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बस्ती मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक हॉस्पिटल कैली में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे फिलहाल हकीकत से दूर नजर आ रहे हैं। अस्पताल की नई बिल्डिंग और इमरजेंसी में लगी लिफ्ट कई दिनों से खराब पड़ी है। तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट का संचालन पूरी तरह बंद है, जिससे रोजाना सैकड़ों मरीज, उनके तीमारदार, डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक लिफ्ट को चालू नहीं कराया जा सका है। लिफ्ट बंद होने का सबसे अधिक असर नई बिल्डिंग के पांचवें तल पर संचालित हड्डी रोग वार्ड पर पड़ा है, जहां करीब 50 मरीज भर्ती हैं। इनमें अधिकांश ऐसे मरीज हैं जिनके पैर या कमर की हड्डी का ऑपरेशन हुआ है और वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं। जांच, एक्स-रे या अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के लिए उन्हें स्ट्रेचर या व्हीलचेयर के सहारे सीढ़ियों से नीचे लाना और फिर वापस ऊपर ले जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों को असहनीय दर्द झेलना पड़ रहा है और इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। डॉक्टर, स्टाफ और तीमारदार भी परेशान अस्पताल के तीसरे तल पर ऑपरेशन थिएटर तथा पहले तल पर गायनी वार्ड संचालित है। लिफ्ट बंद होने से डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को भी लगातार सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। मरीजों के तीमारदारों को दवा, भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान के लिए दिन में कई बार ऊपर-नीचे आना-जाना पड़ता है। बुजुर्ग परिजन, गर्भवती महिलाओं के साथ आए परिवार और छोटे बच्चों के साथ मौजूद लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। हड्डी विभाग में भर्ती मरीज हरिराम की पत्नी विद्या ने बताया कि पति की देखभाल के लिए उन्हें दिनभर में दो से तीन बार पांचवें तल से नीचे आना-जाना पड़ता है। लगातार सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से उनकी तबीयत भी खराब होने लगी है। वहीं सुरेंद्र कुमार, जिनकी मां सुमित्रा देवी हड्डी रोग वार्ड में भर्ती हैं, ने बताया कि सुबह से दो बार सीढ़ियों से ऊपर-नीचे जाने के बाद अब उनकी हिम्मत जवाब दे चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि लिफ्ट चालू होती तो मरीजों और तीमारदारों को इतनी परेशानी नहीं होती। शौचालय के बाहर लगा वाटर कूलर भी बना चिंता का विषय अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल केवल लिफ्ट तक सीमित नहीं हैं। पांचवें तल स्थित हड्डी विभाग में शुद्ध पेयजल के लिए लगाया गया वाटर कूलर पुरुष शौचालय के दरवाजे के ठीक बाहर स्थापित है। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी है। कई तीमारदारों का कहना है कि कुछ लोग शौचालय से निकलने के बाद उसी वाटर कूलर पर हाथ धोते हैं, जिससे स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे स्थान पर वाटर कूलर लगाए जाने से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि लिफ्ट का सेंसर खराब हो गया है। संबंधित कंपनी को इसकी सूचना दे दी गई है। उन्होंने बताया कि यह सेंसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है और मुंबई से मंगाया जा रहा है। कंपनी पर जल्द से जल्द सेंसर उपलब्ध कराकर लिफ्ट चालू करने का दबाव बनाया गया है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। वाटर कूलर के संबंध में उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के दौरान इसे उचित स्थान पर नहीं लगाया गया था। अब इसे दूसरी सुरक्षित जगह स्थानांतरित कराया जाएगा, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ वातावरण में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। मरीजों ने की तत्काल समाधान की मांग अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि लिफ्ट की मरम्मत युद्धस्तर पर कराई जाए और अस्पताल की अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी जल्द दुरुस्त किया जाए। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में इस तरह की अव्यवस्था मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है और इलाज की गुणवत्ता पर भी असर डाल रही है।
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बस्ती मेडिकल कॉलेज की ओपेक हॉस्पिटल कैली में लिफ्ट खराब:पांचवें तल तक स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से सीढ़ियों पर ले जाए जा रहे मरीज, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
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