सिद्धार्थनगर में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की बढ़ती मांग के मद्देनजर प्रशासन ने कालाबाजारी, ओवररेटिंग और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। इसी क्रम में इटवा तहसील क्षेत्र में जांच के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर कृषि विभाग ने दो उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। जिलेभर में खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए 106 अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर एक संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था, जिसने इटवा क्षेत्र के विभिन्न उर्वरक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पांडेय ने बताया कि उपजिलाधिकारी इटवा, कृषि विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने मेसर्स एग्रीजंक्शन वन स्टॉप शॉप आनंदनगर इटवा, एसपी ट्रेडर्स हीराखास इटवा और जैफुल्लाह खाद भंडार बेलवा खुनियांव का निरीक्षण किया। जांच के दौरान एसपी ट्रेडर्स का प्रतिष्ठान बंद पाया गया। निरीक्षण में मेसर्स एग्रीजंक्शन वन स्टॉप शॉप आनंदनगर और जैफुल्लाह खाद भंडार पर निर्धारित मूल्य सूची तथा प्रतिष्ठान संबंधी अनिवार्य सूचना बोर्ड प्रदर्शित नहीं किए गए थे। इसके अतिरिक्त, अभिलेखों की जांच से यह पुष्टि हुई कि इन प्रतिष्ठानों पर उर्वरकों का वितरण पीओएस मशीन के माध्यम से नहीं किया जा रहा था। उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित इन गंभीर अनियमितताओं के चलते शुक्रवार को दोनों प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित कर दिए गए। जिला कृषि अधिकारी ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर रेट बोर्ड और सूचना पट्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। साथ ही, वितरण रजिस्टर में किसानों का पूरा विवरण दर्ज करें और उर्वरकों की बिक्री केवल पीओएस मशीन के माध्यम से ही करें। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने, कम प्रचलित उत्पादों की जबरन बिक्री करने अथवा किसी भी प्रकार की अन्य अनियमितता पाए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उधर प्रशासन ने खरीफ सीजन में डीएपी, यूरिया, एनपीके कॉम्प्लेक्स और एमओपी उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिले में 106 अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी टीम गठित की है। सभी उपजिलाधिकारियों, कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों, क्षेत्राधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों तथा सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों को नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है उन्हें प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को आधार कार्ड, जोतवही और खतौनी के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। खाद का वितरण पूरी तरह पीओएस मशीन के माध्यम से होगा तथा किसानों की जोत और फसल की आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरक दिया जाएगा। साथ ही सीमा क्षेत्रों में खाद की संभावित तस्करी रोकने के लिए भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई विक्रेता खाद देने के बदले किसानों को अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता है या निर्धारित मूल्य से अधिक धन वसूलता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। FIR दर्ज कराने के निर्देश ऐसे मामलों में संबंधित निर्माता या आपूर्तिकर्ता संस्था की भूमिका सामने आने पर एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में खाद वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
सिद्धार्थनगर में दो उर्वरक दुकानों के लाइसेंस निलंबित:खाद वितरण में सख्ती, 106 कर्मियों को निगरानी की जिम्मेदारी
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