बहराइच के रामनगर, सेमरा, नानपारा और नवाबगंज क्षेत्र से हज यात्रियों का पहला जत्था गुरुवार को सऊदी अरब के लिए रवाना हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों और परिजनों ने नम आंखों से विदाई दी। इस जत्थे में कुल सात हज यात्री शामिल हैं। इनमें सती जोर गांव से गुलाम सरवर और उनकी पत्नी वसीउन निशा, चनैनी गांव से मोहम्मद आसिफ और उनकी पत्नी शबनम बेगम, तथा केवलपुर गांव से सलीम खान और उनकी पत्नी अलीमुननिशा शामिल हैं। मोहम्मद शौकत अली भी इस समूह का हिस्सा हैं। इस संबंध में मौलाना जैनुल आबेदीन कास्मी ने हज यात्रा के सिद्धांतों और चरणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जायरीन सऊदी अरब के विभिन्न पवित्र स्थानों पर हज पूरे करेंगे। हज यात्रा का पहला चरण इरहाम बांधने से शुरू होता है। इसमें बिना सिला हुआ सफेद कपड़ा शरीर पर लपेटा जाता है। इरहाम बांधने के बाद कुरान की आयतें पढ़ी जाती हैं। इसके उपरांत काबा पहुंचकर नमाज अदा की जाती है और सफा व मरवाह नामक दो पहाड़ियों के बीच सात चक्कर लगाए जाते हैं। यह माना जाता है कि हजरत इब्राहिम की पत्नी इस्माइल के लिए पानी की तलाश में यहीं पहुंची थीं। इसके बाद हाजी मक्का से लगभग 5 किलोमीटर दूर मीना नामक स्थान पर एकत्रित होते हैं और शाम तक नमाज पढ़ते हैं। अगले दिन वे अराफात नामक जगह पर पहुंचते हैं और अल्लाह से दुआ मांगते हैं। हज यात्रा के अंतिम दिन जानवर की कुर्बानी दी जाती है। हज यात्रियों को विदाई देने वालों में सलमान खान, जावेद खान, नयूम खां और मोहम्मद करम खां सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
रामनगर से हज यात्रियों का पहला जत्था रवाना:परिजनों और क्षेत्रवासियों ने की विदाई, कुल सात हज यात्री शामिल
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