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न बात बनी, न मकसद पूरा हुआ, हमार विद्रोहियों ने हथियार कैसे डाला?


मिजोरम सरकार ने और लाल्हमिंगथांगा सनाते के नेतृत्व वाली हमार पीपुल्स कन्वेंशन (डेमोक्रेटिक) गुट के साथ शांति समझौता किया है। मिजोरम, दशकों से हिंसा और विद्रोह का केंद्र रहा है, अब यह संगठन, मुख्य धारा में शामिल हो रहा है। सिनलुंग हिल्स काउंसिल (SHC) के मुख्यालय साकवरदा में हुए इस समझौते के बाद, अब राज्य में सशस्त्र विद्रोह की राह खत्म होती नजर आ रही है।

हमार समुदाय के लोगों को सरकार ने भरोसा दिया है कि उनके विकास पर सरकार जोर देगी, बजट बढ़ाया जाएगा, बेहतर सड़कें और बिजली पहुंचाई जाएंगी। सरकार ने बिजली और इंटरनेट सुविधाओं को जल्द से जल्द पहुंचाने का वादा किया है।

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समझौता किसके बीच हुआ है?

समझौते पर गृह विभाग के सचिव पीयू डेविड लाल्थांतलुआंगा ने सरकार की ओर से और HPC-D (LF) के अध्यक्ष पीयू लाल्हमिंगथांगा सनाते ने अपने संगठन की ओर से दस्तखत किए हैं।

पीयू लालमुआनपुइया पुंते, गृह सचिव, मिजोरम:-
जब लोगों की विकास की उम्मीदें पूरी नहीं होतीं तो अशांति पैदा होती है। यह समझौता हमार क्षेत्रों में विकास लाएगा।

क्यों चर्चा में है समझौता?

मिजोरम सरकार ने हमार ग्रुप के ही HPC और HPC-D के साथ समझतै आइजोल में हुए थे। आम लोग, इन समझौतों के बारे में कम जानते थे। सरकार ने साकवरदा में जनता की मौजूदगी में यह फैसला लिया है। सरकार ने उम्मीद जताई है कि हमार समुदाय की गुटबाजी खत्म हो जाएगी।

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समझौता जरूरी क्यों था?

गृह सचिव पीयू डेविड लाल्थांतलुआंगा ने कहा कि यह मिजोरम में शांति और स्थिरता की दिशा में एक नया मील का पत्थर है।

कब-कब HPC से समझौते हुए?

हमार पीपुल्स कन्वेंशन की स्थापना 1986 में हुई थी। साल 1994 में उसके साथ शांति समझौता हुआ था। 2018 में HPC (D) गुट के साथ एक और समझौता हुआ। अब HDC (D) (LF) के साथ तीसरा समझौता हुआ है। अब मिजोरम में कोई भी सशस्त्र विद्रोही गुट नहीं बचा है।

HPC-D(LF) के साथ अब क्या होगा?

मिजोरम सरकार ने कहा है कि HPC-D(LF) के कैडरों के पुनर्वास के लिए मौचार गांव के पास एक शांति शिविर बनाया जाएगा। 30 अप्रैल 2026 को लड़ाके हथियार सौंपेंगे।

कैसे बातचीत की टेबल पर आया HPC-D(LF)?

मिजोरम सरकार ने HPC-D(LF) को राज्य का आखिरी भूमिगत सशस्त्र गुट माना था। जून 2024 के बाद इस संगठन के साथ बातचीत शुरू की थी। सितंबर 2024 से लेकर मार्च 2026 तक कई दौर की बातचीत हुई। मार्च तक एक आम सहमति बनी। इसके बाद 9 अप्रैल को समझौते का ड्राफ्ट तैयार किया गया। 14 अप्रैल को समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

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क्या है HPC-D (LF), समझौता क्यों जरूरी था?

हमार पीपल्स कन्वेंशन-डेमोक्रेसी (HPC-D) (LF) एक अलगाववादी संगठन है। साल 1995 में हमार पीपल्स कन्वेंशन-डेमोक्रेसी से यह संगठन अलग हुआ था। HPC की स्थापना 1986 में हुई थी और यह मिजोरम के उत्तर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में हमार समुदाय के लिए स्वशासन की मांग करता है। साल 1986 के मिजो शांति समझौते से असंतुष्ट होकर HPC ने 1987 से सशस्त्र संघर्ष शुरू किया। यह संगठन, अपहरण, हमला और वसूली जैसे काम में भी शामिल रहा। साल 1994 में मिजोरम सरकार के साथ समझौता होने के बाद भी कुछ कैडर असंतुष्ट रहे और उन्होंने HPC-D का गठन किया। यहां भी यह संगठन बंटा और HPC (D) (LD) बना। हमार गुटों की गुटबाजी, सरकार के लिए चुनौती की तरह रही।

इस गुट का मकसद क्या है?

HPC गुटों का मकसद, पहले स्वायत्त जिला बनाना था, लेकिन बाद में यह मिजोरम, मणिपुर और असम के हमार बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक स्वतंत्र हमार राज्य बनाने की मांग तक पहुंच गया। यह हथियारबंद संगठन था। संगठन, मिजोरम, मणिपुर के चुराचांदपुर जिले और असम के कछार व नॉर्थ कछार हिल्स में एक अरसे तक सक्रिय रहा। संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि संगठन का कैडर, आदिवासियों की रक्षा के नाम पर पैसे भी वसूलता रहा है। इस संगठन को कई विद्रोही संगठन ने हथियार दिए थे।

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