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उर्वरक की कालाबाजारी पर सख्ती: तय कीमत से अधिक वसूली पर लाइसेंस रद्द, एफआईआर के निर्देश

IMG-20260430-WA0072कौशाम्बी। जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी और मनमानी कीमत वसूली पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने सरस हाल सभागार में कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों, उर्वरक विक्रेताओं और सहकारी समितियों के पदाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि उर्वरक, बीज और कीटनाशक दवाओं का विक्रय शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही किया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निरस्त कर उसके खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।सीडीओ ने विशेष रूप से “टैगिंग” पर रोक लगाते हुए कहा कि उर्वरक के साथ किसानों की इच्छा के विरुद्ध अन्य उत्पाद बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विक्रेता अपने प्रतिष्ठानों पर रेट बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें और यह भी स्पष्ट लिखें कि उर्वरक के साथ अन्य वस्तुएं लेना अनिवार्य नहीं है।बैठक में थोक विक्रेताओं को अन्य जनपदों में उर्वरक बिक्री न करने के सख्त निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जनपद में उर्वरक केवल उन्हीं किसानों को दिया जाए, जिन्होंने फार्मर रजिस्ट्री करवा ली है। बिना रजिस्ट्री के उर्वरक प्राप्त करने में किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।सीडीओ ने किसानों से अपील की कि वे शीघ्र अपना फार्मर रजिस्ट्री करवाएं। इसके लिए सहकारी समितियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने केंद्रों पर पंजीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करें और एक सप्ताह के भीतर सभी किसानों की रजिस्ट्री पूरी कराएं। साथ ही दुकानों पर किसानों का नाम, पता, मोबाइल नंबर, फार्मर आईडी, स्टॉक रजिस्टर और लाइसेंस आदि अभिलेख अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिनकी जांच जिला व तहसील स्तरीय समितियों द्वारा की जाएगी।इसके अतिरिक्त, सीडीओ ने मॉडल ग्राम गोविन्दपुर (विकासखंड नेवादा) में विभिन्न विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक सप्ताह के भीतर सत्यापन कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यान एवं जैविक खेती से जुड़े किसानों को चिन्हित कर उनकी पात्रता के आधार पर प्रशिक्षण व योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने पर जोर दिया।बैठक में उप कृषि निदेशक सतेन्द्र कुमार तिवारी सहित पशुपालन, सिंचाई, कृषि विज्ञान केंद्र, सहकारिता, मत्स्य एवं उद्यान विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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