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सेवा पुस्तिका में नहीं दर्ज हुआ जेल जाने की बात, विभागीय सत्यापन पर उठे सवाल

उन्नाव। व्यापम घोटाले से जुड़े एक पुराने प्रकरण ने एक बार फिर पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में जेल जा चुके पशु चिकित्सक की सेवा पुस्तिका में संबंधित अवधि का उल्लेख न मिलने से विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में हसनगंज क्षेत्र के देवतारा में तैनात पशु चिकित्सक पुष्प राज पहले फतेहपुर जिले के खखरेऊ पशु चिकित्सालय में कार्यरत थे। इसी दौरान व्यापम घोटाले से जुड़े मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। बताया जाता है कि वह 15 अप्रैल 2015 से 11 अप्रैल 2016 तक एसआईटी ग्वालियर की अभिरक्षा में रहे तथा 18 अप्रैल 2015 से 11 अप्रैल 2016 तक सेंट्रल जेल ग्वालियर में निरुद्ध रहे।
तत्कालीन प्रमुख सचिव ने किया था निलंबित
सूत्रों के मुताबिक उस समय पशुधन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने संबंधित चिकित्सक को निलंबित भी किया था। इसके बावजूद जेल में बिताई गई अवधि का उल्लेख सेवा पुस्तिका में दर्ज नहीं किया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि बाद की तैनातियों और विभागीय सत्यापन के दौरान भी इस तथ्य को रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया। उन्नाव में स्थानांतरण के समय भी विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं होने की चर्चा है।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
मामले को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित अधिकारी स्तर पर बिना समुचित सत्यापन के जॉइनिंग स्वीकार कर ली गई, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
बताया जा रहा है कि व्यापम घोटाले में गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की खबरें उस समय विभिन्न मीडिया माध्यमों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थीं। इसके बावजूद विभागीय अभिलेखों में इसका उल्लेख न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
संपत्तियों की जांच की भी उठी मांग
फिलहाल जिले में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। विभागीय सूत्रों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि संबंधित चिकित्सक की चल-अचल संपत्तियों की जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या फिर यह प्रकरण भी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा। बताया जा रहा पूर्व में जनपद में आए विभागीय मंत्री वा जिले के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह को लिखित शिकायत भी की गई है।
पूरे मामले को लेकर जब सीवीओ डॉक्टर विनोद कुमार को फोन मिलाया गया तो उनका फोन नहीं उठा। इसके बाद जब एडी अजय कनौजिया को कई बार फोन मिलाया गया तो उनका फोन नहीं उठा। हालांकि जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने पूरे मामले को संज्ञान लेकर जांच कराकर कार्यवाही करने की बात कही है

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