बस्ती – कृषि विज्ञान केन्द्र, बस्ती में दिनांक 03 से 07 अगस्त, 2026 तक किसानों एवं ग्रामीण युवाओं के लिए संरक्षित खेती विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को संरक्षित खेती की आधुनिक तकनीकों, कम लागत में अधिक उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण सब्जी उत्पादन, जल एवं पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम का मार्गदर्शन डॉ. एस. के. तोमर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, बस्ती ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने किसानों को संरक्षित खेती की उपयोगिता, आय वृद्धि एवं वर्षभर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पी. के. मिश्रा, वैज्ञानिक (कृषि वानिकी) ने प्रशिक्षण के दौरान संरक्षित खेती की अवधारणा, महत्व एवं वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, लो-टनल एवं मल्चिंग जैसी संरक्षित खेती तकनीकों को अपनाकर किसान प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों एवं अन्य उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने जल एवं पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्मों के चयन तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि संरक्षित खेती न केवल प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि करती है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केन्द्र के विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषयों पर व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। डॉ. वी. बी. सिंह, वैज्ञानिक (आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन) ने उन्नत किस्मों एवं गुणवत्तापूर्ण बीज चयन की जानकारी दी। श्री आर. वी. सिंह, वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, समूह आधारित खेती तथा तकनीकी प्रसार के महत्व से अवगत कराया। डॉ. प्रेम शंकर, वैज्ञानिक (पादप संरक्षण) ने संरक्षित खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा समेकित कीट प्रबंधन (प्च्ड) पर प्रशिक्षण दिया। डॉ. अंजली वर्मा, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) ने सुरक्षित एवं पौष्टिक सब्जियों के पोषण महत्व, मूल्य संवर्धन तथा घरेलू उपयोग पर जानकारी दी। हरिओम मिश्रा, वैज्ञानिक (कृषि विज्ञान/एग्रोनॉमी) ने संरक्षित खेती में पोषक तत्व, सिंचाई एवं फसल प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रदर्शन किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पॉलीहाउस एवं अन्य संरक्षित खेती संरचनाओं का अवलोकन कराया गया तथा आधुनिक उत्पादन तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में इन तकनीकों को अपने खेतों पर अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया।
कृषि विज्ञान केन्द्र पर संरक्षित खेती पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन
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