बिजनौर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों को खरीफ फसलों से पूर्व ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि छिटपुट वर्षा के चलते वर्तमान समय गहरी जुताई के लिए उपयुक्त है तथा एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन (आईपीएम) में भी इसे महत्वपूर्ण माना गया है।
उन्होंने बताया कि मई-जून में की जाने वाली गहरी जुताई से मिट्टी में छिपे कीट, अंडे, लार्वा, प्यूपा और निमेटोड सूर्य की तेज धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। साथ ही भूमि जनित रोगों के जीवाणु और कवक भी खत्म हो जाते हैं, जिससे फसलों में रोगों की संभावना कम होती है।
उन्होंने कहा कि गहरी जुताई से खेत में मौजूद खरपतवार और फसल अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं, जिससे जीवांश बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता सुधरती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है तथा जड़ों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है। जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि ग्रीष्मकालीन जुताई से मिट्टी की कठोर परत टूटती है और वायु संचार बढ़ने से लाभकारी सूक्ष्म जीवों की वृद्धि होती है, जो फसल उत्पादन के लिए अत्यंत उपयोगी है।












