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महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय, कैली में पिछले सात साल से एमआरआई मशीन का इंतजार किया जा रहा है। गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों की जांच के लिए अस्पताल को 2018 में ही एमआरआई मशीन मिलनी थी। इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर नया भवन भी बनाया गया और हैवी लोड के लिए जनरेटर सेट भी स्थापित किया गया, लेकिन मशीन अब तक नहीं मिली है। इस सुविधा के अभाव में मरीजों को हजारों रुपये खर्च कर बाहर से जांच करानी पड़ रही है। शासन ने 27 अप्रैल 2022 को जिले को एमआरआई मशीन दिए जाने की घोषणा की थी, लेकिन दो साल बाद भी मशीन का कोई अता-पता नहीं है। सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत जिलेवासियों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था प्रदान करने के लिए 2018 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को हरी झंडी मिली थी। कॉलेज बनकर तैयार हुआ और अप्रैल 2019 से इसका संचालन भी शुरू हो गया। मेडिकल कॉलेज ने ओपेक चिकित्सालय कैली को ओपीडी और अन्य चिकित्सा सेवाओं के लिए संबद्ध किया है। यह भी तय हुआ था कि अस्पताल में जो उपकरण बंद पड़े हैं, उन्हें पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पीड़ित मरीजों को गोरखपुर और लखनऊ जैसे शहरों की तरह बेहतर इलाज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना था। साथ ही, यह छात्रों की पढ़ाई में भी सहयोग करेगा, जिससे उन्हें नौकरी मिलने में आसानी होगी। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में तैनात डॉ. रजत पांडेय ने बताया कि एमआरआई के लिए हर रोज तीन से चार मरीज आते हैं। दिमाग की परेशानियों, हृदय रोग, दिमागी बुखार और मिर्गी जैसे रोगों की जांच के लिए मरीजों को गोरखपुर या लखनऊ भेजना पड़ता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय शुक्ला ने कहा कि मांसपेशियों की बीमारी, नसों की दिक्कत, कंधे और गर्दन से संबंधित समस्याओं के लिए भी एमआरआई आवश्यक है। गठिया रोग लेगामेंट (धुटना)में चोट, रीढ़ की हड्डी में डिस्क खिसकना जैसी गंभीर बिमारी को एम आर आई जांच में आसानी से पकड़ लिया जाता है। सर्जन डॉ डी के पाल बताया यूट्रस के ट्यूमर व कैंसर की स्थिति में एमआरआई कराना होताट्यूमर, सिर की गंभीर चोट, पेट,लीवर, किडनी, गर्भाशय, प्रोस्टेट आदि से मरीजों को कराना पड़ जाता है। जिससे इन मरीजों को बेहतर और सही समय इलाज मिल जाए। उप प्राचार्य डॉ अनिल कुमार यादव ने बताया मेडिकल कॉलेज में पीपीपी माॅडल से एमआरआई लगवाकर संचालित करने की योजना है । करोड़ों रुपये के भवन बनाकर 2018 में ही तैयार कर दिए गया, चिकित्सा शिक्षा विभाग के जिम्मे होगी। उत्तर प्रदेश सप्लाई कारपोरेशन इस मशीन को मुहैया कराएगा , सरकार की तरफ खरीद प्रक्रिया चल रहा है जल्द ही आने की संभावना है।
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मेडिकल कॉलेज को 7 साल बाद नहीं मिली MRI मशीन:बस्ती में मरीजों को बाहर जांच कराने में खर्च करने पड़ रहे हजारों रुपये
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