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सोमवार को मुहर्रम की छठी के अवसर पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक जुलूस निकाले गए। नगर पंचायत गायघाट में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस के दौरान मातमी नौहे पढ़े गए और लोगों ने शांति, भाईचारे तथा इंसानियत का संदेश दिया। जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर गुजरा, जहां स्थानीय लोगों ने जगह-जगह पानी और शरबत की व्यवस्था कर स्वागत किया। अखाड़ा दलों ने पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन किया। प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और पुलिस अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया। इस्लामी परंपरा के अनुसार, मुहर्रम केवल शोक का महीना नहीं है, बल्कि सत्य, न्याय, धैर्य और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी को याद करने का समय है। मुहर्रम की छठी के दिन कई स्थानों पर जुलूस निकालने की परंपरा है, जिसके माध्यम से लोग कर्बला के शहीदों को याद करते हैं और समाज में भाईचारे का संदेश देते हैं। तस्वीरें देखिए- स्थानीय पीर ए तरीकत सरफराज शाह चिस्ती ने बताया, “मुहर्रम का संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी और अपने परिवार की कुर्बानी दी। मुहर्रम की छठी का जुलूस उसी त्याग, सब्र और इंसानियत की याद दिलाता है, जिसका उद्देश्य शांति, भाईचारा और मानवता का संदेश देना है।” प्रभारी थानाध्यक्ष कलवारी पंकज कुमार पाण्डेय ने जानकारी दी कि मुहर्रम की छठी के जुलूस को सकुशल संपन्न कराने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई और जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। उन्होंने लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गायघाट में चौकी प्रभारी राकेश मिश्रा ने भी जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।
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गायघाट में मुहर्रम की छठी पर निकला जुलूस:कर्बला की कुर्बानी और इंसानियत का पैगाम, पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन
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