रिपोर्ट – सुशील शर्मा
रुधौली, बस्ती।
विकासखंड रुधौली की ग्राम पंचायत आमबारी में मनरेगा कार्यों को लेकर उठ रहे सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद मनरेगा कार्यों में दर्ज मजदूरों की संख्या में अचानक गिरावट देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार जहां 01 जून को 114 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई थी, वहीं बाद में यह संख्या घटकर 112 और फिर 65 तक पहुंच गई।



ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले वास्तव में इतने मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद थे तो संख्या में अचानक आई इस गिरावट का कारण क्या है? वहीं यदि पूर्व में दर्ज की गई संख्या वास्तविक नहीं थी तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? यही सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में बना हुआ है।
फोटो और हाजिरी को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल
मामले में सबसे अधिक चर्चा मनरेगा पोर्टल पर अपलोड की जा रही तस्वीरों को लेकर हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई कार्यों में एक ही तस्वीर का बार-बार उपयोग किया जा रहा है। कुछ तस्वीरों में मौसम और परिस्थितियां अलग दिखाई देती हैं, जबकि उन्हें अलग-अलग तिथियों और कार्यों से जोड़ा गया है।
आरोप यह भी है कि कहीं महिलाओं की उपस्थिति के स्थान पर पुरुषों की तस्वीरें अपलोड की गई हैं, तो कहीं सीमित संख्या में मौजूद लोगों की फोटो के आधार पर बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पोर्टल पर अपलोड तस्वीरों, जियो टैगिंग, मास्टर रोल और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
शिकायतों के बावजूद धीमी जांच पर नाराजगी
स्थानीय लोगों के अनुसार मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद जांच प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही है। यही कारण है कि अब सवाल केवल ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निगरानी और जांच व्यवस्था पर भी उठने लगा है।
प्रभारी बीडीओ के बयान पर चर्चा
मामले में जब प्रभारी बीडीओ इंद्रेश यादव से बातचीत की गई तो उन्होंने कथित तौर पर कहा, “जाकर प्रधान प्रतिनिधि से मिल लीजिए, कई पत्रकार साथी मिलकर आए हैं।” इस बयान के बाद ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होना अधिक आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई का इंतजार
मीडिया टीम द्वारा पूर्व में डीसी मनरेगा संजय कुमार शर्मा से भी वार्ता की गई थी। उन्होंने शिकायतों की जांच कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब तक धरातल पर किसी प्रभावी कार्रवाई अथवा जांच रिपोर्ट की जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की बात करते रहे हैं। ऐसे में आमबारी ग्राम पंचायत में सामने आ रहे आरोपों और शिकायतों पर कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि मनरेगा पोर्टल पर अपलोड फोटो, जियो टैगिंग, मास्टर रोल, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति तथा भुगतान अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और सरकारी धन का उपयोग नियमानुसार हुआ है या नहीं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार उठ रहे आरोपों और शिकायतों के बावजूद जांच की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है और आखिर आमबारी में मनरेगा कार्यों की वास्तविक तस्वीर कब सामने आएगी?संभावित हेडलाइन:
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