नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में चल रहे अपने केस की कार्यवाही में न तो स्वयं पेश होंगे और न ही उनकी तरफ से कोई वकील पैरवी करेगा।
केजरीवाल ने एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने ‘हितों के टकराव’ के कारण यह निर्णय लिया है। उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि सिद्धांतों से है। उनके मुताबिक न्याय केवल होना नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। महात्मा गांधी के ‘सत्याग्रह’ का संदर्भ देते हुए केजरीवाल ने कहा कि यदि अंतरात्मा की आवाज कहती है कि गलत हो रहा है, अन्याय हो रहा है तो उसके खिलाफ चुप न रहो उसका सामना करो लेकिन उसका पहला कदम विरोध नहीं बल्कि बातचीत होना चाहिए। अपनी बात अन्याय करने वाले के सामने पूरी विनम्रता के साथ रखनी चाहिए और उसे सुधारने का पूरा मौका देना चाहिए।
सारी कोशिशों के बाद भी अगर न्याय न मिले तो अंतरात्मा की आवाज सुनो, फिर शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए। बाद में उसके जो भी परिणाम हों वो सहर्ष स्वीकार करने चाहिए। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी भी प्रकार की नफरत या गुस्सा नहीं होना चाहिए।
केजरीवाल का बड़ा बयान: कोर्ट कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे,‘हितों के टकराव’ का दिया हवाला
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












