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मत्स्य विभाग की योजनाओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य:बीमा प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं का मिलेगा लाभ, 5500 से अधिक मछुआरे होंगे प्रभावित


सिद्धार्थनगर में अब मछुआरों और मत्स्य पालकों को मत्स्य विभाग की किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। केंद्र और प्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र में पारदर्शिता और बेहतर निगरानी के उद्देश्य से नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडी) लागू किया है। इसके तहत पंजीकरण के बाद ही विभागीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

मत्स्य विभाग के अनुसार, कृषि क्षेत्र में लागू फार्मर रजिस्ट्री की तर्ज पर अब मत्स्य क्षेत्र का भी डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मछुआरे और मत्स्य पालक की डिजिटल प्रोफाइल बनाई जाएगी, जिसमें उनकी व्यक्तिगत जानकारी, तालाब का विवरण, उत्पादन क्षमता और विभागीय योजनाओं से प्राप्त लाभ का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से लाभार्थियों का सत्यापन आसान होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद ही मत्स्य पालक अनुदान, प्रशिक्षण, बीमा, तालाब निर्माण, मत्स्य बीज वितरण सहित अन्य योजनाओं के लिए पात्र होंगे। जिले में इस नई व्यवस्था का सीधा प्रभाव 5500 से अधिक पंजीकृत मछुआरों और मत्स्य पालकों पर पड़ेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े हैं, जो अभी तक विभागीय रिकॉर्ड में शामिल नहीं हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ऐसे लोग भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। सिद्धार्थनगर प्रदेश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन जिलों में शामिल है। यहां सरकारी तालाबों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर मछली पालन किया जाता है। बढ़नी, इटवा, खुनियांव और उस्का बाजार क्षेत्रों में निजी तालाबों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभाग के अनुसार जिले का मत्स्य उत्पादन प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पंजीकरण के लिए मत्स्य विभाग विशेष अभियान चला रहा है। इच्छुक मत्स्य पालकों को आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मत्स्य पालन से संबंधित जानकारी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सहायक आयुक्त मत्स्य नंदकिशोर प्रसाद ने बताया कि भविष्य में विभाग की अधिकांश योजनाओं का संचालन इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने सभी मत्स्य पालकों और मछुआरों से समय रहते पंजीकरण कराने की अपील की है, ताकि वे किसी भी सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रहें।

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