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रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर ने हीट स्ट्रोक को लेकर जारी की एडवाइजरी, 40°C पार तापमान में सतर्क रहने की अपील

गोरखपुर ।अप्रैल 2026 के दौरान तापमान 105°F (≈40.5°C) से भी अधिक तापमान तक पहुंच गया जो हीट स्ट्रोक के खतरे को काफी बढ़ाता है। इसी को देखते हुए रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर  ने आम जनता के लिए हीट स्ट्रोक को लेकर अहम स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। डॉ शूलपाणि मिश्रा. एसोसिएट कंसल्टेंट – डी.एम. गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के अनुसार, बदलते मौसम और हीटवेव की बढ़ती घटनाओं के कारण उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में हीट से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय आंकड़े भी बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हीट स्ट्रोक के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की चेतावनी दी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ सकता है।

लक्षण, जोखिम और बचाव—क्या रखें ध्यान
डॉ. शूलपाणि मिश्रा ने बताया, “हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में शरीर का तापमान 104°F या उससे अधिक होना, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी-दस्त, तेज दिल की धड़कन और भ्रम या बेहोशी शामिल हैं। यह स्थिति खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धूप में काम करने वाले मजदूरों और पहले से लिवर, किडनी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए अधिक खतरनाक हो सकती है। बचाव के लिए दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचना चाहिए, पर्याप्त मात्रा में पानी और ओआरएस  का सेवन करना चाहिए, हल्के व ढीले कपड़े पहनने चाहिए और खाली पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए। साथ ही, कैफीन और अल्कोहल से दूरी बनाकर रखना जरूरी है। इसके अलावा, शरीर को ठंडा रखने के लिए छाया में समय-समय पर आराम करें, सिर को ढककर रखें, हल्का और सुपाच्य भोजन लें तथा बच्चों और बुजुर्गों को लंबे समय तक धूप में न रहने दें।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए 24×7 इमरजेंसी सेवाएं, त्वरित कूलिंग तकनीक और आईवी फ्लूड मैनेजमेंट जैसी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रोक जानलेवा हो सकता है, लेकिन समय पर सावधानी और उपचार से इससे बचाव संभव है। इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें, विशेषकर यदि तेज बुखार, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में पहुंचकर चिकित्सकीय सहायता लें, क्योंकि समय पर इलाज ही जीवन बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।

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