डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा बुज़ुर्ग गांव स्थित कर्बला में सोमवार दोपहर 3 बजे मरसिया मजलिस का आयोजन किया गया। इस मजलिस में गाजीपुर से आए मौलाना उरुज अली ने इमाम हुसैन की शहादत के महत्व पर प्रकाश डाला। मौलाना उरुज अली ने कहा कि कर्बला की पवित्र भूमि पर अपने साथियों के साथ शहादत देने वाले इमाम हुसैन की महान कुर्बानी को दुनिया कभी भुला नहीं सकती। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन ने अपने नाना हजरत मोहम्मद मुस्तफा के दीन-ए-इस्लाम को बचाने के लिए उनके बताए रास्ते का अनुसरण किया। मौलाना ने आगे कहा कि इमाम हुसैन ने मैदान-ए-कर्बला में अपने 71 साथियों के साथ इसलिए कुर्बानी दी, ताकि दुनिया को इस्लाम की सही तस्वीर, हक और शांति का संदेश मिल सके। उन्होंने सभी अनुयायियों से कर्बला की घटना को याद कर गरीब, मजलूम और बेसहारा लोगों की मदद करने तथा बुरे समय में उनके साथ खड़े रहने का आह्वान किया। मजलिस के समापन के बाद ‘या हुसैन या अली’ के नारे गूंजने लगे। इस अवसर पर मजलिस के आयोजक सरफराज़ रिजवी, अज़ीम अब्बास, इंतेज़ार हुसैन, अंसार हुसैन, इरफ़ान अहमद, अम्मार हुसैन और शाहिद अब्बास सहित कई लोग मौजूद रहे।
डुमरियागंज में मरसिया मजलिस, इमाम हुसैन की शहादत को याद:मौलाना उरुज अली ने कहा- इस्लाम बचाने के लिए दी कुर्बानी
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