वापस आए, तो उनके स्वागत और हौसला बढ़ाने के लिए इन सभी गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण और परिजन सुबह से ही इटौंजा बाजार में आकर डट गए थे।
कस्बे में पहुंचने के बाद सभी कांवड़ियों ने इटौंजा बाजार में स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर का रुख किया। वहां बिठूर से पैदल लाकर संजोया गया पवित्र गंगाजल भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पित कर जलाभिषेक किया गया। पूजा-अर्चना के बाद सभी ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। शिवभक्तों की सेवा के लिए जगह-जगह स्टॉल लगाए गए थे, जहां स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों के लिए चाय, नाश्ते, फल और भरपूर जलपान की व्यवस्था की थी। लोगों ने आगे बढ़कर पैर दबाकर और दवाइयां देकर कांवड़ियों की थकान मिटाने का प्रयास किया।












