रिपोर्ट:ब्यूरो कार्यालय।
महराजगंज। जनपद के कोठीभार थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सभा विशुनपुरा में बीती 11 जुलाई को जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में पुलिस प्रशासन की एकपक्षीय और संदेहास्पद कार्यप्रणाली सामने आई है। थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा पर नियमों को ताक पर रखकर एकतरफा कार्रवाई करने और गंभीर रूप से घायल पक्ष की सुनवाई न करने का गंभीर आरोप लगा है। न्याय न मिलने से क्षुब्ध होकर पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक (SP) का दरवाजा खटखटाया है।

आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला।
ग्राम सभा विशुनपुरा में जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई। घटना के दौरान एक पक्ष से जुड़े रामधनी पुत्र हरिबंश के लड़के ऋषिकेश उर्फ आकाश गुप्त ने अपने बचाव में पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही कोठीभार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों को थाने बुलाया।
थाने पहुंचने पर दोनों पक्षों ने अपना-अपना प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। आरोप है कि थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा ने प्रथम पक्ष की पुनिता देवी पत्नी सुरेश गुप्त का प्रार्थना पत्र तत्काल स्वीकार कर उपनिरीक्षक (SI) संदीप कुमार और सतीश खरवार को जांच व कार्रवाई का आदेश दे दिया। वहीं दूसरी ओर गंभीर रूप से घायल दूसरे पक्ष की सविता देवी पत्नी योगेंद्र को प्रार्थना पत्र जमा कराने के बजाय “पहले दवा करा कर आओ” कहकर थाने से भेज दिया गया।
गंभीर हालत के बावजूद पुलिस की उदासीनता।
मारपीट में सविता देवी के पुत्र नितेश का सिर फट गया था और अत्यधिक खून बह रहा था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सिसवा के डॉक्टरों ने नितेश की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसका पिछले कई दिनों से ईलाज चल रहा हैं।
> नियमों के अनुसार कानूनन किसी भी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) की सूचना मिलने पर पुलिस का पहला कर्तव्य प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना और घायल का तुरंत मेडिकल (Maji) कराना होता है। लेकिन कोठीभार पुलिस ने घायल पक्ष का शिकायती पत्र तक लेना उचित नहीं समझा।
दूसरे और तीसरे दिन का घटनाक्रम: एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब अगले दिन पुलिस ने दोनों पक्षों का शांति भंग (धारा 151) में चालान कर दिया। हद तो तब हो गई जब 13 जुलाई को दोनों पक्ष पुनः थाने पहुंचे। आरोप है कि थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा ने अपने ही पुराने जांच आदेश को दरकिनार करते हुए, प्रथम पक्ष पुनिता देवी से दोबारा एक नया प्रार्थना पत्र लिया और दूसरे पक्ष सविता देवी के दो लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया।
इसके विपरीत, अस्पताल में भर्ती अपने बेटे के लिए न्याय मांग रही सविता देवी के प्रार्थना पत्र पर कोई सुनवाई नहीं की गई, बल्कि आरोप है कि उन्हें थाने से अपमानित करके भगा दिया गया।
मेडिकल रिपोर्ट की अनदेखी क्यों?
जब एक पक्ष का युवक (नितेश) गंभीर रूप से घायल था और जिला अस्पताल में भर्ती था, तो पुलिस ने उसकी डॉक्टरी रिपोर्ट के आधार पर काउंटर केस (क्रॉस FIR) दर्ज क्यों नहीं की?
बार-बार प्रार्थना पत्र बदलना।
प्रथम पक्ष से पहले प्रार्थना पत्र पर जांच बैठाने के बाद, अचानक दूसरा प्रार्थना पत्र लेकर तुरंत मुकदमा दर्ज करना पुलिस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पीड़ित को थाने से भगाना।
न्याय की आस में थाने पहुंची एक महिला को अपमानित करना पुलिस की ‘मित्र पुलिस’ वाली छवि के बिल्कुल विपरीत है।
न्याय के लिए SP की चौखट पर पीड़िता।
थाना स्तर पर पूरी तरह निराश होने के बाद पीड़िता सविता देवी ने न्याय की गुहार लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक महराजगंज के कार्यालय का रुख किया है। अब देखना यह होगा कि क्या उच्च अधिकारी इस गंभीर और संवेदनशील मामले का संज्ञान लेकर कोठीभार थानाध्यक्ष की एकपक्षीय कार्रवाई की जांच कराएंगे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएंगे।












