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बस्ती में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पौराणिक मखौड़ा धाम के मुख्य पुजारी सूर्य नारायण दास वैदिक ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरु की महत्ता को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे शिष्य के जीवन को सही दिशा, संस्कार और आत्मबल प्रदान करने वाले मार्गदर्शक होते हैं। पुजारी सूर्य नारायण दास वैदिक ने कहा कि शिष्य का सबसे बड़ा धर्म अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण का भाव रखना है। गुरु जीवन में आने वाले कठिन समय में संबल प्रदान करते हैं और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि अयोध्या स्थित दशरथ महल के पीठाधीश्वर महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी के साथ खाड़ी देशों की यात्रा के दौरान एक समय युद्ध जैसे गंभीर हालात उत्पन्न हो गए थे। उस कठिन परिस्थिति में गुरु-कृपा और आशीर्वाद के कारण यात्रा सकुशल पूरी हो सकी। उन्होंने बताया कि मखौड़ा धाम सनातन संस्कृति की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां वर्षों से चली आ रही विशेष परंपरा के अनुसार, धाम के पुजारी का चयन अयोध्या स्थित दशरथ महल के वर्तमान महंत के शिष्य के रूप में किया जाता है। पूज्य माधव दास जी के साकेतवास के बाद वर्तमान में सूर्य नारायण दास वैदिक मखौड़ा धाम के धार्मिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। यह परंपरा गुरु से शिष्य तक संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिक जिम्मेदारियों के हस्तांतरण की अनूठी मिसाल है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भी गुरु परंपरा को नमन करते हुए आस्था व्यक्त की।
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मखौड़ा धाम के पुजारी ने बताई गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा:सूर्य नारायण दास वैदिक बोले- गुरु जीवन को दिशा, संस्कार और आत्मबल देने वाले पथ-प्रदर्शक
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