श्रावस्ती जनपद के गिलौला क्षेत्र में 10वीं मोहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर मजलिसों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मजलिसों के दौरान मौलानाओं ने कर्बला की घटना का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। कर्बला की जंग में इमाम हुसैन और उनके परिवार को कई दिनों तक पानी से वंचित रखा गया, फिर भी उन्होंने अन्याय के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। मौलानाओं ने कर्बला की शहादत को इंसानियत, धैर्य, त्याग और सच्चाई का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का बलिदान आज भी लोगों को अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मजलिस में उपस्थित लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए फातिहा पढ़ी। उन्होंने देश और समाज में शांति, सद्भाव तथा भाईचारे के लिए दुआएं मांगी। इस अवसर पर कई स्थानों पर सिन्नी और तबर्रुक भी वितरित किए गए। पूरे क्षेत्र में मोहर्रम को लेकर विशेष धार्मिक माहौल रहा। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने श्रद्धापूर्वक धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मोहर्रम का यह पर्व केवल शोक का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सत्य, न्याय, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए दिए गए महान बलिदान की याद दिलाता है। मुस्लिम समुदाय हर वर्ष इसे श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाता है।
श्रावस्ती में 10वीं मोहर्रम पर मजलिसें:इमाम हसन और हुसैन की शहादत को किया याद
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