Homeजिला / लोकल (Local News)नासिक टीसीएस धर्मांतरण मामला नफरत से प्रेरित, न्यायपालिका पर पूरा भरोसा :...

नासिक टीसीएस धर्मांतरण मामला नफरत से प्रेरित, न्यायपालिका पर पूरा भरोसा : असदुद्दीन ओवैसी


छत्रपती संभाजीनगर । एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नासिक टीसीएस धर्मांतरण मामले पर कहा कि यह पूरा मामला नफरत की भावना से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में आरोपित निदा खान के खिलाफ मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है और केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत इस युवती को निर्दोष साबित करेगी।
महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर में शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा, “इस मामले में सत्ताधारी दल के एक नेता ने शिकायत दर्ज कराई है। केवल आरोप लगने भर से किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता। हमें अदालत पर पूरा विश्वास है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले के जरिए शिक्षित मुस्लिम युवक-युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने निदा खान का बचाव करते हुए कहा कि वह टाटा कन्स्टन्सी सर्विसेस (टीसीएस) के एचआर विभाग में कार्यरत नहीं थीं और उनका कंपनी से कोई प्रत्यक्ष संबंध भी नहीं था। उन्होंने कहा, “इस मामले में अब तक नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से एक में धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया है। लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही मीडिया ट्रायल शुरू कर दिया गया है।”
ओवैसी ने एफआईआर का हवाला देते हुए कहा कि निदा खान के घर से बुर्का, नकाब और एक धार्मिक पुस्तक बरामद होने का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि “ये चीजें आखिर कब से आपत्तिजनक मानी जाने लगीं ?”
इस दौरान उन्होंने कुछ पुराने मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कुछ युवकों को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्योंकि उनके पास मिर्जा गालिब की किताब मिली थी, लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया। इसी तरह इलाहाबाद हाई कोर्ट में उर्दू शेर लिखने के मामले में हुई गिरफ्तारी पर भी अदालत ने सवाल उठाए थे।
निदा खान को शरण देने के आरोप में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमिन (एआईएमआईएम) के पार्षद मतीन पटेल के खिलाफ नासिक पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा, “अब तक कितने विधायक और सांसदों पर मामले दर्ज हुए हैं ? यह कैसे तय कर लिया गया कि निदा खान को एमआईएमआईएम के पार्षद ने छिपाया था ? उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि “क्या केवल व्हाट्सऐप चैट के आधार पर किसी को सजा दी जा सकती है ?”
 

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments