इटवा थाना क्षेत्र के आईटीआई नहर क्षेत्र में रविवार सुबह करीब 11 बजे एक नवजात बच्ची कपड़े और गमछे में लिपटी हुई मिली। नहर किनारे जमीन पर पड़ी बच्ची के रोने की आवाज सुनकर राहगीर और स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची का नाड़ा भी नहीं कटा था और उस समय तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस था। इटवा निवासी बब्लू पेट्रोल भराने जा रहे थे, तभी उन्हें आईटीआई नहर मार्ग पर बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखने पर उन्होंने नवजात को कपड़े और गमछे में लिपटा हुआ पाया। बब्लू ने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी और स्थानीय निवासी निहाल अहमद चौधरी को भी घटना की जानकारी दी। लगभग 15 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा ले जाया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा पहुंचने पर इलाज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने तत्काल उपचार शुरू करने के बजाय पहले पुलिस रिपोर्ट कराने की बात कही। नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और बच्ची को तुरंत इलाज देने की मांग की। इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक बहस होती रही। स्थानीय निवासी निहाल अहमद चौधरी ने आरोप लगाया कि यदि दबाव न बनाया जाता तो बच्ची को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि अस्पताल में पहले औपचारिकता पूरी करने की बात कही जा रही थी, जबकि उस समय बच्ची की जान बचाना अधिक महत्वपूर्ण था। विवाद बढ़ने और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद नवजात बच्ची को आखिरकार एनआईसीयू (NICU) में भर्ती किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची की उम्र 10 से 12 दिन के बीच बताई जा रही है।
इटवा में नहर किनारे मिली नवजात बच्ची:CHC में इलाज से पहले रिपोर्ट पर अड़े डॉक्टर, हंगामे के बाद NICU में भर्ती
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