खेसरहा विकास खंड के बेलौहा गांव में स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं। गांव में जगह-जगह कूड़े के ढेर, जाम नालियां और फैली गंदगी अभियान के दावों की पोल खोल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से गांव में कोई सफाईकर्मी तैनात नहीं है, जिससे सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बेलौहा क्षेत्र खेसरहा का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ ब्लॉक मुख्यालय, भारतीय स्टेट बैंक, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आईटीआई कॉलेज, डिग्री कॉलेज और विकास इंटर कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। इन संस्थानों के बावजूद, मुख्य चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जाम नालियों से दुर्गंध फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। ग्राम प्रधान तुफैल अहमद ने बताया कि पिछले एक वर्ष से गांव में कोई सफाईकर्मी कार्यरत नहीं है। उनके अनुसार, पूर्व में भी जब सफाईकर्मियों की नियुक्ति हुई, तो उनका कुछ ही दिनों में स्थानांतरण कर दिया गया, जिससे गांव की सफाई व्यवस्था लगातार प्रभावित होती रही है। करीब 4500 की आबादी वाले इस गांव के ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बेलौहा में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी रूप से सफाईकर्मी की नियुक्ति कर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो गंदगी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वे अब इंतजार कर रहे हैं कि उनका गांव गंदगी से कब मुक्त होगा।
बेलौहा गांव में एक साल से नहीं सफाईकर्मी:स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल, ग्रामीण गंदगी के बीच रहने को मजबूर
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