विकास खंड जमुनहा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर में सोमवार को 31 लोगों को रेबीज का टीका लगाया गया। इन सभी लोगों को कुत्ते या बंदर ने काटा था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मल्हीपुर क्षेत्र में कुत्तों और बंदरों के काटने के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। टीका लगवाने वालों में अधिकांश लोग आवारा कुत्तों के शिकार हुए हैं, जबकि कुछ मामलों में बंदरों के काटने की घटनाएं भी सामने आई हैं। सभी घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के साथ रेबीज वैक्सीन दी। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि कुत्ते या बंदर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर टीकाकरण कराना आवश्यक है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
मल्हीपुर CHC में 31 लोगों को लगा रेबीज टीका:कुत्ता-बंदर काटने के बढ़े मामले
4 लाख से ज्यादा किटकैट चॉकलेट की हो गई चोरी, यूरोप में मची खलबली
यूरोप में मशहूर कंपनी नेस्ले को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कंपनी का 12 टन किटकैट चॉकलेट चोरी हो गया है। यह चोरी चॉकलेट के ट्रांसपोर्ट के दौरान हुई थी। चोरों ने किटकैट चॉकलेट से भरा ट्रक गायब कर दिया था। ट्रक में लगभग 4,13,793 किटकैट चॉकलेट के पैकेट थे, जिनका वजन लगभग 12 टन था। माना जा रहा है कि चॉकलेट की चोरी होने की वजह से ईस्टर त्योहार के दौरान मार्केट में किटकैट की उपलब्धता कम होगी। नेस्ले कंपनी ने आशंका जताई है कि कई टन किटकैट चॉकलेट ब्लैक मार्केट में बिक सकते हैं।
नेस्ले कंपनी के मुताबिक, चॉकलेट से भरा ट्रक इटली से पोलैंड जा रहा था, उसी दौरान चोरों ने चॉकलेट गायब की थी। नेस्ले कंपनी के लिए यह घटना दुखदायक है क्योंकि कंपनी को चॉकलेट की चोरी की वजह से लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। इस घटना को लेकर नेस्ले कंपनी के प्रवक्ता ने रोचक बयान दिया है। प्रवक्ता ने कहा है, ‘कंपनी ग्राहकों को किटकैट के साथ ब्रेक लेने के लिए मोटिवेट करती है लेकिन इस मामले को देखकर लगता है कि चोरों ने इस मैसेज को कुछ ज्यादा ही सच मान लिया और 12 टन चॉकलेट लेकर गायब हो गए।’ नेस्ले कंपनी ने चॉकलेट की चोरी के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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बैच कोड की मदद से चॉकलेट की खोज
किटकैट चॉकलेट के पैकेट पर यूनिक कोड छपा होता है। इस कोड को ट्रेस करके चॉकलेट को खोजने की कोशिश की जा रही है। अगर कोई स्कैनर से इसे स्कैन करता है तो कंपनी को तुरंत सूचना मिल जाएगी कि चॉकलेट कहां बिक रहा है।
इसके बाद कंपनी पुलिस के साथ जानकारी शेयर करेगी। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है और कंपनी के सप्लाई चेन पार्टनर्स के साथ मिलकर जांच की जा रही है। फिलहाल चोरी से संबंधित कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।
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चॉकलेट की चोरी का असर
माना जा रहा है कि यूरोप की दुकानों में किटकैट की अस्थायी कमी हो सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि ईस्टर त्योहार के दौरान किटकैट की मांग बढ़ जाती है लेकिन इस बार चोरी की वजह से कंपनी को भारी नुकसान होगा।
नवाबगंज में बहु-बेटी सम्मेलन आयोजित:मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत चौपाल लगाकर महिलाओं को किया जागरूक
नवाबगंज थाना क्षेत्र में मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत बहु-बेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन ग्राम पंचायत जलालपुर के शंकरपुर गांव में चौपाल लगाकर आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और स्वावलंबन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। थाना प्रभारी निरीक्षक रमाशंकर यादव के नेतृत्व में एंटी रोमियो मिशन शक्ति टीम ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। टीम में उपनिरीक्षक विशाल पाठक, हेड कांस्टेबल विनोद कुमार चौधरी, महिला आरक्षी निराला चौरसिया, महिला आरक्षी ममता कश्यप, महिला आरक्षी कोमल और कांस्टेबल दुर्गा चौहान शामिल थे। सम्मेलन के दौरान महिलाओं और स्थानीय लोगों को उच्चाधिकारियों के निर्देशों के क्रम में जागरूक किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं और महिलाओं पर हो रहे अपराधों के प्रति उन्हें सचेत किया गया। बालिकाओं से उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली गई। इस अवसर पर साइबर अपराध और महिला संबंधी अपराधों की शिकायत के लिए विभिन्न टोल फ्री नंबरों की जानकारी दी गई, जिनमें 1098, 1076, 112, 181, 108 और साइबर संबंधी शिकायतों के लिए 1930 शामिल हैं। साथ ही, कन्या सुमंगला योजना, मातृ वंदना योजना, वृद्धा पेंशन योजना, आयुष्मान प्रधानमंत्री और उज्ज्वला योजना जैसी सरकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
ललिया पुलिस ने मथुरा बाजार में महिलाओं को किया जागरूक:मिशन शक्ति के तहत सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर जोर
बलरामपुर जिले के ललिया थाना क्षेत्र स्थित मथुरा बाजार स्थित सचिवालय और डिग्री कॉलेज में पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान उन्हें ‘मिशन शक्ति’ अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री विकास कुमार के निर्देश और मिशन शक्ति नोडल प्रभारी अपर पुलिस अधीक्षक श्री विशाल पाण्डेय के नेतृत्व में यह अभियान चलाया जा रहा है। जनपद के सभी थानों में गठित मिशन शक्ति टीम और एंटी-रोमियो टीम द्वारा मिशन शक्ति अभियान (फेज–5.0) के द्वितीय चरण के तहत ‘बहु-बेटी सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। इसमें क्षेत्र की महिलाओं, बालिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिला बीट अधिकारियों ने ग्राम चौपाल लगाकर महिलाओं की समस्याओं को सुना और उनका त्वरित निस्तारण किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बालिकाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, ‘गुड टच–बैड टच’, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध (डिजिटल अरेस्ट), महिला अधिकारों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर सार्थक चर्चा की गई। शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए पम्पलेट भी वितरित किए गए। साथ ही, थाना स्तर पर स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और उपलब्ध सेवाओं के बारे में भी बताया गया, ताकि महिलाएं और बालिकाएं अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इन सेवाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठा सकें।
नीलम त्रिपाठी बनीं नायब तहसीलदार:सिद्धार्थनगर की बेटी ने पीसीएस परीक्षा में सफलता पाई
सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मधुकरपुर निवासी नीलम त्रिपाठी ने पीसीएस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर नायब तहसीलदार का पद हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में सकारात्मक माहौल है। नीलम त्रिपाठी इटवा तहसील में लेखक के रूप में कार्यरत रामतेज त्रिपाठी की पुत्री हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता को युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है। नीलम की प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के विद्यालयों से हुई। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरी निष्ठा से जुट गईं। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनके चयन की खबर गांव और क्षेत्र में पहुंचने पर बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया। परिजनों, रिश्तेदारों, शिक्षकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ग्राम मधुकरपुर में इस उपलब्धि को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह देखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि नीलम की सफलता यह दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगी।
कभी बंद हुआ, अब हो रही वापसी, कितने काम आएगा मिट्टी का तेल?
लगभग एक दशक पहले तक सरकारी राशन की दुकानों पर मिट्टी का तेल (केरोसिन) मिला करता था। सब्सिडी वाले रेट पर मिलने वाला यह तेल लालटेन या लैंप जलाने, मिट्टी के तेल वाले स्टोब जलाने और कई अन्य कामों में इस्तेमाल होते थे। 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद उज्ज्वला योजना शुरू हुई तो गैस कनेक्शन बांटे गए, बिजली व्यवस्था बेहतर हुई और केरोसिन मिलना बंद हो गया। अब ईरान में जारी जंग के चलते दुनिया के सामने ऊर्जा संकट पैदा हो रहा है तो सरकार ने मिट्टी का तेल बेचने की अनुमति फिर से दे दी है। इस फैसले को कई नजरिए से देखा जा रहा है।
इसका एक पहलू यह भी है कि अब फिर से राशन की दुकानों से वही मिट्टी का तेल मिलेगा जिसे एक दशक पहले बंद कर दिया गया था। देखना यह होगा कि इसका इस्तेमाल किस तरह होता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या मिट्टी के तेल से जलने वाली लालटेन, लैंप और स्टोव लोगों के पास बचे भी हैं या नहीं। आइए इसी मिट्टी के तेल का इतिहास जानते हैं कि कैसे एक समय पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा यह तेल अचानक बंद कर दिया गया और अब फिर से इसकी वापसी क्यों हो रही है?
कैसे शुरू हुआ था इस्तेमाल?
साल 1840 में कनाडा के वैज्ञानिक अब्राहम गेसनर ने केरोसिन बनाने का फॉर्मूला खोज निकाला था। सबसे पहले इसका ईंधन के रूप में इस्तेमाल फैक्ट्रियों में हुआ। कारखानों को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाला केरोसिन धीरे-धीरे लोगों के घरों तक पहुंचा और लालटेन, दीपक और स्टोव में भी इस्तेमाल होने लगा। भारत में साल 1952 में मिट्टी का तेल आया और एक कंपनी ‘स्टैंडर्ड वैक्यूम रिफाइनिंग कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ के जरिए इसे लाया गया। कुछ ही समय में यह कार और बाइक चलाने के लिए केरोसिन का इस्तेमाल होने लगा। पंखे और प्रेस चलाने तक के लिए केरोसिन का इस्तेमाल होता था। समय के साथ बिजली ने इसकी जगह ली, फिर डीजल-पेट्रोल ने और आखिर में गैस ने इसे मार्केट से गायब ही कर दिया।
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हालांकि, भारत में केरोसिन का इस्तेमाल एक झटके में नहीं बंद हुआ था। जैसे-जैसे और जहां-जहां गैस और बिजली की सप्लाई पर्याप्त होती गई, वैसे-वैसे देश में केरोसिन का इस्तेमाल कम कर दिया गया। इसका इस्तेमाल कम या बंद करने की एक वजह यह भी थी कि केरोसिन को जलाने से होने वाला धुआं पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक होता है। इसकी तुलना में एलपीजी या अन्य गैसों और बिजली के इस्तेमाल से पर्यावरण को बेहद कम नुकसान होता है। यही वजह थी कि समय के साथ भारत में बिजली और गैस से चलने वाले उपकरणों को बढ़ावा दिया गया है और केरोसिन का इस्तेमाल बंद कर दिया गया।
जब लोगों के घरों में बिजली पहुंची तो सबसे पहले रोशनी करने के लिए मिट्टी के तेल पर निर्भरता घटी। कुछ ही समय में गैस के कनेक्शन पर्याप्त हो गए और बिजली आने लगी तो लोग गैस चूल्हे और इंडक्शन पर शिफ्ट हो गए। इसी का नतीजा हुआ कि ज्यादातर राज्यों ने खुद को केरोसिन मुक्त घोषित कर दिया। समय के साथ राज्यों की सरकारी राशन वाली दुकानों पर मिट्टी का तेल बिकना बंद हो गया। अब ज्यादातर राज्यों में मिट्टी के तेल का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बंद हो चुका है लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया जा रहा है।
कहां होगा इस्तेमाल?
भले ही केरोसिन की वापसी हो रही है लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर अभी भी संदेह है। बिजली और गैस से चलने वाले उपकरण खरीद चुके ज्यादातर घरों में अब न तो लालटेन मिलेगी और ना ही मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव। बाजारों में भी अब लालटेन या स्टोव कम ही दिखते हैं। ऐसे में सरकार भले ही केरोसिन को मार्केट में उतार दे, यह मुश्किल है कि लोग ऐसे उपकरणों को फिर से खरीदें जो मिट्टी के तेल से चलते हों।
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क्यों हो रही केरोसिन की वापसी?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और टकराव कम न होने के चलते भारत में गैस और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। खाना बनाने के लिए एलपीजी गैस की कमी हर तरफ देखी गई है। ऐसे में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में मिट्टी के तेल को फिर से उतारा जा रहा है। मौजूदा वक्त में इसकी कीमत 60 रुपये लीटर से भी ज्यादा है। हालांकि, तमिलनाडु में कई जगहों पर यह तेल 15 रुपये लीटर ही मिलता है।
इस बार सरकार ने पेट्रोल पंपों को अनुमति दी है कि वे अगले 60 दिनों तक केरोसिन बेच सकते हैं। 21 राज्यों में पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम यानी सरकारी राशन की दुकानों पर भी मिट्टी के तेल की बिक्री शुरू की जा रही है। सरकार ने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल खाना बनाने और रोशनी के लिए ही किया जाएगा।
केरोसिन को लेकर नियम में ढील देने का मकसद यह है कि एक वैकल्पिक ईंधन लोगों के पास रहे। तेल कंपनियों के लिए केरोसिन की सप्लाई आसान है क्योंकि इसकी मांग बेहद कम हो चुकी है और उनके पास स्टॉक ठीक-ठाक है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान का दूसरा दिन संपन्न:घुघली में कार्यकर्ताओं को केंद्र-प्रदेश सरकार की उपलब्धियां बताई गईं
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान का दूसरा दिन घुघली ब्लॉक के बेलवा टीकर स्थित प्रभावती देवी महाविद्यालय में संपन्न हुआ। इस दौरान घुघली दक्षिणी और शिकारपुर मंडल के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान शिकारपुर मंडल सत्र को संबोधित करते हुए सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना पार्टी कार्यकर्ताओं का मुख्य दायित्व है। विधायक कन्नौजिया ने कार्यकर्ताओं से विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने और उन्हें लाभान्वित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार पारदर्शिता, सुशासन और विकास के नए मानक स्थापित कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने का आह्वान किया। वहीं, घुघली दक्षिणी मंडल के सत्र में भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय ने ‘वैचारिक अधिष्ठान’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्वदेशी अपनाने, सनातन संस्कृति के सम्मान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर विशेष बल दिया। पांडेय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी है, जिसमें स्वदेशी को बढ़ावा देना और सनातन मूल्यों का संरक्षण करना प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व है। प्रशिक्षण अभियान के दौरान विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इसमें पूर्व जिलाध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य जनार्दन गुप्ता, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णगोपाल जायसवाल, जिला उपाध्यक्ष संतोष सिंह और अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री कुरसेद अंसारी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। मंडलों के अध्यक्षों ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगीत के साथ प्रशिक्षण अभियान का समापन किया गया। इस अवसर पर रामाज्ञा यादव, अजय पटेल, मन सिंह, दिनेश जायसवाल, बलराम दुबे, मोती जायसवाल, रामनारायण गुप्ता, राधारमण शुक्ला, राम आशीष, प्रिंस जायसवाल, जितेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू सिंह, अशोक गिरी उर्फ पेड़ बाबा, ओम प्रकाश पांडेय, जिला मंत्री बैजनाथ पटेल, ओम प्रकाश पांडेय, गोपाल चौधरी, शंभू वर्मा, द्रौपदी देवी, मनोज जायसवाल, संजय जायसवाल, अमित पांडेय और योगेंद्र नायक सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
गर्मियों में सुबह घर से निकलते समय साथ रखें ये चीजें, नहीं पड़ेंगे बीमार!
मार्च के महीन में मौसम में तेजी से बदलाव देखा गया है। किसी दिन धूप तो किसी दिन ठंडी महसूस हो रही है। ऐसे में मौसम में सेहत पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। शरीर को मौसम के हिसाब से खुद को ढालने में समय लगता है। यह मौसम उन लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। ऐसे लोगों को सर्दी, जुकाम, गले में खराश, सिरदर्द और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
खासतौर से वे लोग जो ऑफिस या कॉलेज जाते हैं उन्हें अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिसे आपको घर से बाहर निकलते समय साथ अपने बैग में जरूर रखना चाहिए।
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घर से बाहर निकलते समय रखें ये चीजें
पानी की बोतल
घर से निकलते समय अपने बैग में पानी की बोतल जरूर रखें। गर्मियों में अक्सर पानी की कमी महसूस होती है। पानी की कमी की वजह से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। ऐसे में बिना पानी के बोतल के घर से बाहर न निकलें।
सनस्क्रीन
गर्मी के मौसम में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें । सनस्क्रीन सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता है। हर व्यक्ति को अपने स्किन टाइप के हिसाब से सनस्क्रीन लगानी चाहिए। दिन में दो बार सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
जर्म प्रोटेक्शन वाइप्स
गर्मी के मौसम में लोगों को अधिक पसीना आता है। इस पसीने को पोछने के लिए जर्म प्रोटेक्शन वाइप्स का इस्तेमाल करें। ये वाइप्स किटाणुओं का मारने का काम करते हैं। साथ ही त्वचा के हिसाब से पीएच बैलेंस को मेंटेन करते हैं।
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छाता
गर्मी के मौसम में घर से छाता या स्कार्फ लेकर निकलें। इन दोनों चीजों की मदद से आपको सीधे सिर पर धूप नहीं लगेगी। इसके अलावा सनग्लासेज भी लेकर बाहर निकलें। चश्मा आपको सीधे धूप से बचाने का काम करता है। घर से निकलते समय ये दोनों चीजें लेकर बाहर निकलें।
विटामिन सी युक्त फ्रूट्स
अपनी डाइट में विटामिन सी युक्त फ्रूट्स को शामिल करें। इसमें एंटी ऑक्सीडेट की भरपूर मात्रा होती है। ये फल शरीर में पाचन तंत्र को बेहतर करता है। साथ ही इन्यूनिटी को मजबूत करने का काम करता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स ड्रिंक
गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए इलेक्ट्रलाइट्स वाली ड्रिंक्स का इस्तेमाल करें। ये ड्रिंक्स शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और इलेक्ट्रोलाइट्स को भी बैलेंस करके रखते हैं।
छावनी के रामरेखा मंदिर में लगेगा पौराणिक मेला:चैत्र शुक्ल त्रयोदशी पर सदियों पुरानी परंपरा का होगा आयोजन
छावनी क्षेत्र के प्रसिद्ध रामायणकालीन रामरेखा मंदिर में 31 मार्च को पौराणिक रामरेखा मेला आयोजित होगा। यह मेला सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और प्रतिवर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर लगता है। मंदिर के पुजारी महंत दयाशंकर दास ने बताया कि मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मेले के लिए झूला संचालक पहुंच चुके हैं और बच्चों के मनोरंजन हेतु झूले लगाए जा रहे हैं। छावनी, अमोढ़ा, रूपगढ़, पूरेहेमराज सहित दर्जनों गांवों से लोग इस मेले में शामिल होते हैं। श्रद्धालु राम दरबार के दर्शन करने के साथ ही रामरेखा नदी के किनारे लगे मेले में खरीदारी और मनोरंजन का आनंद लेते हैं।
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‘धुरंधर’ में ही नहीं बल्कि सच में नकली नोट भेज रहा पाकिस्तान, डेटा से समझिए
निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। आम चर्चा से लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया तक हर तरफ इस फिल्म की चर्चा हो रही है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से एक जासूस पाकिस्तान में जाकर उनकी साजिशों पर पानी फेरता है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह पाकिस्तान हजारों करोड़ रुपये फर्जी करेंसी भेजकर भारत में आतंकवाद को पालना चाहता है। फिल्म में दिखाया गया यह फर्जी नोटों का तथ्य कितना सही है और गलत इस बारें में तो दावा नहीं किया जा सकता लेकिन समय-समय पर पाकिस्तान की ओर से फर्जी करेंसी भेजने की साजिशें नाकाम करने की जानकारी जरूर मिलती है।
ताजा मामला पाकिस्तान बॉर्डर से सटे पंजाब के अमृतसर का है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अमृतसर में फर्जी करेंसी नोटों की एक बड़ी खेप पकड़ी है। गश्त के दौरान बीएसएफ जवानों को एक संदिग्ध पीला पैकेट मिला, जिसमें भारी मात्रा में नकली नोट थे। पैकेट खोलने पर उसमें 500 रुपये के कुल 445 जाली नोट पाए गए, जिनकी कुल कीमत 2,22,500 रुपये है। शरुआती जांच में शक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पर गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना है।
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पहले भी कई बार पकड़ी गई पाक की नापाक हरकत
पाकिस्तान भारत में आर्थिक अस्थिरता लाने और अशांति फैलाने के लिए लगातार कुछ ना कुछ करता रहता है और भारत की सुरक्षा एजेंसी इनकी इन नापाक हरकतों का जवाब देती रहती हैं। पाकिस्तान भारत के बॉर्डर से सटे इलाकों में ड्रग्स, हथियार और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई करने की कोशिश करता रहता है और कई बार सुरक्षा जांच में ऐसे खुलासे भी हुए हैं।
नोटबंदी के तीन महीने बाद ही भेजे थे नोट
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के मात्र तीन महीने बाद ही पश्चिम बंगाल के मालदा में एक व्यक्ति को 2,000 रुपये के नकली नोटों के साथ पकड़ा गया था। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने खुलासा किया कि नकली नोट पाकिस्तान में छापे गए थे और इसमें ISI ने मदद की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नए नोट की 17 सुरक्षा विशेषताओं में से 11 की नकल की गई थी।
सरकार ने पकड़े 2.17 लाख नकली नोट
बीते साल सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि 2024-25 वित्त वर्ष के दौरान अलग-अलग वैल्यू के 2.17 लाख नकली नोट पकड़े गए और 2023-24 वित्त वर्ष में 2.23 लाख नोट बरामद किए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 1,17,722 नोट 500 रुपये के थे जो 2024-25 में पकडे़ गए थे। सरकार ने संसद में बताया कि 100 रुपये के 51,069 नोट और 200 रुपये के 32,660 नोट पकड़े गए हैं।
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नेपाल के जरिए भारत में सप्लाई
पाकिस्तान अपने यहां जाली भारतीय नोट छापता है और उसकी खेप दुबई, बैंकॉक, श्रीलंका और नेपाल के रास्तों से भारत भेजने की जुगत में रहता है। नेपाल के जरिए भारत में फर्जी नोटों की सप्लाई बहुत आम हो गई है। करीब एक महीने पहले ही बिहार पुलिस ने जाली नोट के सरगना अबुल इनाम उर्फ लादेन को गिरफ्तार किया है। अबुल इनाम पाकिस्तान में छपे जाली नोटों को नेपाल के रास्ते भारत में पहुंचाने और बाजार में पहुंचाता था।
नेपाल के रास्ते पर सख्ती होने के बाद फर्जी नोट पहुंचाने वाले गिरोह बांग्लादेश के जरिए भारत में फर्जी नोट पहुंचाने की कोशिश में रहते हैं। बांग्लादेश से मालदा के रास्ते जाली नोट भारत आते हैं और ट्रेन के जरिए देशभर में पहुंचाए जाते हैं।
राप्ती पार करने को मजबूर 9 गांवों के ग्रामीण:पुल के अभाव में जान जोखिम में, विधायक ने भेजा प्रस्ताव
जमुनहा क्षेत्र के सेमरहनिया घाट पर राप्ती नदी पर पुल न होने से नौ गांवों के हजारों ग्रामीणों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। जलस्तर बढ़ने पर नाव से उतरने के बाद लोगों को घुटनों तक भरे पानी में पैदल चलकर नदी पार करनी पड़ती है, जिससे तेज बहाव और फिसलन के कारण हर कदम खतरनाक होता है। सेमरहनिया घाट के पश्चिमी तट पर स्थित लक्ष्मनपुर सेमरहनिया, पोदिला, लक्ष्मनपुर, धोबिहा, सुखरामपुरवा और नासिरगंज, तथा पूर्वी तट पर स्थित संगमपुरवा, बद्रीपुरवा, मानपुरवा, मक्कूपुरवा व बढ़इनपुरवा गांवों के निवासी जिला मुख्यालय भिनगा पहुंचने के लिए यह जोखिम उठाने को मजबूर हैं। वैकल्पिक मार्ग से जाने पर उन्हें बदला–नासिरगंज होकर बरदेहरा मोड़ तक लगभग 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। नावों की सीमित उपलब्धता और बढ़ा हुआ किराया लोगों को मजबूरी में पानी के अंदर उतरने पर विवश करता है। महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर और बुजुर्ग लाठी के सहारे नदी पार करते हैं। लक्ष्मनपुर सेमरहनिया निवासी रामआसरे यादव, नासिरगंज के मोहम्मद रफीक, पोदिला गांव के शिवकुमार वर्मा, संगमपुरवा निवासी श्यामलाल निषाद, बद्रीपुरवा के राकेश श्रीवास्तव और मानपुरवा निवासी सुरेश पासी ने जल्द पुल निर्माण की मांग की है। नासिरगंज निवासी अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कई वर्ष पहले पुल निर्माण का सर्वे हुआ था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस संबंध में भिनगा विधायक इंद्राणी वर्मा ने जानकारी दी कि पुल निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हर चुनाव में यह मुद्दा उठता है, लेकिन इसका समाधान नहीं निकल पाता। अब लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी इस समस्या का अंत होगा।
मिहींपुरवा में SSB ने भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी रोकी:7.96 लाख रुपए के अखरोट और साइकिलें जब्त
सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी के एक बड़े प्रयास को विफल कर दिया है। बल ने 7.96 लाख रुपए मूल्य के अवैध अखरोट और साइकिलें जब्त की हैं। यह कार्रवाई SSB की ‘जी’ कंपनी बलईगांव के अंतर्गत सीमा चौकी (BOP) फुट्टा के जवानों द्वारा की गई है। SSB को सीमा पार से तस्करी की सटीक खुफिया जानकारी मिली थी। इसी सूचना के आधार पर 29 मार्च की रात करीब 00:30 बजे एक विशेष नाका अभियान शुरू किया गया। तड़के लगभग 02:40 बजे, सीमा स्तंभ संख्या 662/1 के पास, जो भारतीय सीमा के लगभग 618 मीटर अंदर है, पांच सदस्यीय टीम ने कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को देखा। ये लोग नेपाल से भारत की ओर साइकिलों पर बड़े-बड़े बोरे ला रहे थे। जवानों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए संदिग्धों को रुकने का इशारा किया। ललकार सुनते ही तस्कर घबरा गए और अपना सामान व साइकिलें मौके पर छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए वापस नेपाल की ओर भाग गए। तलाशी के दौरान, जब्त किए गए बोरों में अवैध रूप से भारत लाए जा रहे अखरोट पाए गए। इस कार्रवाई में कुल 148 बोरे अखरोट बरामद किए गए, जिनका कुल वजन 3552 किलोग्राम (प्रत्येक 24 किलोग्राम) है। इनकी अनुमानित कीमत 7,81,440 रुपये बताई गई है। तस्करी में इस्तेमाल की जा रही 25 साइकिलें भी जब्त की गईं, जिनकी कीमत लगभग 15,000 रुपये आंकी गई है। इस प्रकार, कुल जब्ती का मूल्य 7,96,440 रुपये रहा। अंधेरे और सीमा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर तस्कर फरार होने में सफल रहे, जिसके कारण कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी। जब्त किए गए सभी सामान को अग्रिम वैधानिक कार्रवाई के लिए कस्टम कार्यालय, मिहींपुरवा (जिला बहराइच) को सौंप दिया गया है। SSB ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए उसके जवान पूरी तरह सतर्क हैं और इस प्रकार के अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगे।
BMC कोलाबा प्लांट से ट्रीटेड पानी महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप को बेचेगी
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने अपने कोलाबा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हर दिन 3 मिलियन लीटर (MLD) ट्रीटेड सीवेज पानी महिलाओं के एक सेल्फ-हेल्प ग्रुप को बेचने की मंज़ूरी दे दी है। इस कदम का मकसद पानी के सस्टेनेबल इस्तेमाल को बढ़ावा देना है और साथ ही सिविक बॉडी के लिए एक्स्ट्रा रेवेन्यू भी कमाना है। ट्रीटेड पानी को रियायती रेट पर सप्लाई किया जाएगा और यह एग्रीमेंट तीन साल के लिए वैलिड रहेगा।(BMC to Sell Treated Water from Colaba Plant to Women’s Self-Help Group)
दूसरे कामों में भी इस्तेमाल
प्लांट से सप्लाई किया जाने वाला पानी एडवांस्ड ट्रीटमेंट से गुज़रता है और यह कंस्ट्रक्शन के काम, बागवानी, सड़क की सफ़ाई और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों जैसे पीने के अलावा दूसरे कामों के लिए भी सही है। चुना गया सेल्फ-हेल्प ग्रुप इस पानी का इस्तेमाल टनल बनाने और ग्रीन स्पेस के मेंटेनेंस जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए करेगा। वे ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को अलग-अलग जगहों पर ले जाने के लिए भी ज़िम्मेदार होंगे, जहाँ इसकी ज़रूरत होगी।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल कैपेसिटी 37 MLD
कोलाबा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल कैपेसिटी 37 MLD है, जिसमें से एक हिस्से को दोबारा इस्तेमाल के लायक लेवल तक प्रोसेस किया जाता है। हालाँकि, ट्रीटेड पानी की एक बड़ी मात्रा पहले इस्तेमाल नहीं होती थी और उसे समुद्र में छोड़ दिया जाता था। इस पहल के ज़रिए, BMC का मकसद ऐसी बर्बादी को कम करना, पीने लायक पानी बचाना और मौजूद रिसोर्स का बेहतर इस्तेमाल करना है।
फ़ायदों के बावजूद, इस प्रस्ताव की सिविक मेंबर्स ने कुछ आलोचना की, जिन्होंने तर्क दिया कि ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल पहले म्युनिसिपल कामों जैसे आग बुझाने, सड़कों की सफ़ाई और पब्लिक जगहों के रखरखाव के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि पानी को बाहर बेचने से सिविक की ज़रूरी ज़रूरतों के लिए इसकी उपलब्धता कम हो सकती है। हालाँकि, प्रस्ताव को आखिरकार मंज़ूरी मिल गई, और अधिकारियों ने बताया कि यह अच्छे रिसोर्स मैनेजमेंट और एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक कदम है।
कुल मिलाकर, यह फ़ैसला मुंबई जैसे शहरी इलाकों में पानी को रीसायकल करने और दोबारा इस्तेमाल करने पर बढ़ते फ़ोकस को दिखाता है, जहाँ साफ़ पानी की माँग लगातार बढ़ रही है। ट्रीटेड गंदे पानी को पीने लायक न होने वाले कामों के लिए इस्तेमाल करने को बढ़ावा देकर, BMC को उम्मीद है कि पीने के पानी की सप्लाई पर दबाव कम होगा और साथ ही उन रिसोर्स का भी सही इस्तेमाल होगा जो नहीं तो बर्बाद हो जाते।
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