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बस्ती में न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मुंडेरवा थाने के उपनिरीक्षक जावेद खान को पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने निलंबित कर दिया है। उन पर डेढ़ वर्ष पहले मृत हो चुकी महिला का बयान दर्ज कर कोर्ट में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आरोप है। मामले की विभागीय जांच क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार को सौंपी गई है। यह मामला सिविल जज सीनियर डिवीजन (एफटीसी) शुभम द्विवेदी की अदालत में विचाराधीन ओमप्रकाश बनाम प्रहलाद वाद से संबंधित है। न्यायालय ने 10 फरवरी 2026 को मुंडेरवा एसओ को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में, उपनिरीक्षक जावेद खान ने 10 मार्च 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल की। इस रिपोर्ट में घायल पीड़िता बिन्दवासिनी पत्नी ओमप्रकाश सहित अन्य लोगों के बयान और गवाही दर्ज होने का उल्लेख किया गया था। हालांकि, प्रतिवादी प्रहलाद ने 1 मई 2026 को एक शपथ-पत्र दाखिल कर रिपोर्ट को झूठा बताया। उन्होंने दावा किया कि बिन्दवासिनी की मृत्यु 26 नवंबर 2024 को ही हो चुकी थी। इस दावे के समर्थन में, उन्होंने खलीलाबाद की सिविल अदालत में लंबित वरासत संबंधी मुकदमे के अभिलेख भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने उपनिरीक्षक जावेद खान से स्पष्टीकरण मांगा। जवाब में, उन्होंने स्वीकार किया कि उनसे “जाने-अनजाने भूलवश” यह त्रुटि हो गई थी। लेकिन न्यायालय ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारी ने जानबूझकर लापरवाही बरती है। अदालत ने पुलिस अधीक्षक को 10 दिनों के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, उपनिरीक्षक के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 379 के तहत प्रकीर्ण वाद चलाने का भी आदेश दिया गया। न्यायालय के निर्देश पर, पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक जावेद खान को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई की सूचना न्यायालय के साथ-साथ डीआईजी और एडीजी गोरखपुर को भी भेज दी गई है। यह घटना न्यायिक कार्यवाही में पुलिस की जवाबदेही और जांच की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
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मृत महिला का बयान दर्ज करने वाले दरोगा निलंबित:बस्ती में डेढ़ साल पहले मृत महिला का बयान कोर्ट में पेश किया
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