HomeHealth & Fitnessगंगा दशहरा पर स्वामी चिदानंद ने दिया स्वच्छता और संरक्षण का संदेश

गंगा दशहरा पर स्वामी चिदानंद ने दिया स्वच्छता और संरक्षण का संदेश

  • मासिक श्रीराम कथा की पावन व्यास पीठ से स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने किया संदेश तीर्थ स्थानों से सुनहरी यादों के साथ अपना कचरा भी साथ लेकर जायें तभी इन दिव्य तीर्थों की दिव्यता बची रहेगी

ऋषिकेश। माँ गंगा के पावन अवतरण दिवस ‘गंगा दशहरा’ के शुभ अवसर पर परमार्थ निकेतन के दिव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम हुआ। हिमालय से प्रवाहित हो रही माँ गंगा की पावन धारा के तट पर श्रद्धालुओं, संतों, ऋषियों एवं देश-विदेश से आये भक्तों ने माँ गंगा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए मां गंगा आरती में सहभाग किया तथा माँ गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाये रखने का संकल्प लिया।

परमार्थ निकेतन में संत मुरलीधर के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही ‘मासिक मानस ज्ञान गंगा’ में श्रद्धालुओं को पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती का पावन सान्निध्य व आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सम्पूर्ण वातावरण श्रीरामचरितमानस के मधुर चौपाइयों से गुंजायमान हो उठा। 

WhatsApp Image 2026-05-25 at 19.34.55 (1)

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज का दिन केवल माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव नहीं, बल्कि यह मानवता के कल्याण हेतु दिव्य चेतना के धरती पर प्रवाहित होने का स्मरण दिवस है। उन्होंने कहा कि माँ गंगा केवल जलधारा नहीं हैं, वे भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, जीवन, चेतना और करुणा की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। जिस प्रकार मां गंगा सबको बिना भेदभाव के अपना आशीर्वाद देती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में प्रेम, सेवा, करुणा और समर्पण के भाव को प्रवाहित करना होगा।

स्वामी ने कहा, “यदि हम वास्तव में माँ गंगा से प्रेम करते हैं, तो केवल पूजा-अर्चना पर्याप्त नहीं है। हमें उनके अस्तित्व की रक्षा हेतु ठोस संकल्प लेने होंगे। गंगा को स्वच्छ रखना केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का आध्यात्मिक और नैतिक उत्तरदायित्व है।”

मासिक श्रीराम कथा की पावन व्यासपीठ से संदेश देते हुए स्वामी ने तीर्थ यात्रियों एवं श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुये कहा कि वे तीर्थ स्थलों से सुनहरी यादों के साथ अपना कचरा भी साथ लेकर जाएँ। उन्होंने कहा, “यदि हम अपने तीर्थों की दिव्यता को बनाये रखना चाहते हैं, तो हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। प्लास्टिक, कचरा और प्रदूषण तीर्थों की पवित्रता को नष्ट कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों को भी वही निर्मल और दिव्य गंगा प्राप्त हो, इसके लिये आज हमें जागरूक बनना होगा।” हमें यूज एंड थ्रो कल्यर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ना होगा।

साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि माँ गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि गंगा केवल भारत की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक धरोहर हैं। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट, जल संकट और मानसिक अशांति से जूझ रही है, तब माँ गंगा का संदेश हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा, “गंगाजी हमें संदेश देती है कि जीवन निरंतर बहते रहने का नाम है। हमें अपने भीतर की नकारात्मकता, क्रोध, अहंकार और तनाव को बहाकर प्रेम, शांति और सेवा के भाव को अपनाना चाहिए।”

इस अवसर पर संत मुरलीधर ने श्रीरामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन में भक्ति, सेवा, विनम्रता और धर्म के महत्व को अत्यंत सरल एवं भावपूर्ण शैली में  बताया। उनके श्रीमुख से प्रवाहित मानस ज्ञान गंगा में श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

परमार्थ निकेतन में आयोजित गंगा आरती के दौरान सैकड़ों दीपों की अलौकिक छटा ने सम्पूर्ण परमार्थ गंगा तट को दिव्य प्रकाश से आलोकित कर दिया। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर स्वामी , साध्वी और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने मां गंगा का पूजन अर्चन व गंगा स्त्रोत से विशेष पूजन किया।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments