लखनऊ। शुक्रवार मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां लगातार विवादों के घेरो में आता जा रहा है। इसे लेकर समाजवादी छात्र सभा के महासचिव मनोज पासवान ने हजरतगंज स्थित डॉ भीम राव अम्बेडकर छात्रावास में प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा है कि यह विवाद धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से इस मामले में एसआई जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह जांच न हो तो राजस्व अभिलेखों के आधार पर जिसके नाम संपत्ति दर्ज है,उसे यह सौंपा जाए।
बीते मंगलवार अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने जमकर हंगामा काटा था। हिंदू महासभा के लोगों का कहना था कि यह मस्जिद नहीं, हिंदू नेता कंसा पासी का किला है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा था कि लोगों के विरोध के बाद मौलाना जमील अहमद उर्फ जॉनी क्यों भाग गया? वहीं, बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यहां बकरीद की नमाज करने पर पाबंदी लगा दी थी।
पूरा मामला मलिहाबाद तहसील क्षेत्र के कसमंडी कला गांव में एक किले जैसे पुराना ढांचे से जुड़ा है। गांववालों के अनुसार, यहां करीब 4 साल पहले जमील अहमद उर्फ जॉनी नाम का मौलाना आया। उसने ढांचे के बगल में ही मस्जिद बना ली और मदरसा चलाने लगा। इतना ही नहीं, उसने किले वाले ढांचे का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया। किला वाले ढांचे को लोग ऐतिहासिक कंसा पासी का किला बता रहे हैं। कंसा पासी के नाम पर ही गांव का नाम कसमंडी पड़ा था।
गांववालों के मुताबिक, मौलाना की गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो पासी समाज के लोगों ने उसका विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मौलाना यहां से 21 मई को भाग गया। विवाद बढ़ता देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अब समाजवादी छात्र सभा ने देश के आजादी के बाद तैयार किए गए राजस्व अभिलेखों के अनुसार ही निर्णय लेने की माँग की है।












