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हर्रैया उप निबंधन कार्यालय में गुरुवार को अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं ने हड़ताल की। निजीकरण और ई-पेमेंट व्यवस्था के विरोध में हुए इस प्रदर्शन के कारण पूरे दिन एक भी विलेख का पंजीकरण नहीं हो सका। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के सामने नारेबाजी कर सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की। अधिवक्ता राजकुमार पांडेय ने सरकार पर नए कानून थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लेखन कार्य के निजीकरण और स्टाम्प की ई-पेमेंट व्यवस्था से लाखों लोगों की आजीविका पर संकट आएगा और आम जनता को भी नुकसान होगा। पांडेय ने आशंका जताई कि इससे विभागों द्वारा मनमाने ढंग से रजिस्ट्री की जाएगी, जिससे जनता का शोषण बढ़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष रविंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि रजिस्ट्री कार्य से जुड़े हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह व्यवस्था लागू नहीं होने दी जाएगी और सरकार का फैसला वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के कारण उप निबंधन कार्यालय में कामकाज पूरे दिन प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारी कार्यालय परिसर के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और अपना विरोध दर्ज कराते रहे। इस दौरान बैजनाथ ओझा, पारसनाथ पांडेय, हरिश्चंद्र पांडेय, केशव प्रसाद, एडवोकेट गंगाराम यादव, आलोक पांडेय, लालचंद्र मिश्र, देवमणि पांडेय, विनय श्रीवास्तव, सुनील पांडेय, रमाकांत पांडेय, सुबोध सोनकर, मनोज गौतम, बृजेश प्रताप वर्मा, श्रीकांत पांडेय, मनीष सिंह, हीरा वर्मा, संजीव श्रीवास्तव, हिरेंद्र लाल श्रीवास्तव, विवेक मिश्रा, राहुल शुक्ला, दीपनारायण पांडेय, पिंटू सिंह, सुरेश सिंह, गुड्डू श्रीवास्तव, अनूप उपाध्याय, पाटनदीन यादव, रामकुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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हर्रैया उप निबंधन कार्यालय में हड़ताल:निजीकरण और ई-पेमेंट व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन, कामकाज प्रभावित
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