पिपरा में आधी रात से सड़कों पर ‘सिलेंडर’ का मेला
बरगदवा(महराजगंज): जनपद के ठूठीबारी स्थित ‘मां शक्ति HP गैस एजेंसी’ द्वारा गांवों में किए जा रहे गैस वितरण ने उत्सव के बजाय आफत का रूप ले लिया है। एजेंसी द्वारा वितरण को सुदृढ़ बनाने के नाम पर गांवों में गाड़ियां तो भेजी जा रही हैं, लेकिन आपूर्ति में भारी कमी के कारण पिपरा ग्राम सभा जैसे क्षेत्रों में स्थिति विस्फोटक हो गई है।
आधी रात से पहरा: सड़कों पर बिछे खाली सिलेंडर
पिपरा ग्राम सभा में गैस मिलने की उम्मीद में उपभोक्ता अपनी नींद त्याग कर रात 1 बजे से ही सड़कों पर सिलेंडर की कतार लगा रहे हैं। सुबह होते-होते सड़कों पर खाली सिलेंडरों का ऐसा नजारा दिखता है मानो कोई मेला लगा हो। ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी ठूठीबारी में है, लेकिन जब वितरण के लिए गाड़ी गांव आती है, तो भारी भीड़ के कारण अफरा-तफरी मच जाती है और घंटों इंतजार के बाद भी ‘स्टॉक खत्म’ होने की बात कहकर गाड़ियां वापस चली जाती हैं।
लू के थपेड़े और रोजी-रोटी का संकट
पिछले कुछ दिनों से चल रही भीषण लू और आसमान से बरसती आग ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। कड़कती धूप में घंटों भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहना बुजुर्गों और महिलाओं के लिए किसी शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं है। सबसे बुरा हाल उन दिहाड़ी मजदूरों का है, जिन्हें गैस के लिए अपनी मजदूरी छोड़नी पड़ रही है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
सुदृढ़ वितरण या अव्यवस्था का जाल?
एजेंसी का दावा है कि गांव-गांव जाकर वितरण करने से व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। पिपरा में लगी ये लंबी कतारें एजेंसी प्रबंधन और रसद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं कि यदि वितरण व्यवस्था ‘सुदृढ़’ है, तो उपभोक्ताओं को आधी रात से सड़कों पर क्यों सोना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन वितरण केंद्रों पर टोकन सिस्टम या छाया की व्यवस्था क्यों नहीं करा रहा।
उपभोक्ताओं का आक्रोश कभी भी ले सकता हैं आंदोलन का रूप
वर्तमान में रसोई गैस की यह किल्लत केवल एक आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट बनती जा रही है। यदि ठूठीबारी स्थित ‘मां शक्ति HP गैस एजेंसी’ और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते आपूर्ति सुचारू नहीं की, तो ग्रामीणों का यह आक्रोश कभी भी सड़क पर बड़े आंदोलन के रूप में फूट सकता है।












