बहराइच में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं के साथ पोषण को भी उपचार का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। जिला टीबी अस्पताल की ओपीडी में ऐसे मरीजों को, जिनका वजन और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) सामान्य से काफी कम पाया जा रहा है, उन्हें दवाओं के साथ ‘पोषण पोटली’ भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर और कुपोषित टीबी मरीजों के लिए नया संबल बन रही है। इस अभियान की शुरुआत सीएमओ डॉ. संजय कुमार और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा की पहल पर की गई है। विशेष बात यह है कि दोनों अधिकारी अपने निजी सहयोग से इन पोषण पोटलियों की व्यवस्था कर रहे हैं। करीब एक माह तक चलने वाली इस पोषण पोटली को तैयार करने में लगभग 500 रुपये का खर्च आता है। इसमें मूंगफली, भुना चना, सोयाबीन बड़ी और गुड़ जैसी प्रोटीन एवं ऊर्जा से भरपूर सामग्री शामिल की गई है। यह सामग्री मरीजों के गिरते वजन को नियंत्रित करने, शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा ने बताया कि मरीज को अगली पोटली एक माह बाद अस्पताल आने पर ही दी जाएगी। इस दौरान उसके वजन और बीएमआई की दोबारा जांच की जाएगी तथा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि वह नियमित रूप से दवाओं का सेवन कर रहा है। इससे मरीजों द्वारा उपचार बीच में छोड़ने की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने इस पहल को व्यापक बनाने के लिए सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, उद्योगपतियों और प्रबुद्ध नागरिकों से आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल दवाओं से नहीं, बल्कि उपचार, पोषण और सामाजिक सहयोग के संयुक्त प्रयासों से ही हासिल किया जा सकता है।
टीबी मरीजों को दवाओं संग मिल रही ‘पोषण पोटली’:बहराइच में स्वास्थ्य विभाग की पहल, इलाज जारी रखने में सहायक
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












