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पटना में द्वितीय अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित:विधायक रामफेरन पाण्डेय ने किया उद्घाटन, कवियों ने देर रात तक बांधा समां


श्रावस्ती। विकास खंड इकौना के सौरुंपुर में शुक्रवार को ‘द्वितीय अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय अवधी समाज और श्रावस्ती साहित्य के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता सवैया सम्राट मनोज मिश्र ‘कप्तान’ ने की, जबकि राजेश शुक्ल ने इसका संयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रावस्ती विधायक रामफेरन पाण्डेय ने मां शारदे के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में विधायक पाण्डेय ने कहा, “कवि केवल शब्दों का चितेरा नहीं, बल्कि युगदृष्टा और युगनिर्माता होता है।” उन्होंने जनपद में साहित्यिक गतिविधियों की सराहना करते हुए आयोजकों को भविष्य में भी सहयोग का आश्वासन दिया। काव्य पाठ की शुरुआत अध्यक्ष मनोज मिश्र ‘कप्तान’ की वाणी वंदना से हुई। देर रात तक चले इस सम्मेलन में देश के नामी रचनाकारों ने हास्य, ओज और संवेदना से परिपूर्ण कविताओं का पाठ किया, जिससे श्रोतागण देर रात तक बंधे रहे। रांची से आए अभिनव मिश्र ने वर्तमान राजनीति पर आधारित मुक्तकों और गजल से श्रोताओं को प्रभावित किया। अध्यक्ष मनोज मिश्र ‘कप्तान’ ने दहेज कुप्रथा पर अपनी रचना “हमका भगवान दिहा सबकुछ, तू जौन देव चुपचाप धरी” प्रस्तुत की, जिसे खूब सराहा गया। राजेश शुक्ल ने अपने अवधी गीत “देयं सब गारी बारी बारी बारी” से श्रोताओं का मनोरंजन किया। गोंडा के विनय अक्षत ने ओजपूर्ण कविता “चाहते तो सब यहां पर हैं विवेकानन्द होना” का पाठ किया। उनके गीत “कर दो दूर उदासी रघुवर” को भी प्रशंसा मिली। अनुपम पाठक ‘अनुपम’ ने मंच संचालन के साथ राष्ट्रवाद पर अपनी कविता “कविता सांगा का साहस है, कविता प्रताप का है भाला” सुनाई। उन्होंने नारी शक्ति के आग्रह पर मां सीता की विदाई पर एक गीत भी प्रस्तुत किया।

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