रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे
लखनऊ, 9 मई। ट्रेड यूनियन संगठन ‘ऐक्टू’ (AICCTU) के आह्वान पर रविवार, 10 मई को प्रस्तावित ‘मुख्यमंत्री आवास मार्च’ से पहले उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भाकपा (माले) नेताओं की धरपकड़ और हाउस अरेस्ट की कार्रवाई ने सियासी पारा गरमा दिया है। भाकपा (माले) ने सरकार की इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए इसकी तीखी निंदा की है।
नेताओं की नजरबंदी पर भड़की पार्टी
भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शनिवार शाम जारी एक कड़े बयान में कहा कि प्रदेश सरकार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार को कुचलना चाहती है। उन्होंने बताया कि मार्च को विफल करने के इरादे से पुलिस ने प्रदेश के कई जिलों में पार्टी पदाधिकारियों के घरों पर दबिश दी और उन्हें नजरबंद कर दिया।


इन जिलों में हुई पुलिसिया कार्रवाई
पार्टी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, प्रदेश के कई महत्वपूर्ण केंद्रों पर पुलिस ने सक्रियता दिखाई:
*महराजगंज:* जिला सचिव संजय निषाद को हिरासत में लेकर थाने में बैठाया गया, वहीं पूर्व जिला सचिव हरीश जायसवाल को घर पर नजरबंद किया गया।
*अयोध्या:* जिला प्रभारी अतीक अहमद को हाउस अरेस्ट किया गया ताकि वे कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ न पहुंच सकें।
*सीतापुर:* ऐक्टू के प्रदेश उपाध्यक्ष अर्जुन लाल को लखनऊ प्रस्थान से ठीक पहले पुलिस ने उनके घर पर ही रोक दिया।
*गाजीपुर व जालौन:* पुलिस ने पार्टी कार्यालयों और जिला सचिव राजीव कुशवाहा के आवास पर पहुंचकर नेताओं को मार्च में शामिल होने से रोका।
*प्रमुख मांगें और सरकार पर निशाना।*
राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि नोएडा में मजदूर आंदोलन के दमन, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ यह प्रदर्शन पूर्व घोषित था। पार्टी की मुख्य मांग है कि:
1. नोएडा में गिरफ्तार मजदूरों और बुद्धिजीवियों को बिना शर्त रिहा किया जाए।
2. न्यूनतम पारिश्रमिक बढ़ाकर *44 हजार रुपये प्रति माह* किया जाए।
“मजदूरों की जायज मांगों और उनके आंदोलन से सरकार बुरी तरह घबराई हुई है। योगी सरकार द्वारा की जा रही ये नजरबंदियां पूरी तरह अवैध हैं।”
*सुधाकर यादव, राज्य सचिव, भाकपा (माले)*
पार्टी ने मांग की है कि सभी हिरासत में लिए गए नेताओं को तत्काल मुक्त किया जाए और उन्हें लखनऊ के प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति दी जाए।












