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सिद्धार्थनगर में धान की रोपाई रुकी:बारिश और नहरों में पानी न मिलने से किसान चिंतित


सिद्धार्थनगर के खेसरहा क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पर्याप्त मानसूनी बारिश न होने और नहरों में पानी की कमी के कारण खेत सूखे पड़े हैं, जिससे किसान चिंतित हैं। लहरी, मरवटिया, बसडीला, भईसा, गैडाखोर और झाझापार सहित आसपास के कई गांवों में किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है। हालांकि, खेतों में पानी के अभाव में रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती या नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता है, तो धान की फसल पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे पैदावार में कमी आने की आशंका है। किसान परशुराम ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया, “नर्सरी तैयार होने के बावजूद पानी की कमी के कारण रोपाई संभव नहीं हो पा रही है। समय निकलता जा रहा है, जिससे भविष्य में धान की पैदावार प्रभावित हो सकती है।” एक अन्य किसान सुमित शुक्ला ने सुझाव दिया कि यदि नहरों में समय पर पानी छोड़ दिया जाए, तो अधिकांश किसानों की समस्या का समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि केवल बारिश पर निर्भर रहना अब मुश्किल हो गया है। किसान श्रीचंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि धान की रोपाई के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है, लेकिन पानी के अभाव में किसान असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सिंचाई विभाग से तत्काल नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की है। सरयू नहर, बांसी के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा नहरों में पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है। उच्चाधिकारियों से प्राप्त निर्देशों के अनुसार जल्द ही क्षेत्र की नहरों में पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसानों को धान की रोपाई में राहत मिल सके। क्षेत्र के समस्त किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से अपील की है कि वे जल्द से जल्द नहरों में पानी उपलब्ध कराएं। उनका उद्देश्य समय रहते धान की रोपाई पूरी करना और संभावित आर्थिक नुकसान से बचना है।

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