लखनऊ। हर बच्चे की सीखने की अपनी गति और जरूरत होती है। इसके लिए समय पर पहचान, शुरूआती सहयोग और अनुकूल शैक्षिक वातावरण उनकी शिक्षा को मजबूती दे सकता है। इसे लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों एवं प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर तैयार किये जायेंगे।
राज्य परियोजना निदेशक के अनुसार समग्र शिक्षा की ओर से प्रशिक्षण के लिए लगभग 2.98 करोड़ रुपये जारी किये गये है। इसका का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्मिकों की क्षमता बढ़ाना है, ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों को शुरूआती स्तर पर पहचानकर उन्हें उचित सहयोग और आगे की शिक्षा के लिए तैयार किया जा सके। जिला स्तर पर अगस्त माह में एआरपी को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये मास्टर ट्रेनर्स सितम्बर माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षण में गतिविधि आधारित एवं व्यावहारिक तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे प्रतिभागियों को विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से समझा सकें। प्रशिक्षण में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इससे आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को बच्चों की सीखने संबंधी जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप सहयोग देने में मदद मिलेगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने बताया कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शत-प्रतिशत प्रतिभागिता और निर्धारित समय-सीमा में कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकतार्ओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों के संयुक्त प्रशिक्षण से बच्चों की जरूरतों की पहचान और उनके शैक्षिक सहयोग की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को उसकी जरूरत और क्षमता के अनुरूप सीखने का अवसर उपलब्ध कराना बच्चों की समय पर पहचान और शुरूआती सहयोग उनकी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रशिक्षित करेंगे मास्टर ट्रेनर
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