HomeHealth & Fitnessसंसार मे दुःख का सबसे बड़ा कारण मोह है--प्रणव पुरी महाराज

संसार मे दुःख का सबसे बड़ा कारण मोह है–प्रणव पुरी महाराज

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फिरोजाबाद , सुहागनगरी के विभव नगर स्थित एस. एच. जे. मॉर्डन स्कूल प्रांगण में आयोजित “श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ” के तृतीय दिवस के अवसर पर कथा स्थल पूर्णतः भक्तिमय वातावरण में सराबोर दिखाई दिया
कार्यक्रम का शुभारम्भ कथा आयोजक ओम प्रकाश शर्मा द्वारा विधिवत पूजन एवं भव्य आरती के साथ किया  गया।जिसके पश्चात परम पूज्य महामृत्युंजय पीठाधीश्वर महाकाल उज्जैन के स्वामी  प्रणवपुरी महाराज व्यासपीठ पर विराजमान हुए। 
कार्यक्रम का संचालन डॉ0 प्रभाष्कर राय द्वारा किया गया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने माता सती एवं भगवान शंकर के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि जहाँ विरोध, अपमान एवं कटुता का वातावरण हो, वहाँ जाने से सदैव बचना चाहिए। भगवान शंकर द्वारा माता सती को समझाया गया था, कि अपने ही स्वजनों द्वारा दिया गया। अपमान मनुष्य को सबसे अधिक पीड़ा देता है। शस्त्र का घाव समय के साथ भर सकता है, किंतु कटु वचनों से मिला आघात जीवनभर मन में बना रहता है। उन्होंने बताया कि भगवान शंकर की आज्ञा के विरुद्ध माता सती जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में पहुँचीं और वहाँ शिवजी का सम्मान न देखकर अत्यंत व्यथित हुईं, तब उन्होंने योग अग्नि में अपने शरीर का त्याग कर दिया। वही माता सती पुनः हिमालय के घर माता पार्वती के रूप में अवतरित होकर भगवान शंकर से विवाह करती हैं।
महाराज प्रणव पुरी जी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि संसार प्रायः उगते हुए सूर्य को ही प्रणाम करता है। जब ध्रुव जी को उनकी विमाता सुरुचि द्वारा भरी सभा में अपमानित कर दिया गया था, तब कोई उनके पक्ष में खड़ा नहीं हुआ। किंतु भगवान की कठोर तपस्या एवं भगवत कृपा प्राप्त कर जब ध्रुव जी लौटे, तब वही समाज, प्रजा एवं राजपरिवार उनके स्वागत के लिए उपस्थित दिखाई दिये।
 इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति, दृढ़ निश्चय एवं भगवान के प्रति समर्पण मनुष्य को महानता के शिखर तक पहुँचा देते हैं।
जड़ भरत के प्रसंग द्वारा महाराज श्री ने समझाया कि संसार का मोह ही जीव को जन्म-मरण के चक्र में बाँधे रखता है। वहीं अजामिल प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि इस ब्रह्मांड में मनुष्य के प्रत्येक कर्म पर ईश्वर की दृष्टि रहती है। और हरि नाम का स्मरण ही कलियुग में जीव के कल्याण का सबसे सरल एवं प्रभावी मार्ग है।
कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्ति संगीत, मधुर भजनों एवं “हरि बोल” तथा “राधे-राधे” के जयकारों से गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण एवं आरती में सम्मिलित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर ज्ञान गंगा का अमृत पान कर रहे है। और अपने सभी कष्टों को दूर करने के लिये भगवान नारायण का ध्यान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे है। आयोजन समिति द्वारा सभी धर्म प्रेमियों से अनुरोध कर कहा है। कि ज्यादा से ज्यादा सँख्या में कथा पंडाल में आकर महाराज प्रणव पुरी जी के मुखारबिंद से कथा भागवत का स्मरण कर अपने पापों को हमेशा-हमेशा के लिये दूर करे। जय श्री राधे जय श्री कृष्ण

इस अवसर पर डॉ0 उग्रसेन पाण्डेय, देवेन्द्र शास्त्री, ब्रजेश कटारा, देवव्रत पांडेय, अशोक शुक्ला, नरेन्द्र शर्मा, डॉ0 प्रभाष्कर राय , राम नरेश कटारा, शिवम शर्मा, मनोज कुमार शर्मा , अनुपम शर्मा,  धीरेन्द्र कुमार शर्मा, विनय कुमार शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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