स्वतंत्रता आंदोलन में महाराजगंज के प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना का योगदान अविस्मरणीय रहा। उनके संघर्षों की बुनियाद पर तत्कालीन महराजगंज क्षेत्र के करीब 1 लाख 25 हजार किसानों को उनकी जमीनों पर मालिकाना हक मिला। किसानों के जमीन संबंधी अधिकारों के लिए किए गए आंदोलन के बाद लागू व्यवस्था को ‘गंडेविया बंदोबस्त’ के नाम से जाना गया। उनके किसान आंदोलनों और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के कारण अखबारों ने उन्हें ‘पूर्वी उत्तर प्रदेश का लेनिन’ तक कहा था। जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष सैन्य विज्ञान डॉ. परशुराम गुप्ता ने अपनी पुस्तक ‘पूर्वांचल के गांधी’ में प्रोफेसर सक्सेना के संघर्षों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया है। पुस्तक में अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों और उनके खिलाफ चले आंदोलनों का तथ्यात्मक विवरण दिया गया है। डॉ. गुप्ता के मुताबिक, प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना ने 1937 से 1940 के बीच विभिन्न किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया। इन आंदोलनों के दबाव में अंग्रेजी सरकार को जमीनों का दोबारा सर्वे कराना पड़ा और उनका पुनः आवंटन करना पड़ा। इसी प्रक्रिया के बाद तत्कालीन महराजगंज क्षेत्र के करीब 1 लाख 25 हजार किसानों को उनकी जमीनों पर मालिकाना हक मिला। 13 साल की उम्र में जलियांवाला बाग कांड के विरोध में निकाला जुलूस डॉ. परशुराम गुप्ता बताते हैं कि 1919 के जलियांवाला बाग कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस समय महज 13 वर्ष की उम्र में कानपुर में शिब्बन लाल सक्सेना ने विरोध जुलूस का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर तीन बेंत की सजा दी गई। इस घटना ने उनके भीतर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प और मजबूत कर दिया। शेरवानी छोड़ आजीवन पहनी धोती-कुर्ता प्रोफेसर सक्सेना शुरू से ही स्वराज आंदोलन से प्रभावित थे। विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में वे शेरवानी पहनकर पहुंचे थे। प्राचार्य ने उन्हें देशी पहनावा अपनाने के लिए टोका। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी वेशभूषा छोड़ने का प्रण लिया और जीवनभर धोती-कुर्ता पहनते रहे। पढ़ाई के साथ वे खेलों में भी रुचि रखते थे। उनका मानना था कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है। वे पहलवानी करते थे और विश्वविद्यालय की फुटबॉल टीम के कप्तान भी रहे। 1965 में शुरू किया जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना ने 13 मार्च 1965 को महराजगंज में जवाहर लाल नेहरू पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की शुरुआत की। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इस योगदान ने भी क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया। आगरा में हुआ था जन्म शिब्बन लाल सक्सेना का जन्म 13 जुलाई 1906 को आगरा में अपने मामा के घर हुआ था। उनके पिता छोटेलाल सक्सेना पोस्टमास्टर थे। उनका पैतृक संबंध बरेली की आंवला तहसील के बल्लिया गांव से था। उनकी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा कानपुर के शासकीय हाईस्कूल, क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज और डीएवी कॉलेज में हुई।
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महाराजगंज के प्रो शिब्बन ने 1.25 किसानों को दिलाया हक:गंडेविया बंदोबस्त लागू कराया, अंग्रेजों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश का लेनिन कहा था
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