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ईरान-यूएस तनाव के बीच, ट्रंप ने पीएम मोदी से होर्मुज प्रासंगिक मुद्दों पर की चर्चा

News Desk

नई दिल्ली : ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की.अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की. उन्होंने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का महत्व भी शामिल है.”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा कि भारत पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द तनाव कम करने और शांति बहाल करने का समर्थन करता है. इस बातचीत में वैश्विक पोत परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के वास्ते ईरान के लिए अमेरिका की ओर से समयसीमा पांच दिन बढ़ाए जाने के एक दिन बाद ट्रंप ने मोदी को फोन किया.मोदी ने कहा, “भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है. हमने शांति और स्थिरता के प्रयासों के संबंध में संपर्क में रहने पर सहमति व्यक्त की.”

इस संबंध में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण पोत परिवहन मार्ग को खुला रखने के महत्व पर विचार-विमर्श किया. गोर ने सोशल मीडिया पर कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की अभी बातचीत हुई. उन्होंने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का महत्व भी शामिल है.”

आपको बता दें कि दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ट्रंप के उस बयान के 24 घंटे से भी कम समय बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान ने मध्य पूर्व में चल रही शत्रुता पर सार्थक बातचीत की है और होर्मुज को फिर से खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देने के बाद ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमले को पांच दिनों के लिए टाल दिया है.इससे पहले दिन में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बयान दिया था. उन्होंने कहा कि युद्ध के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति के माध्यम से भारत लगातार प्रयास कर रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार सभी उपलब्ध स्रोतों से गैस और कच्चे तेल की खरीद के लिए प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत 40 से अधिक देशों के साथ ऊर्जा आयात कर रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी ये प्रयास जारी रहेंगे क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध ने वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है.

उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य युद्ध को कम करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना है, और देश सभी पक्षों को शांतिपूर्ण तरीके से सभी मुद्दों को हल करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा हैय

पीएम मोदी ने कहा, “भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से पश्चिम एशिया में शांति चाहता है. हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के संपर्क में हैं. हमारा उद्देश्य क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए संवाद और कूटनीति है. हमने उनसे युद्ध को कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के बारे में बात की है.”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में छिड़े वर्तमान संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति से निबटने के लिए अधिकार संपन्न सात नये समूहों का गठन किया गया है जो एलपीजी, आवश्यक सेवाओं एवं वस्तुओं की आपूर्ति एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अन्य विषयों का नियमित आकलन कर सुझाव देंगे.

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में अपनी ओर से वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है.

उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है. उनके अनुसार इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

जीते हुए MLA भी BJP का देते साथ! विपक्ष की कितनी बड़ी है ये परेशानी?

इस बार के राज्यसभा चुनाव भी विपक्ष के लिए टेंशन और बगावत साथ लेकर आया है। सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में जमकर विपक्षी विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए समर्थित उम्मीदवारों के लिए अपनी ही पार्टी ने दगाबाजी कर दी। इस बार बगावत से त्रस्त होने वाली पार्टियों में हमेशा की तरह कांग्रेस रही। इसके अलावा बिहार की राष्ट्रीय जनता दल और ओडिशा की बीजू जनता दल हैं। दरअसल, देश के संसद के उच्च सदन राज्यसभा में 37 सीटें खाली हुई थीं। इसमें से विभिन्न राज्यों में पहले ही 26 उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए थे। बची हुई 11 सीटों के लिए बिहार, ओडिशा और हरियाणा में चुनाव हुए।

बीजेपी इन 11 सीटों में से 9 सीटें जीत गई, जबकि विपक्ष दो ही सीट जीत सका। इसमें खास बात यह है कि बीजेपी के पास 8 सीटें जीतने का संख्या बल था और विपक्ष के पास 3 सीटें लेकिन बीजेपी ने अपने समीकरण से विपक्ष के विधायकों को तोड़ लिया और उसने बिहार की एक राज्यसभा सीट अपने नाम कर ली। विपक्ष में हुई इस बगावत ने कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी तीनों को ही चिंता में डाल दिया है।

सवाल उठ रहे हैं कि एक तो विपक्षी दल राज्यों में चुनाव हार रहे हैं, उनकी सरकारें लंबे समय से नहीं बन रहीं। जैसे-तैसे करके उसके विधायक जीतते हैं और पार्टी विपक्ष में आती है, मगर चुनाव बाद जब राज्यसभा चुनाव होते हैं तो उनके विधायक अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी को समर्थन दे देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि विपक्ष के लिए यह कितनी बड़ी परेशानी है…

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बिहार में दलबदल सबसे तेज

राज्यसभा चुनाव में वासे तो बिहार, ओडिशा और हरियाणा में हुआ। मगर, सबसे अधिक नाटकीय घटनाक्रम बिहार में देखने को मिला। बिहार से खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा चुनाव लड़कर निर्विरोध चुने गए। इसके अलावा एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर जद(यू), बीजेपी के शिवेश कुमार और RLM के उपेंद्र कुशवाहा ने पर्चे भरे थे। इसमें से रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को जीताने भर का संख्याबल एनडीए के पास था, लेकिन शिवेश कुमार जीतते हुए नहीं दिख रहे थे।

वोटों का समीकरण कैसे हुआ?

शिवेश कुमार के सामने आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने अमरेंद्र धारी सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। अमरेंद्र धारी सिंह को जीताने के लिए महागठबंधन के पास 35 सीटें ही थीं, आरजेडी ने अतिरिक्त 6 सीटें एआईएमआईएम (5) और बसपा (1) से बात करके अपने पक्ष में कल ली थीं। महागठबंधन मानकर चल रहा था कि उनके उम्मीदवार की जीत होगी, लेकिन वोटिंग खत्म होने तक कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक वोट देने नहीं पहुंचे, जिसका सीधा फायदा एनडीए को हुआ और शिवेश कुमार जीत गए।

जीत के बाद विपक्ष ने बीजेपी के ऊपर विधायकों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। इस तरह से बिहार में एनडीए ने चुनाव में बिहार की पांचों सीटों पर जीत हासिल करते हुए क्लीन स्वीप किया और विपक्ष का सफाया हो गया।

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विपक्षी खेमें में चिंता

पिछले साल ही हुए विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल आरजेडी के पास 25, कांग्रेस की 6, वामदलों की 3, और आईआईपी के पास एक सीट आई थी। बीजेपी-जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए कुल 240 सीटों में से 202 सीटें जीत लीं। इसमें 89 बीजेपी, 85 जेडीयू, एलजेपीआर 19, हम 5 और आरएलएम ने 3 सीटें जीतीं। लंबे अरसे से बिहार में सरकार बनाने की आस देख रही आरजेडी के हाथ निराशा लगी। मगर, चुनाव के महज चार महीने बाद ही विपक्ष को राज्यसभा चुनाव में एक और झटका लग गया। यह घटनाक्रम विपक्षी खेमें में चिंता पैदा किए हुए है।

ओडिशा में भी बीजेपी का दबदबा

इसी तरह से नाटकीय घटनाक्रम ओडिशा में भी देखने को मिला। ओडिशा की 147 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेडी और कांग्रेस के पास अपने संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को जिताने के लिए पर्याप्त संख्याबल था। मगर, बीजेपी के 8 विधायकों (2 निलंबित शामिल हैं) और कांग्रेस के तीन विधायकों ने अपनी पार्टी ने बगावत करके बीजेपी समर्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे के लिए क्रॉस वोटिंग की।

यहां की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल और कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस-वोटिंग करने के बाद कड़े मुकाबले में बीजेपी ने राज्यसभा की दो सीटें जीत लीं। ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हुए, इसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता और ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार राज्यसभा चुनाव जीतने में सफल रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।

वहीं, बीजेडी से संतृप्त मिश्रा ने जीत हासिल की। कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा और उसके तीन विधायकों ने पार्टी ने बगावत की।

हरियाणा में दोनों ने जीती एक-एक सीट

ऐसे ही हरियाणा की दो राज्य सभा सीटों के लिए सोमवार को मतदान हुआ। एक सीट जीतते हुए भी बीजेपी ने दो उम्मीदवार दिए थे। बीजेपी द्वारा दूसरा उम्मीदवार देने की वजह से कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था, जिससे मुकाबला रोमांचक हो गया। हालांकि पहले ही बीजेपी प्रत्याशी संजय भाटिया की जीत सुनिश्चित मानी जा रही थी, लेकिन कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था।

कांग्रेस को जैसा डर था वैसा हुआ भी और पार्टी के पांच विधायकों ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। मगर, पार्टी नेता भूपेंद्र हुड्डा पार्टी उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीत दिलाने में कामयाब रहे। बीजेपी से संजय भाटिया जीत हुई।

इस राज्यसभा चुनाव के बाद चर्चा होने लगी है कि एक तो बड़ी मुश्किल से विपक्षी दलों को राज्यों में जीत मिल रही है लेकिन, जीते हुए विधायक भी वक्त पर काम ना आकर बीजेपी को वोट दे देते हैं। अगर, इस पैटर्न पर विपक्ष रोक नहीं लगा पाया तो उसके लिए भविष्य में भी परेशानी खड़ी हो सकती है।

ट्रंप का दावा: ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर किया समझौता, अमेरिका ने युद्ध में जीत दर्ज की

News Desk

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने पर पूरी तरह सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है

उन्होंने तीन सप्ताह से चल रहे ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका की जीत की घोषणा भी की और उन्होंने कहा कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तेल-गैस संबंधी एक बहुत बड़ा तोहफा अमेरिका को भेजा है।

मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौता करने के लिए उत्सुक है और संकेत दिया कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान ईरानी नेतृत्व में पहले ही महत्वपूर्ण बदलाव हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में, यह सत्ता परिवर्तन है। आप जानते हैं, यह सत्ता में बदलाव है क्योंकि सभी नेता उन नेताओं से बहुत अलग हैं जिन्होंने शुरुआत में ये सारी समस्याएं पैदा की थीं।
इससे पहले, ट्रंप ने ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को सुविधाजनक बनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट का समर्थन किया। शरीफ ने चल रहे संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए वार्ता की मेजबानी करने की भी पेशकश की।
मार्कवेन मुलिन के गृह सुरक्षा विभाग के नए सचिव के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा मैं पहले से कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि उनके पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे।

ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल आपूर्ति से संबंधित एक “महत्वपूर्ण पुरस्कार” दिया है। वे एक समझौता करने जा रहे हैं। उन्होंने कल कुछ ऐसा किया जो वास्तव में अद्भुत था। उन्होंने हमें एक उपहार दिया। और वह उपहार आज पहुंचा। यह एक बहुत बड़ा उपहार था जिसकी कीमत बहुत अधिक थी।

आगे ट्रंप ने कहा कि मैं आपको यह नहीं बताऊंगा कि वह उपहार क्या है, लेकिन यह एक बहुत महत्वपूर्ण पुरस्कार था। और उन्होंने इसे हमें दिया है। तो इसका मेरे लिए एक ही मतलब है, हम सही लोगों से निपट रहे हैं। नहीं, यह परमाणु हथियार नहीं थे। यह तेल और गैस से संबंधित था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है।

ट्रंप ने कहा कहा कि मुझे यह कहना अच्छा नहीं लगता। हमने यह युद्ध जीत लिया है। यह जंग हम जीत चुके हैं… यह ऐसा है जैसे हम कोई युद्ध नहीं जीत रहे जहां उनके पास न नौसेना है, न वायु सेना है, न कुछ भी नहीं है। और हमारे विमान तेहरान और उनके देश के अन्य हिस्सों के ऊपर से उड़ रहे हैं। वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।

सिर मुंडवाने से रूसी खत्म हो जाती है या नहीं? सच्चाई जान लीजिए

अक्सर जब लोग डैंड्रफ यानी रूसी की समस्या से बहुत परेशान हो जाते हैं, तो उन्हें लगता है कि सिर मुंडवाना या ‘गंजा’ होना ही इसका आखिरी इलाज है। लोगों के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि अगर सिर पर बाल ही नहीं रहेंगे, तो रूसी कहां टिकेगी लेकिन हाल ही में ‘इंडियन एक्प्रेस’ की एक रिपोर्ट में डॉ.श्वेता नखावा (KIMS अस्पताल, ठाणे की डर्मेटोलॉजिस्ट) ने इस बात को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर मुंडवाने से रूसी का इलाज नहीं होता, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी भ्रम है।

डॉ.श्वेता नखावा के अनुसार, डैंड्रफ का असली कारण हमारे बाल नहीं बल्कि सिर की त्वचा यानी ‘स्कैल्प’ होती है। जब कोई व्यक्ति अपना सिर मुंडवाता है, तो रूसी के सफेद टुकड़े सिर्फ इसलिए कम दिखाई देते हैं क्योंकि अब उन्हें धोना या साफ करना आसान हो गया है।

डैंड्रफ तब होता है जब हमारी स्कैल्प पर मौजूद तेल और एक विशेष प्रकार की फंगस आपस में मिल जाते हैं। सिर मुंडवाने से न तो तेल बनाने वाली जड़ कम होती हैं और न ही उस फंगस का बढ़ना रुकता है, इसीलिए जैसे ही बाल वापस आते हैं डैंड्रफ फिर से दिखने लगता है।

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क्या सिर मुंडवाना स्कैल्प के लिए खतरनाक हो सकता है?

डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि सिर मुंडवाने से स्थिति और भी खराब हो सकती है। जब किसी रेजर का इस्तेमाल करते हैं, तो सिर की त्वचा पर छोटे-छोटे कट लग सकते हैं। इससे स्कैल्प की वह प्राकृतिक परत कमजोर हो जाती है जो उसे बाहरी संक्रमण से बचाती है। बाल न होने की वजह से सिर पर सीधे तौर पर तेज धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में आ जाती है। इसकी वजह से सिर में रूखापन, खुजली और लाल होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती है, जो डैंड्रफ के लिए जिम्मेदार कीटाणुओं को पनपने का और ज्यादा मौका देती हैं।

रूसी से छुटकारा पाने का सही और वैज्ञानिक तरीका

डॉ. नखावा ने सलाह दी है कि इस समस्या से लड़ने के लिए किसी भी बड़े कदम (जैसे मुंडन) की बजाय लगातार देखभाल करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘मेडिकेटेड एंटी-डैंड्रफ शैम्पू’ का नियमित इस्तेमाल ही इसका सबसे कारगर इलाज है। इन शैम्पू को इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें लगाकर तुरंत न धोएं, बल्कि कुछ मिनटों के लिए सिर पर छोड़ दें ताकि वे फंगस को खत्म कर सकें।

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इसके अलावा, डॉक्टर ने बहुत ज्यादा तेज साबुन के इस्तेमाल से बचने, सिर को सीधी धूप से बचाने और मानसिक तनाव को कम रखने की सलाह दी है। अंत में उन्होंने यही जोर दिया कि डैंड्रफ एक त्वचा की स्थिति है, इसलिए इलाज त्वचा का होना चाहिए, बालों का नहीं।

नवरात्रि में किया गया ये छोटा सा उपाय साढ़े साती के बड़े से बड़े संकट को कर देगा खत्म!

News Desk

हर साल नवरात्रि आते ही घर-घर में पूजा, व्रत और भक्ति का माहौल बन जाता है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ मां दुर्गा की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि शनि की साढ़े साती से राहत पाने के उपाय भी तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं. जिन लोगों के जीवन में लगातार रुकावटें, आर्थिक तनाव या मानसिक दबाव बना हुआ है, वे इसे अक्सर शनि के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में नवरात्रि जैसे पावन दिनों में किए गए उपाय शनि की साढ़े साती के असर को कम कर सकते हैं? ज्योतिष के जानकारों की मानें तो नवरात्रि का समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है, और इसी वजह से इस दौरान किए गए उपाय ज्यादा असरदार माने जाते हैं. यही कारण है कि इन दिनों मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-पाठ का सिलसिला बढ़ जाता है.

नवरात्रि और साढ़े साती का कनेक्शन क्या है?
ज्योतिष मान्यता के अनुसार, शनि की साढ़े साती करीब साढ़े सात साल तक चलने वाली एक ऐसी अवधि होती है, जब व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अधिक तीव्र रूप में मिलता है. यह तीन चरणों में बंटी होती है और हर चरण का असर अलग-अलग तरह से महसूस होता है. कई लोग बताते हैं कि इस दौरान करियर में रुकावट, रिश्तों में तनाव या स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं. हालांकि, इसे पूरी तरह नकारात्मक मान लेना भी सही नहीं है. कई मामलों में यही समय लोगों को मजबूत और अनुशासित भी बनाता है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ अगर शनि से जुड़े उपाय किए जाएं, तो इसे संतुलन बनाने वाला समय माना जाता है.

क्यों खास मानी जाती है नवरात्रि?
आध्यात्मिक ऊर्जा का समय
नवरात्रि के नौ दिन को ऊर्जा का सबसे शुद्ध और सक्रिय समय माना जाता है. इन दिनों में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और साधना का असर सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा माना जाता है.

दुर्गा सप्तशती का महत्व
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ एक आम परंपरा है. मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मानसिक स्थिरता मिलती है. कुछ ज्योतिषाचार्य यह भी बताते हैं कि साढ़े साती के हर साल के लिए 100 श्लोकों का पाठ प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है, जिससे व्यक्ति को राहत मिल सकती है.

नवरात्रि में किए जाने वाले खास उपाय
1. शनि मंत्र का जाप
नवरात्रि के दौरान रोजाना “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना काफी फायदेमंद माना जाता है. कई लोग सुबह या शाम मंदिर जाकर यह जाप करते हैं, जिससे मन को शांति भी मिलती है.
2. तेल का दीपक और दान
शनिवार या नवरात्रि के खास दिनों में शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना आम बात है. इसके साथ ही काले तिल, लोहे की वस्तु या काले कपड़े का दान करने की भी सलाह दी जाती है.

3. हनुमान पूजा का असर
दिलचस्प बात यह है कि शनि के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा भी काफी लोकप्रिय है. नवरात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ जाती है. एक स्थानीय श्रद्धालु बताते हैं कि उन्होंने लगातार नौ दिन तक हनुमान चालीसा पढ़ी और उन्हें मानसिक राहत महसूस हुई. हालांकि, इसे आस्था से जोड़कर ही देखा जाता है.
4. शमी पौधे का महत्व
कई लोग नवरात्रि के दौरान शमी के पौधे में काले तिल अर्पित करते हैं. मान्यता है कि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.

क्या कहते हैं जानकार?
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी उपाय तभी असर करता है जब उसे सही समय और सही तरीके से किया जाए. नवरात्रि जैसे विशेष अवसर पर किए गए उपाय इसलिए ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं क्योंकि उस समय व्यक्ति की आस्था और ध्यान दोनों मजबूत होते हैं. हालांकि, वे यह भी साफ करते हैं कि साढ़े साती को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को जरूर कम किया जा सकता है.

आस्था और अनुभव का मेल
आज के समय में जहां लोग एक ओर विज्ञान और लॉजिक पर भरोसा करते हैं, वहीं दूसरी ओर कठिन समय में आस्था का सहारा लेना भी आम बात है. नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले ये उपाय सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोगों के लिए एक मानसिक सहारा भी बन जाते हैं. कई बार यही विश्वास व्यक्ति को मुश्किल दौर से निकलने की ताकत देता है.

चंद्रमा और मूलांक 2 का सुंदर संयोग, जानें आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा शुक्रवार

भावनाओं और समझदारी के मेल को 20 फरवरी के दिन के तौर पर देखा जा रहा है। शुक्रवार का स्वामी शुक्र है और आज का मूलांक 2 है। इनका स्वामी चंद्रमा है। यह संयोग रिश्तों में सुधार करने और अटके हुए कामों को शांति से निपटाने के लिए बहुत अच्छा माना जा रहा है। अगर किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं या किसी पुराने विवाद को सुलझाना चाहते हैं तो सितारों की चाल आपके पक्ष में है।

मीन राशि में चंद्रमा का गोचर होने के कारण लोगों में करुणा और दूसरों की मदद करने की भावना बढ़ेगी। यह समय केवल भागदौड़ का नहीं बल्कि थोड़ा रुककर अपने मन की सुनने और अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने का है। आइए जानते हैं कि इस खास खगोलीय स्थिति का आपकी राशि पर क्या असर पड़ेगा।

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कैसा रहेगा राशि का हाल?

मेष राशि

आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा है। टीम वर्क और नई प्लानिंग से बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है।

क्या करें: अनुभवी लोगों की राय सुनें। अपनी सेहत का ख्याल रखें।

क्या न करें: किसी भी तरह की बहसबाजी और जल्दबाजी में पैसा लगाने से बचें।

वृषभ राशि

करियर के लिहाज से यह दिन काफी स्थिर रहेगा। परिवार में हंसी-खुशी का माहौल बनेगा और तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे।

क्या करें: अधूरे कामों को प्राथमिकता दें। थोड़ा दान-पुण्य करें।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे पैसे खर्च न करें। अपने गुस्से पर काबू रखें।

मिथुन राशि

आज आपकी बातों का जादू चलेगा। नए लोगों से जुड़ना और छोटी यात्राएं करना आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।

क्या करें: कुछ नया सीखने की कोशिश करें। पुराने दोस्तों से फिर से संपर्क साधें।

क्या न करें: सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें। किसी से किया वादा न तोड़ें।

कर्क राशि

आज मन खुश रहेगा और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। आपकी आर्थिक स्थिति में पहले से सुधार देखने को मिलेगा।

क्या करें: घर के कामों को निपटाएं। माता-पिता का आशीर्वाद लें।

क्या न करें: बहुत ज्यादा इमोशनल होकर कोई फैसला न लें और हेल्थ को लेकर कोई लापरवाही न बरतें।

सिंह राशि

आज आप अपनी काबिलियत से सबको प्रभावित करेंगे। दफ्तर में सम्मान या कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं।

क्या करें: आत्मविश्वास बनाए रखें। शारीरिक कसरत पर ध्यान दें।

क्या न करें: अपने भीतर घमंड न आने दें। दूसरों का सम्मान करें।

कन्या राशि

आज आपकी बुद्धिमानी आपको हर मुश्किल से बाहर निकाल लेगी। हेल्थ अच्छा रहेगा। साथ ही दिनभर छोटी-छोटी सफलताएं मिलती रहेंगी।

क्या करें: बारीकियों पर ध्यान दें। मन की शांति के लिए योग करें।

क्या न करें: हर काम में कमी निकालने की आदत से बचें। दूसरों की बुराई न करें।

तुला राशि

रिश्तों के मामले में आज का दिन आपके लिए शानदार है। पार्टनर के साथ तालमेल बढ़ेगा। निवेश के कुछ अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

क्या करें: आर्ट या म्यूजिक का आनंद लें और अपनों के साथ वक्त बिताएं।

क्या न करें: निर्णय लेने में देरी न करें। सच का साथ दें।

वृश्चिक राशि

आज आपको कोई छिपा हुआ लाभ मिल सकता है। अध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा और जटिल काम आसानी से पूरे हो जाएंगे।

क्या करें: गहरी रिसर्च या खोजबीन वाले काम करें और ध्यान लगाएं।

क्या न करें: पुरानी कड़वी बातों को न दोहराएं और किसी से जलन न करें।

धनु राशि

पूरा दिन जोश और ऊर्जा से भरा रहेगा। अगर किसी लंबे सफर पर जाने की सोच रहे हैं तो आज का दिन सफलता दिलाने वाला है।

क्या करें: अपनी नॉलेज बढ़ाएं और प्रकृति के करीब समय बिताएं।

क्या न करें: जोश में आकर नियम न तोड़ें और बहस से दूर रहें।

मकर राशि

आपकी मेहनत का मीठा फल मिलने का समय आ गया है। करियर में मजबूती आएगी और आर्थिक पक्ष भी बेहतर होगा।

क्या करें: भविष्य की ठोस प्लानिंग करें और अपनी मेहनत जारी रखें।

क्या न करें: खुद को अकेला न समझें और बिना सोचे-समझे जोखिम न लें।

कुंभ राशि

आज आपको कुछ अचानक मिलने वाली खुशियां मिल सकती हैं। नए लोगों से दोस्ती भविष्य में आपके बड़े काम आएगी।

क्या करें: सोशल नेटवर्किंग बढ़ाएं और नई तकनीक का इस्तेमाल करें।

क्या न करें: मन को भटकने न दें और अपनी व्यक्तिगत बातें गुप्त रखें।

मीन राशि

आज आप सितारों के राजा हैं! चंद्रमा आपकी ही राशि में है, जिससे आपका आत्मविश्वास और भाग्य दोनों सातवें आसमान पर रहेंगे।

क्या करें: अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करें और आराम भी करें।

क्या न करें: जरूरत से ज्यादा भावुक होने से बचें और बड़े फैसलों को कल पर टाल दें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

ईरान से कच्चे तेल पर छूट, भारत ने तुरंत की पहली डील

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नई दिल्ली। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच हाल ही में अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दे दी है। इस छूट के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीद को लेकर पहली डील पक्की कर ली है। यह डील 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद को लेकर हुई है। हालांकि, यह सौदा भारत को काफी महंगा साबित हुआ है।
दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान के साथ तेल खरीद की डील की है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान का 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। सूत्र ने बताया कि इस कच्चे तेल की कीमत वैश्विक क्रूड बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स के मुकाबले करीब 7 डॉलर प्रति बैरल अधिक पर तय हुई। हाल के वर्षों में चीन की रिफाइनरियां भारी मात्रा में ईरानी तेल खरीदती रही हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते चीन तक यह तेल ब्लैक मार्केट के जरिए पहुंचता है और अक्सर इस किसी दूसरे देश के तेल के रूप में रीब्रांड कर बेचा जाता है।
अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी। यह छूट उन जहाजों पर लदे तेल पर लागू होती है, जो 20 मार्च तक लोड हो चुके हैं और 19 अप्रैल तक बंदरगाहों पर उतारे जाएंगे।
ईरानी कंपनी के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज का समझौता भारत की मई 2019 के बाद ईरानी तेल की पहली खरीद है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल खरीद बंद की थी। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता भारत ने ईरान से तेल की यह खरीद तब की है, जब मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते तेल की किल्लत जारी है। भारतीय रिफाइनरियों ने इस महीने सप्लाई की कमी को कम करने के लिए अमेरिका की छूट के बाद 4 करोड़ बैरल से ज्यादा रूसी कच्चा तेल खरीदा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत के साथ-साथ एशिया के अन्य देश भी ईरान का कच्चा तेल खरीदने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, चीन की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी ईरानी तेल खरीदने की योजना नहीं बना रही है।
ईरान का कच्चा तेल भारत तक आम तौर पर समुद्री रास्ते से पहुंचता है, और इसका सबसे अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। हालांकि, यह साफ नहीं हुआ है कि भारत ने ईरान से जो तेल खरीदा है, उसकी डिलीवरी कब होगी। ईरान के तेल टर्मिनल (जैसे खार्ग द्वीप) से तेल टैंकर निकलते हैं। ये टैंकर पहले दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज से गुजरते हैं। इसके बाद जहाज अरब सागर के जरिए सीधे भारत के पश्चिमी तट (जैसे गुजरात के जामनगर, मुंबई आदि बंदरगाह) तक पहुंचते हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने इस समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है। हालांकि, भारत जैसे कुछ देशों के कुछ टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत मिली हुई है।

ईरान ने सस्ते ड्रोन से दुबई एयरपोर्ट के पास धमाका कैसे किया? देखिए

ईरान ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर बड़ा ड्रोन हमला किया है। ड्रोन हमले की वजह से अचानक भीषण आग लग गई। ड्रोन एयरपोर्ट के बेहद नजदीक खड़े फ्यूल टैंक पर गिरा, जिसके बाद आग धधक उठी।

सिविल डिफेंस टीमों ने जैसे-तैसे कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। हमले में कोई घायल नहीं हुआ है लेकिन यह नुकसान बड़ा हो सकता था। हमले के बाद बाद दुबई एयरपोर्ट की फ्लाइट्स को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। कराची, काठमांडू, हनोई से आने वाली उड़ानों को फिलहाल होक दिया गया है।

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आग में धधकता दिख रहा है टैंक

सोशल मीडिया पर आग और धुएं के वीडियो वायरल हो रहे हैं। अभी यह साफ नहीं है कि ड्रोन किस तरफ से लॉन्च किया गया था, लेकिन रिपोर्ट्स में इसे ईरानी ड्रोन अटैक से जोड़ा जा रहा है। ईरान खाड़ी के देशों पर अपने सैन्य हमले बढ़ा रहा है।

दुबई पर हमले क्यों कर रहा है ईरान?

ईरान का दावा है कि UAE अपने सैन्य अड्डों और बंदरगाहों का उपयोग अमेरिकी और इजरायली सेनाओं को ईरान पर हमला करने के लिए करने दे रहा है। ईरान ने साफट चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका को अपनी जमीन इस्तेमाल करने देगा, वह उसका वैध लक्ष्य होगा।

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दुबई पर हमला करने से क्या होगा?

दुबई दुनिया का एक बड़ा व्यापारिक और पर्यटन केंद्र है। यहां हमला करके ईरान वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता पैदा करना चाहता है। ईरान का जोर है कि वैश्विक समुदाय अमेरिका और इजरायल पर जंग रोकने के लिए दबाव बनाए।

हमलों की वजह से क्या हो रहा है?

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानें कई बार निलंबित की गई हैं। होटल और रियल एस्टेट सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर बढ़ गई हैं।

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दोस्त था दुबई, फिर दुश्मन कैसे बना?

ईरान, UAE और इजरायल के बीच बढ़ते राजनयिक और सुरक्षा संबंधों से नाराज है। ईरान का कहना है कि इजरायल से दोस्ती, खाड़ी के देशों के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इजरायल और अमेरिका की नजर सिर्फ तेल के खजाने पर रहती है।

UAE रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ईरान की तरफ से अब तक हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी गई हैं। ज्यादातर को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया है। उनके मलबे से नागरिक और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

तेहरान और अमेरिका के बीच शांति के लिए मध्यस्थता वाली खबरें फेक: ईरान

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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग जल्द ही शांति में बदल जाएगी। इसके लिए कई देश मध्यस्थता कर रहे हैं और बातचीत कर शांति बहाल हो जाएगी। इस तरह की राहत भरीं खबरें हकीकत में बदलतीं इससे पहले ही ईरान ने साफ कर दिया कि ये सिर्फ अटकलें और भ्रामक खबरें है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सीधे संवाद की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें फेक न्यूज करार दिया। ईरान का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है, लेकिन अमेरिका के इस रुख के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। भले ही ईरान ने प्रस्ताव मिलने की बात स्वीकार की है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने की राह अब भी कूटनीतिक दांव-पेचों में फंसी नजर आती है। वहीं दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि उन्हें मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव मिले हैं।
इधर खबरें चल रहीं है कि ईरान इन प्रस्तावों की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से भेजे गए कुछ बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से जारी गतिरोध और प्रत्यक्ष टकराव के बावजूद दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक संवाद का रास्ता खुला है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष जारी है और इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन अब ईरान ने भी स्वीकार किया है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका का प्रस्ताव उन तक पहुंचा है। इससे पहले ईरान किसी भी तरह की बातचीत से इनकार करता रहा था। बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से ईरान को 15 बिंदुओं का एक ड्राफ्ट भेजा गया है, जिसमें तनाव कम करने की रूपरेखा तैयार की गई है। क्षेत्रीय शांति के लिए तुर्की और मिस्र जैसे देश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से फोन पर चर्चा की है। फिदान ने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ भी संपर्क साधा है। दूसरी ओर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी ने भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने ईरान को तनाव कम करने के लिए कड़े संदेश भेजे हैं। मिस्र के अधिकारियों के अनुसार, इन संदेशों का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकना है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़े संकट से बचाया जा सके। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक चौंकाने वाले बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसके बाद उन्होंने ऊर्जा ढांचों पर होने वाले संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्णय लिया। ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत बेहद मजबूत रही है और लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन सकती है।

गोद लेने पर भी मिल जाएगी मैटरनिटी लीव, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया 3 महीने वाला नियम

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ‘मातृत्व अवकाश’ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। इसमें कहा कि अब बच्चा गोद लेने वाली सभी माताओं को मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उस कानूनी प्रावधान को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत 3 महीने तक के बच्चे को गोद लेने पर ही अवकाश मिलने की व्यवस्था की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पुराने कानूनी नियम को गैर-संवैधानिक घोषित कर दिया और इसे समानता के अधिकार (संविधान के अनुच्छेद 14) का हनन माना है। बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो सभी गोद लेने वाली माताएं गोद लेने की तारीख से 12 हफ्ते की छुट्टी की हकदार होंगी। कोर्ट ने कहा कि पुराना नियम मां और बच्चे दोनों के लिए भेदभाव वाला है।

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कोर्ट ने यह भी कहा है कि मातृत्व एक मौलिक मानव अधिकार है। उसे इस तरह की सीमा में नहीं बांधा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने कहा, ‘गोद लेना परिवार बनाने का एक उतना ही अच्छा तरीका है… बायोलॉजिकल फैक्टर सिर्फ परिवार के मूल्यों और हकों को तय नहीं कर सकते।’ बेंच ने गोद लिए गए बच्चे के अधिकार की चर्चा अपने फैसले में की है। उन्होंने कहा है कि मां का प्यार पाना बच्चे का अधिकार है। उसे नए परिवार से जुड़ने में समय लगता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चे और अभिभावकों को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार है, लेकिन यह कानून उसका भी उल्लंघन करता है।

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केंद्र सरकार से विचार करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सामाजिक कल्याण के तरीके के तौर पर मातृत्व अवकाश शुरू करने पर विचार करे। याचिकाकर्ता ने मूल रूप से 1961 के मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट 1961 की धारा 5(4) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 2020 में लागू सोशल सिक्योरिटी कोड ने 1961 के कानून की जगह ले ली है। इसकी धारा 60(4) में वही लिखा है, जो 1961 के कानून की धारा 5(4) में था।

कोर्ट ने रद्द करदी धारा

2020 के सोशल सिक्योरिटी कोड की धारा 60(4) में बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को अधिकतम 12 सप्ताह की मातृत्व अवकाश का प्रावधान है, मगर यह लाभ उन्हीं महिलाओं के लिए है जिन्होंने 3 महीने से कम आयु का बच्चा गोद लिया हो। इसी धारा को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया।

शहर में अकेला महसूस करते हैं आप? इन ऐप्स पर पैसे देकर कर सकते हैं दोस्ती

आज के दौर में बड़े शहरों में एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। सड़कों पर भीड़ तो बहुत है लेकिन लोगों के दिलों में बहुत अकेलापन है। इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए अब एक नया बिजनेस शुरू हो गया है, पैसे देकर दोस्ती खरीदना। इसे ‘पेड फ्रेंडशिप’ कहते हैं, जहां आप किसी अजनबी को अपना दोस्त बनाने के लिए उसे सैलरी या फीस देते हैं।

बड़े शहरों में रहने वाले बहुत से लोग ऐसे हैं जो दिन भर काम में डूबे रहते हैं। जब शाम को वे घर लौटते हैं, तो उनके पास बात करने वाला कोई नहीं होता। पुराने दोस्त अपनी जिंदगी में बिजी हैं और परिवार कहीं दूर रहता है। ऐसे में लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं और अपने खालीपन को भरने के लिए Vybout, Friendy और Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स और ऐप्स पर जाते हैं जहां ‘दोस्त’ किराये पर मिलते हैं।

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इन ऐप्स की शुरुआत कैसे हुई?

इसकी शुरुआत जापान जैसे देशों में ‘Rent-a-Family’ के कॉन्सेप्ट से हुई थी, जो धीरे-धीरे भारत पहुंचा। भारत में Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स पिछले 5-6 सालों से सक्रिय हैं लेकिन इनका असली उछाल 2020 के लॉकडाउन के बाद आया, जब लोगों ने अकेलेपन का सबसे डरावना चेहरा देखा।

1.RentAFriend

इस पूरे बिजनेस की नींव रखने वाला सबसे बड़ा नाम ‘RentAFriend’ है। इसकी शुरुआत 2009 में अमेरिका में स्कॉट रोसेनबाम ने की थी। स्कॉट ने महसूस किया कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां लोग सिर्फ प्लेटोनिक (बिना किसी रोमांस के) दोस्ती के लिए मिल सकें। आज यह वेबसाइट दुनिया भर में मौजूद है और भारत के बड़े शहरों में भी इसका काफी इस्तेमाल होता है। यह एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलता है, जहां आप पैसे देकर हजारों ‘फ्रेंड्स’ की लिस्ट देख सकते हैं।

2. Friend On Rent India

भारत में जब इस तरह की चीजों को अजीब माना जाता था, तब Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स ने कदम रखा। इसकी शुरुआत लगभग 2017-18 के आसपास हुई थी। इन्होंने महसूस किया कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में IT प्रोफेशनल्स और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच अकेलापन एक बीमारी की तरह फैल रहा है। इस साइट ने लोगों को एक मौका दिया कि वे अपनी प्रोफाइल लिस्ट करें और प्रति घंटा 300 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक कमाएं।

3. Vybout

यह ऐप पिछले 3-4 सालों में, खासकर पोस्ट-कोविड दौर में बहुत तेजी से उभरा है। इसकी शुरुआत एक ‘सोशल डिस्कवरी’ प्लेटफॉर्म के तौर पर हुई थी। इसका आईडिया बहुत सिंपल था, अगर आप अकेले बोर हो रहे हैं तो आपके पास एक ‘Vibe Buddy’ होना चाहिए। जहां आप अपनी पसंद की एक्टिविटी (जैसे जिम, मूवी या डिनर) के लिए साथी ढूंढ सकते हैं। यह ऐप आज की जेनरेशन को बहुत पसंद आता है क्योंकि इसका इंटरफेस बहुत मॉडर्न है और यह दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में काफी एक्टिव है।

4. Friendy

इसकी शुरुआत कुछ साल पहले हुई और इसका मुख्य उद्देश्य था ‘सुरक्षित दोस्ती’। अक्सर इन प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठते थे, तो Friendy ने पूरी तरह से ‘वेरिफाइड’ प्रोफाइल्स पर काम किया। यहां लोग सिर्फ बातचीत करने, नई भाषा सीखने या साथ में वर्कआउट करने के लिए दोस्त ढूंढते हैं।

5. 7 Cups

7 Cups पूरी तरह से ‘फ्रेंड रेंटल’ नहीं है, लेकिन यह इस इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा है। यह 2013 में शुरू हुआ था। यहां लोग ‘Listeners’ को पैसे देते हैं ताकि वे उनकी बातें सुन सकें। आज के युवा जो डिप्रेशन या स्ट्रेस से जूझ रहे हैं, वे इस ऐप पर ‘पेड लिसनर्स’ से घंटों बातें करते हैं।

किन शहरों में है सबसे ज्यादा क्रेज?

यह बिजनेस मुख्य रूप से उन शहरों में फल-फूल रहा है जिन्हें हम ‘पैसे की दौड़ वाला शहर’ कहते हैं।

मुंबई: यहां लोग काम में इतने व्यस्त हैं कि उनके पास खुद के लिए भी वक्त नहीं है। यहां ‘Movie Companion’ की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है।

बेंगलुरु: टेक हब होने के नाते यहां के युवा सबसे ज्यादा अकेलेपन का शिकार हैं। यहां लोग ‘Weekend Buddies’ सबसे ज्यादा रेंट पर लेते हैं।

दिल्ली-NCR: यहां दिखावे की संस्कृति ज्यादा है, इसलिए शादियों और हाई- प्रोफाइल पार्टियों के लिए ‘फेक फ्रेंड्स’ की बुकिंग यहां सबसे ज्यादा देखी जाती है।

क्या है इसके पीछे का सच?

यह साइलेंट ‘लोनलीनेस इकॉनमी’ दिखाती है कि हम अपनी भावनाओं को भी अब एक प्रोडक्ट की तरह बेच रहे हैं। यह एक ऐसा चक्र है जहां हम पैसे कमाने के चक्कर में अपनों से दूर हुए और अब उसी पैसे से किसी अजनबी का वक्त खरीद रहे हैं। ये ऐप्स भले ही आपको कुछ घंटों की खुशी दें लेकिन ये अकेलेपन का इलाज नहीं हैं, जिसे आज की पीढ़ी अपने अंदर दबाए बैठी है।

सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ी, सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती, डॉक्टरों ने दी जानकारी

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नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते मंगलवार (24 मार्च) देर रात दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें सीने में जकड़न और सांस लेने में हल्की तकलीफ महसूस हो रही थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखने का फैसला किया.

दिल्ली में बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण की वजह से उनकी तबीयत पर असर पड़ा है. डॉक्टरों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की बारीकी से जांच कर रही है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनका ब्रोंकियल अस्थमा थोड़ा बढ़ गया है, जो ठंडी हवा और धूल के कारण अक्सर सक्रिय हो जाता है. अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप ने संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि सोनिया गांधी की स्थिति फिलहाल स्थिर है. उन्हें एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया है और उन्हें एंटीबायोटिक्स व अन्य जरूरी दवाएं दी जा रही हैं.

79 वर्षीय सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं. जनवरी माह में इससे पहले भी उन्हें सांस संबंधी दिक्कत के कारण भर्ती होना पड़ा था. जून 2025 में उन्हें पेट में संक्रमण के कारण अस्पताल में कुछ दिन बिताने पड़े थे. सितंबर 2022 में उन्होंने इलाज के लिए विदेश की यात्रा भी की थी. फिलहाल, डॉक्टर उनकी रिकवरी पर नजर रख रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है.

ईरान पर अकेला पड़ा अमेरिका, NATO और चीन को धमका रहे ट्रंप, नई मुसीबत की आहट?

इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग, दुनिया के मुसीबत बनकर आ रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ईरान ने रोक दी है, जिसकी वजह से कई देशों में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है। ईरान के साथ जारी जंग अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की बजाय बड़े देश, अमेरिकी नीति से दूरी बना रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप, कई देशों को अपने टैरिफ से नाराज कर चुके हैं, ऐसे में उनके साथ किसी की भी हमदर्दी नहीं है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर NATO के सदस्य देश होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने में अमेरिका की मदद नहीं करते हैं तो संगठन का भविष्य बहुत बुरा हो सकता है।

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NATO को क्यों धमकाने लगे ट्रंप?

ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से ही इजरायल और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। अब वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। अचानक तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ने लगीं हैं। अब कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
यह ठीक है कि जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मुनाफा हासिल करते हैं, वे इसे सुरक्षित रखने में मदद करें। अगर कोई जवाब नहीं आता या नकारात्मक जवाब आता है तो NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा। अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए, नहीं तो NATO एकतरफा सड़क बन जाएगा।

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डोनाल्ड ट्रंप की यह धमकी NATO के भीतर तनाव बढ़ा रही है। संगठन का मकसद सदस्य देशों की रक्षा करना है, न कि किसी सदस्य की ओर से छेड़ी गई जंग में उस देश की मदद करना। अमेरिका की मदद करने से NATO के देश इसी वजह से कतरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों जंगी जहाज भेजे जाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई भेजने को तैयार नहीं है। अब फारस की खाड़ी में अमेरिका कमजोर पड़ रहा है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

NATO का क्या बिगाड़ सकते हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति से नई मुसीबत की आहट सुनाई दे रही है। NATO सहयोगी इस दबाव को NATO की एकता के लिए खतरा मान रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की मदद का हवाला देते हुए कहा कि अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए। अगर NATO में फूट पड़ती है तो अमेरिका के लिए भी यह जोखिम है।

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इजरायल के लिए जंग लड़ रहा अमेरिका?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य लक्ष्य समान हैं। इजरायल ने कहा है कि उसकी कार्रवाई कम से कम तीन सप्ताह और जारी रहेगी। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि युद्ध कुछ हफ्तों में समाप्त हो सकता है। ईरान ने 700 मिसाइल और 3,600 ड्रोन हमलों का दावा किया है। अब इस जंग पर अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप का विरोध हो रहा है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। Photo Credit: IDF

चीन को क्यों धमकाने लगे हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप, अब चीन पर दबाव बढ़ाने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से सीधे अपील की कि वह होर्मुज स्ट्रेट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी 90 प्रतिशत तेल इसी राह से हासिल करता है। उन्होंने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं, अगर चीन अपना रुख साफ नहीं करता है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
चीन को भी मदद करनी चाहिए। हम स्थिति जानना चाहते हैं, क्योंकि दो सप्ताह लंबा समय है। हम इसे टाल सकते हैं।

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अलग पड़ गए हैं डोनाल्ड ट्रंप?

ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर तटस्थ रुख अभी तक अपनाया है। अमेरिका की मदद करने के लिए कोई तैयार नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से भी अपील की है कि वह इस संकट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी तेल की जरूरतों के लिए इस रूट पर निर्भर है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जिन देशों को लाभ मिलता है, उन्हें अमेरिका की मदद करनी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया है कि ब्रिटेन ने तुरंत मदद नहीं की।

NATO देश भी अमेरिका की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। Photo Credit PTI

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नया खतरा क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप का जैसा रुख है, कोई देश उनकी मदद करने के लिए तैयार नहीं है। वह खीजकर एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं, आर्थिक प्रतिबंध बढ़ा सकते हैं, जिसकी वजह से अमेरिका पर निर्भर देशों में आर्थिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही पश्चिम एशिया को जंग के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

खाड़ी के देशों को ईरान तबाह कर रहा है, इजरायल की राजधानी येरुशलम में बम मार रहा है, खाड़ी के तेल ठिकानों को निशाना बना रहा है। कुवैत पर भी ईरान की टेढ़ी नजर है। अगर यह जंग कुछ दिन और चली तो भारत जैसे देश में भी पेट्रोलियम संकट पैदा हो सकता है।

शनिवार को बन रहा है गुरु और शनि का शुभ योग, आपकी राशि पर असर क्या? पढ़ें राशिफल

फाल्गुन अमावस्या के बाद मूलांक 3 वाले लोगों के लिए 21 फरवरी का दिन नए रास्ते खोलने जा रहा है। मीन राशि के चंद्रमा और बृहस्पति की ऊर्जा से आज का दिन बौद्धिक कार्यों और सकारात्मक बदलावों के लिए बेहद खास रहेगा। आज का दिन उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अपनी रचनात्मकता और बुद्धिमानी से कुछ नया करना चाहते हैं।

शनिवार और मूलांक 3 का यह दुर्लभ संयोग न केवल आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा बल्कि पुराने रुके हुए कामों में भी गति लाएगा। आइए जानते हैं आपकी राशि के लिए आज का दिन क्या खास लेकर आया है।

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क्या करें और क्या न करें?

मेष राशि

आज किस्मत आपके साथ है। बिजनेस और नौकरी में अचानक कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

क्या करें: खुद पर भरोसा रखें। परिवार को समय दें।

क्या न करें: किसी से झगड़ा न करें। पैसों का बड़ा जोखिम न लें।

वृषभ राशि

आर्थिक रूप से दिन मजबूत है। पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है। रिश्तों में प्यार बढ़ेगा।

क्या करें: बजट बनाकर चलें। अपनी सेहत का ध्यान रखें।

क्या न करें: बिना बात के गुस्सा या बहस करने से बचें।

मिथुन राशि

आज आपकी बुद्धि का लोहा माना जाएगा, छात्रों को परीक्षा में सफलता मिलने के पूरे योग हैं।

क्या करें: लोगों से संपर्क बढ़ाएं। पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें।

क्या न करें: अफवाहों पर यकीन न करें। किसी भी काम में जल्दबाजी न दिखाएं।

कर्क राशि

घर में शांति का माहौल रहेगा और माता-पिता का सहयोग मिलेगा। प्रॉपर्टी से जुड़े काम बन सकते हैं।

क्या करें: घर के जरूरी काम निपटाएं। मन को शांत रखें।

क्या न करें: बीती हुई बातों को दोबारा न उखाड़ें। तनाव से दूर रहें।

सिंह राशि

कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप की तारीफ होगी। सीनियर्स का पूरा सपोर्ट मिलेगा।

क्या करें: बड़े फैसले लेने के लिए सही समय है। एक्सरसाइज जरूर करें।

क्या न करें: घमंड करने से बचें साथ ही फालतू के खर्चों को कंट्रोल करें।

कन्या राशि

नौकरी में प्रमोशन या किसी बड़े इनाम की संभावना है, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

क्या करें: अपनी मेहनत जारी रखें और छोटे-छोटे लक्ष्यों को पूरा करें।

क्या न करें: आलस को खुद पर हावी न होने दें और सेहत को नजरअंदाज न करें।

तुला राशि

शादीशुदा जिंदगी और लव लाइफ शानदार रहेगी। आज आपका मन आर्ट और म्यूजिक की ओर झुकेगा।

क्या करें: पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएं। अपनी हॉबी पर ध्यान दें।

क्या न करें: अपने साथी पर शक करने से बचें।

वृश्चिक राशि

आज आपको कोई गुप्त लाभ मिल सकता है। आप अपने विरोधियों पर भारी पड़ेंगे।

क्या करें: रिसर्च या छिपे हुए कामों को पूरा करें। मेडिटेशन करें।

क्या न करें: मन में नफरत या बदले की भावना बिल्कुल न रखें।

धनु राशि

लंबी यात्रा और धार्मिक कार्यों के लिए दिन बहुत शुभ है। किस्मत पूरी तरह आपके पक्ष में है।

क्या करें: नई चीजें सीखें। अपने गुरुओं या बड़ों का सम्मान करें।

क्या न करें: जोश में आकर नियमों को तोड़ने का प्रयास न करें।

मकर राशि

करियर में बड़ी छलांग लगाने का मौका मिलेगा। अधिकारियों से मदद मिलेगी। आर्थिक स्थिरता आएगी।

क्या करें: अनुशासन में रहें। अपने टारगेट पर फोकस करें।

क्या न करें: किसी भी काम में देरी न करें। निगेटिव विचारों से बचें।

कुंभ राशि

समाज में आपकी इज्जत बढ़ेगी और पुराने दोस्तों से मुलाकात या मदद मिल सकती है।

क्या करें: मिलजुल कर काम करें। सामाजिक सेवा में रुचि लें।

क्या न करें: अकेले कोई बड़ा फैसला न लें। दूसरों से जलन न करें।

मीन राशि

आज चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जो आपके लिए सुख, समृद्धि और मान-सम्मान लेकर आए हैं।

क्या करें: दान-पुण्य और आध्यात्मिक काम करें।

क्या न करें: संकोच या आलस की वजह से आए हुए मौके को हाथ से न जाने दें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

कोलंबिया में वायुसेना का विमान टेकऑफ के दौरान हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 125 लोग थे सवार

News Desk

बोगोटा। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां वायुसेना का एक शक्तिशाली लॉकहीड सी-130 हरक्यूलिस विमान टेकऑफ के दौरान भीषण हादसे का शिकार हो गया। यह दुर्घटना पुतुमायो के प्यूर्टो लेगुइज़ामो इलाके में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उड़ान भरते समय विमान अचानक अनियंत्रित होकर गिर पड़ा और देखते ही देखते उसमें भीषण आग लग गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया।
कोलंबिया के रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज़ ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान में बड़ी संख्या में सैन्य जवान सवार थे। प्रारंभिक सूचनाओं में भारी जनहानि की आशंका जताई गई थी, लेकिन राहत एवं बचाव कार्य के साथ स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है। वायुसेना के कमांडर कार्लोस फर्नांडो सिल्वा ने एक आधिकारिक संदेश में जानकारी दी कि विमान में 11 चालक दल के सदस्यों सहित कुल 125 लोग सवार थे। गनीमत यह रही कि बचाव टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कम से कम 48 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया है, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। हादसे की भयावहता को देखते हुए पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। सैन्य और नागरिक राहत टीमें मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। हालांकि, आग की लपटों ने शुरुआत में बचाव कार्य में काफी बाधा उत्पन्न की थी। विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का अभी तक सटीक पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या मौसम जैसे सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर एक उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।