
फिरोजाबाद , जनपद में होने वाले सड़क हादसों मैं जहां 12 दिन में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई और 275 लोग घायल हो गये इन होने वाली घटनाओ परिवारीजनों ने भाई अथवा पुत्र और सुहाग के रूप में पति और पिता को हमेशा हमेशा के लिए विदा होते हुए अपनी आँखों से देखा है
जनपद में सड़क दुर्घटनाओं में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी होती जा रही है, जो रुकने का नाम नही ले रही है। 10 अप्रैल से लेकर 22 अप्रैल तक दो दर्जन से अधिक लोग असमय काल के गाल में समा गये, और 275 लोग घायल हो गये, परंतु किसी को इस बात की चिंता नहीं है। कि कैसे इन घटनाओं पर अंकुश लगाया जाये। पुलिस और परिवहन विभाग यातायात माह यातायात सप्ताह मना कर कर्तव्य की इतिश्री पूर्ण कर लेता है ,हालांकि उस यातायात माह के दौरान जो पट्टिकाये लेकर छात्र निकलते हैं, उन पर स्लोगन लिखे रहते है, कि कोई आपका घर इंतजार कर रहा है। अथवा जान है ,तो जहांन है। एवं अपने वाहन को चलाते समय शराब का सेवन न करे। और वाहन को तेज गति के साथ न चलाये आदि स्लोगन व नारे कुछ देर के बाद हवा हवाई बनकर रह जाते हैं। पुलिस ने कभी वाहनों की गति सीमा नापने के लिए स्पीडो मीटर अथवा स्पीड गन जैसी कोई व्यवस्था नहीं की।
देखा जाए तो अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं नशे की हालत में होती है। मृतकों के परिजन कुछ देर तक तो करूण कृदन करते हैं। लेकिन उसके बाद अपने भाग्य को जिम्मेदार मानकर सन्तोष करने पर मजबूर हो जाते है। हालांकि इन होने वाले हादसों में जिसका भी बेटा व अन्य कोई दुनिया से विदा होता है, उसका दर्द उसी के परिजनों को होता है।
रही बात चौराहे पर पुलिस पिकेट अथवा ट्रैफिक पुलिस की उनका ध्यान ट्रैफिक व्यवस्था की बजाय वाहनों के चालानो पर रहता है। जाम भले ही लगा रहे ।अब सवाल यह है, आखिर इन घटनाओं पर रोक कैसे लगे यह चर्चा का विषय बनकर रह गयी है।












