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विक्रमजोत ब्लॉक की अमोढ़ाखास ग्राम पंचायत के बतासी जोत गांव में पक्की सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को बरसात के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में प्रवेश के लिए चारों ओर से कोई भी स्थायी पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है, जिससे आवागमन बाधित होता है। बरसात के दिनों में गांव के रास्ते कीचड़ और जलजमाव से भर जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और महिला-पुरुषों को इन्हीं जोखिम भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों को वर्षों से गांव के अंदर तक पक्की सड़क बनने का इंतजार है। बतासी जोत गांव तक पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं, लेकिन सभी अधूरे या कच्चे हैं। कोतवालपुर गांव के सामने नहर से एक रास्ता है, जो कुछ दूर तक पक्की डामर रोड है, लेकिन उसके बाद बतासी जोत गांव तक कच्ची है। दूसरा रास्ता जूनियर विद्यालय अमोढ़ा के बगल से जाता है, जो पूरी तरह कच्चा है। अमोढ़ा में एक मैरिज हॉल के बगल से निकली तीसरी सड़क पक्की है, लेकिन वह आगे जाकर जद्दूपुर गांव की ओर मुड़ जाती है और बतासी जोत पुरवा तक नहीं पहुंचती। चौथी सड़क अमोढ़ा क्रय केंद्र गोदाम के सामने से है, जिस पर कुछ दूर खरंजा लगा है, पर आगे पूरी सड़क कच्ची है। ग्रामीणों विजय कुमार, अभिषेक भारती, रवि प्रकाश, जमुना प्रसाद, दुबारी, रामकिशन यादव और श्री कृष्णा यादव ने बताया कि अमोढ़ा खास ग्राम पंचायत लोहिया समग्र और संसद आदर्श गांव है, जिसकी आबादी लगभग 10 हजार है और इसमें करीब 14 पुरवे हैं। इसके बावजूद, बतासी जोत गांव के लोगों को आज भी अपने गांव तक कोई पक्की सड़क नहीं मिली है। विजय कुमार ने विशेष रूप से बताया कि गांव के बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए रामजानकी सड़क तक ले जाना पड़ता है, क्योंकि स्कूल वाहन वहीं से बच्चों को लेता और छोड़ता है। गांव में पक्की सड़क न होने से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
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बतासी जोत की सड़क कच्ची:ग्रामीणों को बरसात में आवागमन में परेशानी
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