सिद्धार्थनगर जनपद के खेसरहा क्षेत्र की ग्राम पंचायत टिकुईया में आयोजित नवदिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई गई। कथा व्यास पंडित राम जी शास्त्री ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन किया। इस दौरान कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पंडित राम जी शास्त्री ने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना की। उन्होंने मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों का उल्लेख किया, जिनसे प्रजा त्रस्त थी। शास्त्री जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के घर जन्म लिया। उनके जन्म लेते ही कारागार के सभी बंधन स्वतः खुल गए और वसुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे, जहां नंद बाबा और माता यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सजीव चित्रण किया गया। जैसे ही श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत किया। महिलाओं और बच्चों ने भक्ति गीतों पर नृत्य कर आनंद लिया। पंडित राम जी शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म और प्रेम का संदेश देता है। उन्होंने लोगों से भगवान की भक्ति और सत्संग से जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति नन्हे चौबे, हरिश्चंद्र चतुर्वेदी, राधेश्याम चतुर्वेदी, राममिलन चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। कार्यक्रम के आयोजक शत्रुघ्न नाथ चतुर्वेदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि यह नवदिवसीय श्रीमद् भागवत कथा जारी रहेगी और क्षेत्रवासी प्रतिदिन कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
टिकुईया में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा का आयोजन:भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने किए जयकारे
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