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लोगों के लिए फ्री है ट्यूलिप फेस्टिवल में एंट्री, दिल्ली में कहां देख सकते हैं?

फरवरी के महीने को वसंत ऋतु कहा जाता है। इस महीने में फूलों का खिलाना शुरू हो जाता है। दिल्ली में अमृत उद्यान के बाद ट्यूलिप फेस्टिवल की शुरुआत हो चुकी है। यह फेस्टिवल प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत खास है। यहां पर आपको 7 अलग-अलग रंगों में 2 लाख से ज्यादा ट्यूलिप के फूल देखने को मिल जाएंगे।

अगर आप फूलों को देखना पसंद करते हैं तो इस जगह पर दोस्त और परिवार के लोगों के साथ जरूर घूमने जाएं। हर साल नई दिल्ली नगर निगम ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन करती है। इस साल भी 16 से 20 फरवरी तक ट्यूलिप फेस्टिवल लगा हुआ है। यह फेस्टिवल भारत मंडप नई दिल्ली में हो रहा है। एनडीएमसी ने इसके लिए काफी तैयारियां की हैं।

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ट्यूलिप फेस्टिवल कहां देख सकते हैं?

डीडीए से मिली जानकारी के अनुसार 21 और 22 फरवरी को फ्लावर शो का आयोजन भी किया जाएगा। डीडीए कुछ अलग जगहों पर भी ट्यूलिप से बल्ब को सजा रहा है। शांति पथ और एसीपी मार्ग पर ट्यूलिप के बल्ब दिखने भी लगे हैं।

एनडीएमसी एरिया में चाणक्यपुरी के शांतिपथ सड़क के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट में ट्यूलिप को सजाया जाता है। इसके अलावा नेहरू पार्क, लोदी गार्डन, डीडीए के विभिन्न पार्क, कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क, एसपी मार्ग, एनडीएमसी कंवेंशन सेंटर लॉन, मंडी हाउस, विंडसर प्लेस और एनडीएमसी के राउंड अबाउट पर ट्यूलिप लगाए जाते हैं।

एंट्री फीस कितनी है?

ट्यूलिप फेस्टिवल में एंट्री बिल्कुल फ्री है। आपको बस आपके परिवार और दोस्तों के साथ आना है। इस बार दिल्ली में 2.25 लाख ट्यूलिप बल्ब को अलग-अलग जगहों पर लगाया गया है। करीब 1 लाख ट्यलिप को गमलों में लगाया गाया है जिसे आम लोगों को बेचा जाएगा। ट्यलिप फेस्टिव घूमने का सबसे सही समय 8 से 11 बजे के बीच में है।

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टूरिस्ट ट्यूलिप फेस्टिवल में क्या-क्या कर सकते हैं?

  • इस फेस्टिवल में आपको एक साथ लाल, पीला, पिंक और सफेद रंग के ट्यूलिप बल्ब साथ में देखने को मिलेंगे। यह एक मनमोहक नजारा है।
  • आप ट्यूलिप फेस्टिवल में फोटोग्राफी प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।
  • आप अपने परिजनों और दोस्तों के साथ आकर इस जगह पर खूबसूरत तस्वीरें ले सकते हैं।

एकादशी पर क्या कह रही हैं आपकी राशियां? राशिफल से समझिए

ज्योतिषी नजरिए से देखे तो 13 फरवरी शुक्रवार का दिन बेहद खास है। चंद्रमा धनु राशि में गोचर कर रहे हैं, जो हमें नई चीजों को सीखने और उत्साह के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही आज का मूलांक 7 है, जिसका स्वामी केतु होने के कारण आज का दिन उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो रिसर्च, ध्यान या किसी भी तरह के क्रिएटिव काम से जुड़े हैं।

शुक्रवार का दिन वैसे भी सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है और मूलांक 7 की रहस्यमयी ऊर्जा के साथ मिलकर यह आंतरिक शांति और तरक्की के नए रास्ते खोलता है। आइए जानते हैं कि आज के सितारे आपकी राशि के लिए क्या संकेत दे रहे हैं।

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सभी 12 राशियों का हाल

मेष:

आज आप ऊर्जा से भरपूर रहेंगे। करियर में नई शुरुआत का मौका है। बस ध्यान रखें कि जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें। साथ ही योग के जरिए अपनी एनर्जी को सही दिशा दें।

वृषभ:

आर्थिक नजरिए से दिन बढ़िया है। निवेश की योजना बनाना फायदेमंद रहेगा। पुराने दोस्तों से मिलें लेकिन फिजूलखर्ची से बचें।

मिथुन:

आपकी बातों का जादू आज लोगों पर चलेगा। नई चीजें सीखने के लिए दिन अच्छा है, बस दूसरों की गॉसिप से खुद को दूर रखें।

कर्क:

घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। पुरानी बातों को भूलकर वर्तमान का आनंद लें। घर की सजावट पर ध्यान देना आपको खुशी देगा।

सिंह:

नेतृत्व करने का मौका मिलेगा। आपके नए आइडियाज की तारीफ होगी। अहंकार को खुद पर हावी न होने दें, बाकी दिन शानदार है।

कन्या:

काम के सिलसिले में आपकी बारीकियां आपको लाभ दिलाएंगी। सेहत का ख्याल रखें और खान-पान में लापरवाही न बरतें।

तुला:

पार्टनर के साथ समय बिताने और रिश्तों को बेहतर बनाने का दिन है। खरीदारी सोच-समझकर करें, ताकि बजट न बिगड़े।

वृश्चिक:

आज आपका मन गूढ़ विषयों और रिसर्च में लगेगा। मेडिटेशन करना शांति देगा। किसी पर शक करने के बजाय बातचीत पर जोर दें।

धनु:

यात्रा के योग बन रहे हैं। कुछ नया पढ़ने या जानने की इच्छा पूरी होगी। वाहन चलाते समय सावधानी रखना जरूरी है।

मकर:

करियर में तरक्की के संकेत हैं। ऑफिस में सीनियर की सलाह आपके काम आएगी। काम के साथ-साथ परिवार को भी समय दें।

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कुंभ:

दोस्तों के साथ मिलकर कुछ नया शुरू कर सकते हैं। सामाजिक दायरे में आपकी पहचान बढ़ेगी। अपनी सेहत का नियमित चेकअप कराते रहें।

मीन:

आपकी क्रिएटिविटी आज सातवें आसमान पर होगी। संगीत या कला में मन लगेगा। हालांकि, पैसों के लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

नीदरलैंड में यहूदियों को निशाना बनाकर हमला, दूर तक सुनाई दी धमाके की आवाज

नीदरलैंड में शनिवार को एक रिहायशी इलाके में स्थित यहूदी स्कूल पर जोरदार धमाका हुआ, जिसकी आवाज दूर तक सुनी गई। यह धमाका नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में हुआ। एम्सटर्डम की मेयर फेमके हल्सेमा ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने इसे यहूदी समुदाय के खिलाफ जानबूझकर किया गया हमला बताया।

हमले के बाद एम्सटर्डम शहर में सुरक्षा और सतर्कता कड़ी कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई जानकारी के मुताबिक, धमाका एम्सटर्डम के दक्षिणी हिस्से में हुआ। स्कूल में धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंच गईं। दोनों टीमों ने पहुंचकर स्कूल में नुकसान को सीमित कर दिया। गनीमत रही कि धमाका शनिवार तड़के सुबह हुआ। इस वक्त स्कूल में बच्चे नहीं थे, जिससे किसी की जान नहीं गई।

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सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

फेमके हल्सेमा ने हमले की निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि समुदाय को डराने के मकसद से किया गया हमला है। एम्सटर्डम पुलिस ने इलाके की घेराबंदी करके आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, जिससे कि हमलावरों की पहचान की जा सके।

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यहूदी संस्थानों पर हमलों में आई तेजी

दरअसल, पिछले कुछ समय में यूरोप के अलग-अलग शहरों में यहूदी संस्थानों को निशाना बनाने की घटनाओं में तेजी देखी गई है। इस घटना ने स्थानीय यहूदी आबादी की चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि इस समय दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश इजरायल कई देशों में हमलों को अंजाम दे रहा है। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि किसी संगठन ने बदले की भावना से यह हमला किया हो।

बिजली के नियमों में बड़े बदलाव, आप पर क्या असर पड़ेगा?

भारत सरकार ने बिजली प्रोडक्शन को लेकर नियमों में संशोधन किया है, जिससे कैप्टिव पावर प्लांट्स से जुड़े 3 नियमों में बदलाव किया गया है। यह विद्युत अधिनियम 2003 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। कैप्टिव पावर प्लांट्स वे होते हैं जिनमें कोई कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली का उत्पादन करती है।इन्हीं कैप्टिव पावर प्लांट्स के नियमों में बदलाव लाया गया है। इस बदलाव का मकसद साफ है कि उद्योगों के लिए अपनी खुद की बिजली पैदा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा सके। संशोधित नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

विद्युत मंत्रालय ने 14 मार्च को संशोधित नियमों के बारे में अहम बातें बताई हैं। मंत्रालय ने कहा है कि इन नियमों को कई लोगों से सलाह लेने के बाद संशोधित किया गया है। साथ ही मंत्रालय ने बताया कि पहले कैप्टिव पावर प्लांट्स से जुड़े नियमों में अस्पष्टता थी, जिसे दूर करने के लिए नियमों में बदलाव लाया गया है। अब सवाल उठता है कि कैप्टिव पावर प्लांट के नियमों में क्या स्पष्टता लाई गई है।

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बिजली के नियम अब आसान

संशोधित नियमों के तहत कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली ले सकेंगी। बस उन्हें मालिकाना हक और खपत की कानूनी शर्तों के हिसाब से पूरा करना होगा। विद्युत मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि भारतीय उद्योग अब टिकाऊ विकास और लागत कम करने के लिए सौर या पवन ऊर्जा जैसे सस्ते स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। इसी लिए कैप्टिव बिजली उत्पादन के लिए एक लचीला और भरोसेमंद नियम होना बेहद जरूरी था। सरल नियमों से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।

कैप्टिव पावर प्लांट के लिए नई गाइडलाइन

कैप्टिव प्लांट वह है, जो कई उद्योग कंपनियां अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए लगाती हैं। नए नियम इन्हीं पर केंद्रित हैं। संशोधित नियमों के अनुसार अब कंपनियों की सहायक कंपनियां और होल्डिंग कंपनियों को भी एक ही कैप्टिव यूजर माना जाएगा। इससे कॉर्पोरेट समूहों के लिए मिलकर बिजली प्लांट लगाना आसान हो जाएगा। इसके अलावा अगर कई कंपनियां मिलकर एक प्लांट लगाती हैं, तो किसी एक कंपनी के तय सीमा से अधिक या कम बिजली इस्तेमाल करने पर पूरे प्लांट का कैप्टिव स्टेटस रद्द नहीं होगा।

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सरचार्ज से राहत

संशोधित नियमों के अनुसार जब तक किसी प्लांट की वेरिफिकेशन पूरी नहीं हो जाती, तब तक कंपनियों पर सरचार्ज यानी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे उद्योगों पर तत्काल वित्तीय बोझ कम होगा और वे अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

मोटापा कम करने में इंटरमिटेंट फास्टिंग ज्यादा फायदेमंद नहीं, स्टडी में दावा

वजन घटाने के लिए लोग तरह-तरह के फिटनेस रूटीन को फॉलो करते हैं। पिछले कुछ समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। लोगों को लगता है अगर आप 15 से 16 घंंटे तक भूखे रहते हैं तो वजन तेदी से घटता है। हाल में एक स्टडी हुई जिसमें कहा गया कि यह वजन घटाने के मामले में पारंपरिक आहार सलाह से अधिक प्रभावी नहीं है। यह निष्कर्ष कोक्रेन कोलाबोरेशन द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है।

इस समीक्षा में 2016 से 2024 के बीच उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में प्रकाशित 22 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। ये अध्ययन 1,995 वयस्कों पर किये गये। सभी प्रतिभागी अधिक वजन वाले थे। इन अध्ययनों में छह से 12 महीने तक, रुक-रुक कर किए जाने वाले उपवास के प्रभाव को परखा गया। अध्ययन में अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों के परिणामों की तुलना की गई।

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स्टडी में क्या पाया गया?

प्रतिभागियों को या तो मानक आहार संबंधी सलाह दी गई। उन्होंने अंतराल उपवास अपनाया या फिर उनके मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया/प्रतीक्षा सूची में रखा गया।शोधकर्ताओं ने पाया कि ऊर्जा-सीमित आहार अपनाने वाले और रुक-रुक कर उपवास करने वाले लोगों में वजन घटाने का स्तर लगभग समान रहा। 21 अध्ययनों (1,713 प्रतिभागियों) के विश्लेषण में दोनों समूहों में 10 प्रतिशत वजन घटने से लेकर एक प्रतिशत वजन बढ़ने तक के परिणाम दर्ज किए गए। आहार संबंधी सलाह में कैलोरी कम करना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज पर आधारित भोजन या अन्य आहार योजनाएं शामिल थीं। छह अध्ययनों (448 प्रतिभागियों) में रुक-रुक कर किए जाने वाले उपवास की तुलना कोई हस्तक्षेप नहीं समूह से की गई। अंतराल उपवास समूह में औसतन प्रतिभागियों का लगभग 5% वजन घटा जबकि नियंत्रण समूह में लगभग 2% वजन की कमी देखी गई।

क्या होता है इंटरमिटेंट फास्टिंग?

शोध मानकों के अनुसार 3% का अंतर चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए लेखकों ने निष्कर्ष निकाला कि रुक-रुक कर किया जाने वाला उपवास वजन घटाने में ‘कुछ भी न करने’ से खास बेहतर साबित नहीं हुआ। समीक्षा में जीवन-गुणवत्ता पर भी अंतराल वाले उपवास के असर का आकलन किया गया, लेकिन उपलब्ध सीमित अध्ययनों के आधार पर इसका प्रभाव बहुत कम पाया गया। रुक-रुक कर किया जाने वाला उपवास वजन प्रबंधन की एक रणनीति है। यह उपवास एक ऐसी आहार पद्धति है, जिसमें कुछ निश्चित घंटों या दिनों में भोजन करने और उपवास रखने का एक क्रम चलता है। यह वजन घटाने और मेटाबोलिज्म को सुधारने के लिए बहुत लोकप्रिय है। इसमें क्या खाना है, इसके बजाय कब खाना है, इस पर ध्यान दिया जाता है।

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विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि उपलब्ध अध्ययनों की संख्या और गुणवत्ता सीमित है। कोई हस्तक्षेप नहीं तुलना वाले केवल छह अध्ययन थे और उनमें भी तरीकों में विविधता थी। साथ ही, समीक्षा केवल 12 महीने तक की अवधि के अध्ययनों पर आधारित थी। दीर्घकालिक प्रभावों, विशेषकर वजन बनाए रखने में इसकी भूमिका, पर और शोध की जरूरत बताई गई है।हालांकि कुछ अध्ययनों में अंतराल उपवास से रक्तचाप में कमी, मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम में कमी और चयापचय सुधार जैसे संभावित लाभों के संकेत मिले हैं। समीक्षा का निष्कर्ष है कि अंतराल उपवास कुछ लोगों के लिए व्यवहारिक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे पारंपरिक आहार से बेहतर मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

वर्तमान साक्ष्यों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अंतराल उपवास अपना रहा है या अपनाने पर विचार कर रहा है तो यह वजन प्रबंधन का सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। हालांकि किसी भी वजन घटाने की रणनीति के सफल होने के लिए उसका व्यक्तिगत पसंद और जीवनशैली के अनुरूप होना जरूरी है। किसी भी नए आहार की शुरुआत से पहले विशेषकर यदि कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या हो, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित है।

वैलेंटाइन डे पर ‘नंबर 5’ चमकाएगा इन राशियों की किस्मत, पढ़ें अपना राशिफल

वैलेंटाइन डे पर सितारों की चाल, आज ‘नंबर 5’ चमकाएगा इन राशियों की किस्मत

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वैलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी को कई ग्रहों पर कृपा बरस रही है। फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि और शनिवार का दिन होने के साथ-साथ आज का मूलांक 5 है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मूलांक 5 का स्वामी बुध होता है, जो बुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। आज चंद्रमा भी धनु राशि में बैठे हैं, जिससे लोगों में कुछ नया करने का जज्बा देखने को मिलेगा।

यह दिन उन लोगों के लिए बेहतरीन साबित होने वाला है जो अपने रिश्तों में नयापन लाना चाहते हैं या किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की सोच रहे हैं। शनिवार के अनुशासन और मूलांक 5 की चंचलता का यह मेल आज आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही निखार लाएगा। आइए जानते हैं, आपकी राशि के हिसाब से आज का दिन आपके लिए क्या खास लेकर आया है।

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जानें कैसा रहेगा आपकी राशि का हाल?

मेष: आज का दिन जोश से भरा है। अगर किसी से दिल की बात कहनी है, तो हिचकिचाएं नहीं। बस ध्यान रखें कि जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला न लें जिससे विवाद हो।

वृषभ: आपके लिए आज का दिन काफी रोमांटिक रहने वाला है। इन्वेस्टमेंट के लिए भी समय अच्छा है लेकिन फिजूलखर्ची से बचें। पुराने झगड़ों को भूलकर आगे बढ़ें।

मिथुन: अपनी बातों से आप आज किसी का भी दिल जीत सकते हैं। दोस्तों और पार्टनर के साथ छोटी यात्रा का प्लान बन सकता है। अफवाहों पर ध्यान न दें।

कर्क: आज घर-परिवार और अपनों के साथ वक्त बिताने का दिन है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें, खुद को शांत रखने के लिए एक्सरसाइज का सहारा लें।

सिंह: आज आप महफिल की जान बनेंगे। पार्टनर को सरप्राइज देने के लिए दिन बढ़िया है। बस अपने व्यवहार में घमंड को जगह न दें।

कन्या: आज अपनी सेहत और डेली रूटीन पर ध्यान दें। पार्टनर के साथ शांति से वक्त बिताएं। छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेने से बचना ही समझदारी है।

तुला: रिश्तों में तालमेल बिठाने का हुनर आज आपके काम आएगा। पार्टनर को कोई खास तोहफा दें। कंफ्यूजन की स्थिति से बचें और खुद पर भरोसा रखें।

वृश्चिक: आज का दिन रिसर्च और गहराई से सोचने का है। रिश्तों में शक को जगह न दें। यात्रा के योग बन रहे हैं जो आपके लिए फायदेमंद रहेंगे।

धनु: चंद्रमा आपकी ही राशि में है, इसलिए आज आप काफी एनर्जेटिक महसूस करेंगे। नए अवसरों को हाथ से न जाने दें लेकिन जोश में आकर कोई गलत वादा न करें।

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मकर: करियर के लिहाज से आज का दिन काफी मजबूत है। मेहनत का फल मिलेगा। खुद को अकेला न समझें, परिवार का साथ आपकी हिम्मत बढ़ाएगा।

कुंभ: आज कुछ नया सोचने और करने का दिन है। दोस्तों के साथ पार्टी का आनंद लें। व्यवहार में जिद्दीपन न लाएं और अपनी सेहत का ख्याल रखें।

मीन: आपकी इमेजीनेशन आज सातवें आसमान पर होगी। पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा। भावनाओं में बहने के बजाय हकीकत को समझकर फैसले लें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

एपस्टीन के साथ पूर्व प्रिंस और दिग्गज नेता की फोटो, ब्रिटेन में मचा बवाल

अमेरिकी न्याय विभाग की नई तस्वीरों ने ब्रिटेन में खलबली मचा दी है। पहली बार ब्रिटिश नेता पीटर मंडेलसन और पूर्व राजकुमार एंड्रयू की फोटो यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ आई है। एपस्टीन फाइल्स के सार्वजनिक होने के बाद दोनों ही लोगों की ब्रिटेन में खूब आलोचना हो रही है। पिछले महीने ब्रिटिश पुलिस ने कदाचार के आरोप में पूर्व राजकुमार एंड्रयू और मैंडेलसन को गिरफ्तार किया था।

सबसे पहले आईटीवी ने इस तस्वीर के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की। फोटो में एंड्रयू और पीटर मंडेलसन बाथरोब पहने लकड़ी की कुर्सी में बैठे हैं। दोनों के सामने एपस्टीन टी-शर्ट पहने बैठा है। यह पहली बार है जब पीटर मंडेलसन और पूर्व राजकुमार एंड्रयू की एकसाथ एपस्टीन के साथ फोटो आई है। सामने पेज पर तीन अमेरिकी झंडे वाले दिन कप रखे हैं। वहीं दो पानी के ग्लास भी हैं।

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जेल में हो चुकी एपस्टीन की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस तस्वीर को 1999 से 2000 के बीच खींची गई। इसकी लोकेशन मैसाचुसेट्स में स्थित मार्था वाइनयार्ड द्वीप की बताई जा रही है। जेफरी एपस्टीन को साल 2018 में यौन अपराधों का दोषी ठहराया गया था। साल 2019 में उसकी जेल में ही मौत हो गई।

एंड्रयू और मैंडेलसन पर क्या आरोप?

पूर्व राजकुमार एंड्रयू 2001 से 2011 के बीच ब्रिटेन के व्यापार दूत थे। उन पर अपने कार्यकाल के दौरान ब्रिटेन के संवेदनशील दस्तावेज एपस्टीन के साथ साझा करने का आरोप है। वहीं मैंडेलसन पर आरोप है कि उन्होंने मंत्री रहते एपस्टीन को 2008 की आर्थिक मंदी समेत तमाम तरह की आधिकारिक जानकारी को लीक किया था। हालांकि दोनों बार-बार इन आरोपों का खंडन करते हैं।

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एंड्रयू से छीन लिया गया शाही खिताब

पिछले साल ही पूर्व राजकुमार एंड्रयू से शाही खिताब छीन लिया गया। इसके अलावा उन्हें अपना आधिकारिक घर भी छोड़ना पड़ा। उधर, एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद वाशिंगटन में ब्रिटेन के दूत के तौर पर तैनात मैंडेलसन को भी पद से हटा दिया गया है। पूर्व राजकुमार एंड्रयू की एक फोटो खूब वायरल हुई। इसमें एक महिला जमीन पर लेटी है और एंड्रयू उसके ऊपर झुके हैं। एक अन्य फोटो में वह कई महिलाओं की गोद में लेटे हैं।

5 राज्यों के लिए विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 4 मई को आएंगे नतीजे

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। इन राज्यों के विधानसभा का कार्यकाल मई और जून की कई तारीखों को समाप्त हो रहा है। नियम के मुताबिक चुनाव आयोग को कार्यकाल खत्म होने के पहले ही चुनाव कराना होता है।

मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के मुताबिक इन तारीखों को पांचों राज्यों के लिए इन तारीखों को चुनाव करवाए जाएंगे-

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 शुरू होंगे – 23 अप्रैल, 29 अप्रैल

तमिलनाडु चुनाव 2026 शुरू होंगे – 23 अप्रैल

केरल चुनाव 2026 शुरू होंगे – 9 अप्रैल

असम चुनाव 2026 शुरू होंगे – 9 अप्रैल

पुडुचेरी चुनाव 2026 शुरू होंगे – 9 अप्रैल

सभी पांच चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

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बुधवार को हुई थी मीटिंग

EC की यह घोषणा इस हफ़्ते की शुरुआत में 11 मार्च (बुधवार) को पोल बॉडी की मीटिंग के बाद आई है। इसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव शेड्यूल और फेज़-वाइज़ पोलिंग प्लान को फ़ाइनल किया गया था।

इन राज्यों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) पूरा हो चुका है, फ़ाइनल वोटर रोल पहले ही पब्लिश हो चुके हैं, हालांकि बंगाल में सप्लीमेंट्री लिस्ट हो सकती हैं।

रिव्यू का काम पूरा

EC के सीनियर अधिकारी पिछले मंगलवार को कई राज्यों में अपनी तैयारियों का रिव्यू पूरा करके दिल्ली लौटे थे। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बुधवार को ‘राज्य चुनाव मशीनरी और सेंट्रल ऑब्जर्वर द्वारा जमा की गई फील्ड रिपोर्ट का आकलन करने’ के लिए मुलाकात की, जिसके बाद पोलिंग के फेज पर आखिरी फैसला लिया गया।

EC अधिकारियों ने देश भर में रिव्यू के आखिरी हिस्से में पश्चिम बंगाल का दो दिन का दौरा किया, इस दौरान उन्होंने सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव और पुलिस अधिकारियों, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की।

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उपचुनाव की भी तारीखें घोषित

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के अलावा चुनाव आयोग ने 6 राज्यों के लिए उपचुनावों की भी घोषणा की है-

गोवा, कर्नाटक, नागालैंड, त्रिपुरा

• नोटिफिकेशन: 16 मार्च 2026

• नॉमिनेशन की आखिरी तारीख: 23 मार्च 2026

• स्क्रूटनी: 24 मार्च 2026

• नाम वापस लेने की तारीख: 26 मार्च 2026

• पोलिंग: 9 अप्रैल 2026

गुजरात और महाराष्ट्र

• नोटिफिकेशन: 30 मार्च 2026

• नॉमिनेशन की आखिरी तारीख: 6 अप्रैल 2026

• स्क्रूटनी: 7 अप्रैल 2026

• नाम वापस लेने की तारीख: 9 अप्रैल 2026

• पोलिंग: 23 अप्रैल 2026

सभी उपचुनावों के लिए काउंटिंग

• 4 मई 2026

कम फेज में चुनाव क्यों?

भारत के चुनाव आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 दो फेज़ में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि 2021 में आठ फेज़ में चुनाव हुए थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के वोटों की गिनती 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के साथ होगी।

यह पूछे जाने पर कि पश्चिम बंगाल में फेज़ की संख्या आठ से घटकर सिर्फ़ दो क्यों हो गई है, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया था और फेज़ की संख्या कम करना और इसे इतना कम करना ज़रूरी समझा ताकि यह सबके लिए आसान हो।

2 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टेशन

ज्ञानेश कुमार के मुताबिक 2 लाख 19 हजार पोलिंग स्टेशनों पर चुनाव कराए जाएंगे। इस दौरान करीब 25 लाख चुनाव अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर होंगे। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हर पोलिंग स्टेशन पर 750-900 मतदाता होंगे।

ज्यादा पानी पीना शरीर के लिए जानलेवा, जानिए कितनी मात्रा में पानी पीना सही?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि पानी पीना सबसे आसान काम है। जब आपको प्यास लगती हैं तब पानी पीते हैं और जब नहीं लगती है तो नहीं पीते हैं लेकिन ये आदत हमारी किडनी के लिए नुकसानदायक है। किडनी टॉक्सिन को रिलीज करता है, इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस करता है और शरीर में तरल पदार्थ को नियंत्रित करने का काम करता है। जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं तो किडनी में स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और किडनी की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

कुछ लोग दिन भर कॉफी, चाय और जूस पीते हैं। कैफीन या शुगर वाली ड्रिंक शरीर से पानी को सोखने का काम करते हैं जिससे किडनी को शरीर में पानी बनाए रखने में दिक्कत होती है। एक आम गलतफहमी है कि पानी तभी पीना चाहिए जब आपको प्यास लगे। आपको प्यास तब लगती है जब शरीर पूरी तरह से डिहाइड्रेट हो चुका होता है। इस कारण किडनी पर दबाव पड़ता है।

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अधिक पानी पीने से होती है ये समस्या

ज्यादातर लोगों को कम पानी पीने के नुकसान पता है। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कुछ लोग बहुत अधिक पानी पीते हैं। अधिक पानी पीने के कारण Hyponatremia की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। Hyponatremia एक ऐसी स्थिति है जब बल्ड में सोडियम का लेवल कम हो जाता है। इस वजह से कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। इसका प्रभाव आपके लिवर और किडनी पर पड़ता है। गंभीर स्थिति में दिमाग में पानी भर जाता है, व्यक्ति कोमा में चला जाता है।

अधिक पानी पीने से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं

कई लोगों को लगता है कि अधिक पानी पीने की वजह से टॉक्सिन आसानी से बाहर निकल जाते हैं। अधिक पानी पीने की वजह से खून में सोडियम घूलता है जिसकी वजह से हाइपोनेट्रमिया का खतरा बढ़ जाता है।

प्यास लगने का मतलब आप ठीक है

आप पानी तब पीते हैं जब प्यास लगती है तो यह गलत तरीका है। हमें प्यास तब लगती है जब किडनी पर दबाव बढ़ता है। इस कारण से पेशाब का रंग पीला होता है। इसके अलावा किडनी में स्टोन, यूटीआई समेत अन्य परेशानियां भी हो सकती है।

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कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए?

एक महिला को दिन भर में 2.2 लीटर और पुरुष को 3 लीटर पानी पीना चाहिए। किडनी या अन्य किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह से पानी पीना चाहिए।

क्या है शिव के डमरू मंत्र का महत्व? जानें फल और इतिहास

हिंदू धर्म में भगवान शिव के स्वरूप के साथ जुड़ी हर वस्तु का अपना एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य है। ऐसा कहा जाता है कि उनके त्रिशूल पर बंधा ‘डमरू’ केवल एक वाद्य यंत्र नहीं बल्कि सृष्टि के सृजन और विनाश की धुन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब संसार में आवाज तो थी लेकिन उसमें कोई लय या ताल नहीं था। देवी सरस्वती के प्रकट होने के बाद भगवान शिव ने 14 बार डमरू बजाया, जिससे निकले नाद ने दुनिया को संगीत, व्याकरण और ‘माहेश्वर सूत्र’ का उपहार दिया।

यह डमरू नाद साधना का प्रतीक है जिससे ‘ॐ’ की उत्पत्ति हुई। धार्मिक जानकारों का मानना है कि शिव जब आनंदित होकर तांडव करते हैं, तो डमरू की थाप से प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। वहीं, आध्यात्मिक नजरिए से डमरू का ऊपरी और निचला हिस्सा आकाश और पाताल को जोड़ता है, जबकि बीच का हिस्सा वह बिंदु है जहां से जीवन की शुरुआत होती है।

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‘माहेश्वर सूत्र’

माहेश्वर सूत्र डमरू से निकला 14 मंत्र का सूत्र है। यह माना जाता है कि डमरू से निकले गूंज से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। भगवान शिव के डमरू से जो 14 ध्वनियां निकली थीं, उन्हें ही ‘माहेश्वर सूत्र’ कहा जाता है। ये मंत्र इस प्रकार हैं: अइउण्, ऋऌक्, एओङ्, ऐऔच्, हयवरट्, लण्, ञमङणनम्, झभञ्, घढधष्, जबगडदश्, खफछठथचटतव्, कपय्, शषसर्, हल्।

डमरू मंत्र के लाभ

शास्त्रों के अनुसार, इन सूत्रों का उपयोग प्राचीन काल में इलाज के लिए भी किया जाता था। इसके नियमित जाप से कई तरह के फायदे मिलते हैं। माना जाता है कि शिव पूजा के बाद इन 14 सूत्रों का 11 बार जाप करने से पुराने बीमारियों में सुधार होता है। लोगों का तो यह भी मानना है कि जहरीले जीवों के असर को कम करने के लिए भी इसका निरंतर जाप प्रभावी माना गया है।

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आदि शंकराचार्य अपने शिष्यों का ध्यान केंद्रित करने के लिए डमरू का उपयोग करते थे। आज भी यह तनाव दूर करने और फोकस बढ़ाने का बेहतरीन जरिया है।

लोगों को ऐसा विश्वास है कि डमरू की ध्वनि घर के वास्तु दोष और बुरी नजर के प्रभाव को खत्म करती है। छात्रों के लिए इन मंत्रों का जाप याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ाने वाला माना जाता है।

70 सेकंड में 16 करोड़ की लूट, अमेरिका में भारतीय मूल के ज्वैलर्स को बनाया निशाना

अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के फ्रेमोंट शहर में एक भारतीय-अमेरिकी परिवार के ज्वेलरी शोरूम ‘कुमार ज्वेलर्स’ में बड़ी डकैती की घटना हुई है। यहां लगभग 20 से 25 नकाबपोश बदमाशों ने एक साथ धावा बोलकर महज 70 सेकंड के अंदर करीब 16 करोड़ रुपये से ज्यादा के सोने और हीरे के गहने लूट लिए। इस पूरी वारदात का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हमलावर हथौड़ों और कुल्हाड़ियों से कांच के काउंटर तोड़ते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार यह घटना तब हुई जब अचानक शोरूम के बाहर कई गाड़ियां आकर रुकीं। उनमें से दर्जनों नकाबपोश युवक निकले। सभी ने हुडी पहन रखी थी। वे सीधे शोरूम के अंदर घुसे और बिना किसी देरी के हथौड़ों से गहनों के डिस्प्ले केस तोड़ने लगे। बदमाशों ने मात्र 70 सेकंड के अंदर दुकान का लगभग 80 प्रतिशत कीमती सामान अपने बैगों में भरकर भाग निकले।

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मालिक और कर्मचारी ने दुकान से भागकर बचाई जान

यह शोरुम वर्मा परिवार का है, जो लंबे समय से फ्रेंमोंट में अपना बिजनेस चला रहे हैं। जिस समय यह हमला हुआ, उस वक्त शोरुम के मालिक और एक कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए दुकान के पिछले हिस्से की ओर भाग गए थे। राहत की बात यह रही कि इस पूरी लूटपाट के दौरान किसी को कोई चोट नहीं आई, लेकिन पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी

घटना की सूचना मिलते ही फ्रेमोंट पुलिस ने तुरंत मामला संभाला और लुटेरों की एक संदिग्ध गाड़ी का पीछा किया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी उम्र 19 से 20 साल के बीच बताई जा रही है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अफातुपेताइकी फासिसिला, जोस हेराडा-आरागॉन, एंड्रेस फिलिस्तीनो और टॉम पार्कर डोनेगन के रूप में हुई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़े ग्रुप का हिस्सा हैं।

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भारतीय लोगों में बढ़ी चिंता

कैलिफोर्निया में आजकल दुकान का कांच तोड़कर सामान लूटने की घटनाएं बहुत बढ़ गई हैं। पिछले कुछ महीनों में कई बार उन दुकानों को निशाना बनाया गया है, जिनके मालिक भारतीय या एशियाई देशों के रहने वाले हैं। इस ताजा डकैती के बाद वहां रह रहे भारतीय दुकानदारों और व्यापारियों के मन में सुरक्षा को लेकर काफी खौफ बैठ गया है। वे डरे हुए हैं कि अगली बार उनके साथ ऐसा न हो जाए।

‘कांशीराम को मिले भारत रत्न’, राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच विपक्षी नेता राहुल गांधी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की। कांशीराम की जयंती के अवसर पर की गई इस मांग को यूपी की राजनीति में दलित वोटबैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी कांशीराम को सामाजिक न्याय का योद्धा बताते हुए कहा कि उन्हें सम्मानित करना उस पूरे आंदोलन का सम्मान होगा, जिसने करोड़ों लोगों को हक और हिस्सेदारी की राह दिखाई। उन्होंने तर्क दिया कि कांशीराम ने न केवल बहुजन समाज में चेतना पैदा की, बल्कि भारतीय राजनीति के स्वरूप को ही बदल दिया। लखनऊ में हाल ही में आयोजित संविधान सम्मेलन के बाद राहुल का यह कदम कांग्रेस की दलितों तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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आपको बता दें कि BSP संस्थापक द्वारा तैयार किया गया कैडर आधारित आंदोलन फिलहाल नेतृत्व और जनाधार के संकट से जूझ रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने के बाद BSP का गैर-जाटव दलित वोटबैंक सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर झुका है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को सम्मान दिलाने की पैरवी करना BSP के बचे-खुचे आधार में सेंध लगाने की एक सोची-समझी रणनीति है। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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20% दलित वोटरों पर सबकी नजर

उत्तर प्रदेश की सियासत में करीब 20 प्रतिशत दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कांशीराम की विरासत पर अधिकार जताने की यह होड़ इसलिए भी तेज है क्योंकि कभी इस वोटबैंक पर एकछत्र राज करने वाली BSP का ग्राफ लगातार गिर रहा है।

राहुल गांधी की यह मांग सीधे तौर पर उन मतदाताओं को संदेश है जो मायावती के विकल्प की तलाश में हैं। यूपी के जिलों में इन दिनों कांशीराम के पोस्टर विपक्षी दलों के झंडों के साथ दिखना इस बात का प्रमाण है कि 2027 की बिसात बिछ चुकी है।

घबराहट भगाने के लिए खाई जाने वाली मिठाई, क्यों बढ़ाती है परेशानी?

जब भी हमें घबराहट या तनाव महसूस होता है, हमारा दिमाग तुरंत आराम पाने की कोशिश करता है। ऐसे समय में दिमाग डोपामाइन नाम के ‘फील गुड हार्मोन’ की तलाश करता है, जो हमें अच्छा महसूस कराता है। जब हम चीनी या मीठी चीजें खाते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन का लेवल अचानक बढ़ जाता है। इससे हमें कुछ समय के लिए सुकून और खुशी का एहसास होता है। इसी वजह से लोग अक्सर अनजाने में घबराहट या तनाव कम करने के लिए मीठी चीजों की ओर आकर्षित हो जाते हैं।

हालांकि, यह राहत बहुत कम समय के लिए होती है। जैसे ही शुगर लेवल गिरता है, शरीर इसे संकट का संकेत मानता है। इस स्थिति में शरीर इंसुलिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स को सक्रिय कर देता है, जिससे दिल की धड़कन तेज होना, कंपकंपी और चिड़चिड़ापन शुरू हो जाता है। यह शारीरिक प्रतिक्रिया बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी एक पैनिक अटैक के दौरान महसूस होती है।

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क्यों बढ़ जाती है परेशानी?

चीनी खाने के बाद शुगर लेवल में आने वाला ‘स्पाइक’ और फिर अचानक ‘क्रैश’ शरीर को तनाव की स्थिति में डाल देता है। ज्यादा मीठा शरीर में सूजन को बढ़ावा देता है, जिसका सीधा असर मेंटल हेल्थ और मूड स्विंग्स पर पड़ता है। शुगर के इस उतार-चढ़ाव से चिड़चिड़ापन और थकान महसूस होती है।

ज्यादा शुगर से नींद की क्वालिटी भी खराब होती है। कम नींद लेना घबराहट और बेचैनी को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है। मीठी चीजों में पोषक तत्व नहीं होते। जब शरीर में विटामिन्स जैसे मैग्नीशियम और विटामिन B12 की कमी होती है, तो दिमाग स्ट्रेस को झेलने में असमर्थ हो जाता है।

घबराहट कम करने के ऑप्शन

अगर आपको बार-बार घबराहट या बेचैनी महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे में आपको तुरंत किसी डॉक्टर से मिलकर सही सलाह और इलाज शुरू करना चाहिए। एंजायटी कई कारणों से हो सकती है। कभी-कभी यह शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी की वजह से होती है, तो कभी किसी अंग में समस्या के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसलिए इसका सही कारण जानना जरूरी है।

जब भी आपको घबराहट महसूस हो, तो तुरंत मीठी चीजें खाने की बजाय बेहतर विकल्प अपनाएं। आप हर्बल या ग्रीन टी पी सकते हैं। इसके अलावा बादाम, अखरोट, ओट्स, दलिया, नींबू पानी और नारियल पानी जैसे हल्के और सेहतमंद विकल्प भी ले सकते हैं। सही खान-पान और समय पर डॉक्टर की सलाह से इस समस्या को संभाला जा सकता है।

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हाल ही में जर्नल ऑफ ह्यूमन न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स की एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग ज्यादा मीठा खाते हैं, उनमें चिंता और घबराहट की समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसका मतलब यह है कि हमारा खान-पान सीधे तौर पर हमारे दिमाग और मानसिक सेहत को प्रभावित करता है।

अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा चीनी खाने से सिर्फ मोटापा या शुगर जैसी बीमारियां होती हैं लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। ज्यादा मीठा खाने से मानसिक परेशानी, जैसे एंजायटी, भी बढ़ सकती है। इसलिए बढ़ती चिंता को कम करने के लिए सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहना काफी नहीं है। इसके साथ-साथ अपनी लाइफस्टाइल और खाने की आदतों में बदलाव करना भी बहुत जरूरी है।

बिहार का बाबा विदेश्वरनाथ मंदिर, जानिए क्यों कहते हैं छोटा देवघर

बिहार के मिथिलांचल में आस्था के कई केंद्र हैं लेकिन मधुबनी जिले के झंझारपुर में ‘विदेश्वरनाथ महादेव मंदिर’ या बाबा बिदेश्वर स्थान का स्थान इन सभी में मुख्य है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का सीधा संबंध विदेह के राजा जनक से है। ऐसी चर्चा है कि ‘विदेह’ शब्द से ही इस मंदिर का नाम ‘विदेश्वर’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘विदेह के स्वामी’। स्थानीय लोग इसे बाबा वैद्यनाथ धाम का छोटा भाई मानते हैं। लोगों में यह विश्वास है कि यहां जल चढ़ाने से वही फल मिलता है जो देवघर में मिलता है।

इतिहास की बात करें तो यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। मंदिर की दीवारों पर ‘मिथिलाक्षर’ लिपि में शिलालेख मौजूद हैं, जो बताते हैं कि सन 1300 ईस्वी के आसपास इस पुराने मंदिर की फिर से मरम्मत करने का प्रयास किया गया था।

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शिवलिंग और महाशिवरात्रि में आयोजन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग ‘स्वयंभू’ है, जिसका अर्थ है कि यह स्वयं प्रकट हुआ है। पहली धारणा के अनुसार, मिथिलांचल के लोगों के लिए इस मंदिर का महत्व ‘छोटा देवघर’ के समान है जबकि कुछ लोग इसे काशी विश्वनाथ मंदिर के समान भी मानते हैं। कुल मिलाकर, अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद यह स्थान शिव भक्तों के बीच बहुत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। लोग आज भी पूरी श्रद्धा से यहां की परंपराओं और विश्वासों का पालन करते हैं।

महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में मुख्य शिवलिंग के साथ माता पार्वती और नंदी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां की एक अनोखी परंपरा भगवान भैरवनाथ से जुड़ी है। कहा जाता है कि भाद्र पूर्णिमा के दिन यहाँ पूरे शिव परिवार का मिलन होता है, जिसे देखने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

सावन के महीने और माघ की मकर संक्रांति के दौरान यहां मेले जैसा माहौल रहता है। लाखों भक्त यहां महादेव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। यहां होने वाले मुंडन और उपनयन संस्कार विशेष फलदायी माने जाते हैं।

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कैसे पहुंचें?

यह मंदिर झंझारपुर-दरभंगा स्टेट हाईवे के पास विदेश्वर गांव में स्थित है। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए लोहना रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी विकल्प है।

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

क्या UAE में मचने वाली है तबाही? ईरान ने कहा- खाली कर दें इलाका

खार्ग आइलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान भड़क उठा है। उसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को बड़ी धमकी दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने यूएई से कहा कि खार्ग आइलैंड पर हमले के बाद यूएई में स्थित अमेरिकी ठिकाने वैध लक्ष्य हैं।

अपनी धमकी में आईआरजीसी ने कहा है कि शिपिंग पोर्ट, डॉक और यूएई के कुछ शहरों में ठहरे अमेरिकी सैनिकों के अड्डे और अमेरिकी मिसाइलों के सोर्स पर हमला करके अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और इलाके की रक्षा करना वैध अधिकार है। ईरान ने यूएई से मिलिट्री इलाके और पोर्ट को खाली करने का अनुरोध किया है, ताकि आबादी को नुकसान से बचाया जा सके।

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इस बीच आईआरजीसी की नेवी ने बहरीन, कुवैत और अब धाबी में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाने का दावा किया है। आईआरजीसी की नौसेना प्रमुख एडमिरल अलीरेजा तांगसिरी ने दावा किया कि उनकी नेवी ने तीन मिलिट्री बेस पर हमलों को अंजाम दिया है। उनके मुताबिक अबू धाबी में स्थित अल-धफरा, कुवैत के अल-अदिरी और बहरीन के शेख ईसा बेस को निशाना बनाया गया है।

क्यों अहम है खार्ग आइलैंड?

रणनीतिक तौर पर खार्ग ईरान का सबसे अहम आइलैंड है। यहां से ईरान का 90 फीसद तेल निर्यात किया जाता है। अभी तक अमेरिका यहां हमला करने से बचता रहा है।

यूएस सेंटकॉम का दावा कि उसने यहां 90 सैन्य टारगेट को तबाह कर दिया है। सेंटकॉम ने बताया कि नेवल माइन स्टोरेज फैसिलिटी, मिसाइल स्टोरेज बंकर और कई दूसरी मिलिट्री साइट्स को नष्ट किया गया है। अमेरिकी फोर्स ने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाते हुए 90 से अधिक ईरानी मिलिट्री टारगेट पर हमला किया है।

तेल ठिकानों को तबाह करने की धमकी

अमेरिकी हमले के बावजूद ईरानी अधिकारियों का दावा है कि खार्ग आइलैंड से तेल का निर्यात जारी है। तेल कंपनियों की गतिविधियां भी बिना रुकावट जारी हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया तो उसकी तेल सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा। बता दें कि स्ट्रेट बंद होने के कारण दुनिया के सामने वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।

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बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर अटैक

इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला किया गया है। अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां C-RAM एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ी एक यूनिट को निशाना बनाया गया है। 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली बमबारी में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान से जुड़े इस्लामिक रेजिस्टेंस संगठन अमेरिकी ठिकानों पर हमले को अंजाम दे रहा है।