HomeHealth & Fitnessटीबी से होने वाली हर मौत की होगी गहन समीक्षा

टीबी से होने वाली हर मौत की होगी गहन समीक्षा

 

लखनऊ। अब टीबी से होने वाली हर मृत्यु की व्यवस्थित जांच की जाएगी। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शुरू की गई टीबी डेथ ऑडिट प्रक्रिया का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद उन कमियों और बाधाओं को चिन्हित करना है,जो समय पर उपचार मिलने में रुकावट बनती हैं। ये जानकारी सोमवार को जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.ए.के.सिंघल ने दी।

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उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से यह समझने में मदद मिलेगी कि मरीज को जांच,उपचार अथवा रेफरल प्राप्त करने में किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे,जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत उपचार शुरू होने से पहले या बाद में, सरकारी अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े, तथा घर,अस्पताल या रास्ते में हुए सभी मामलों को समीक्षा के दायरे में शामिल किया जाएगा। डॉ.ए.के.सिंघल ने इसके लिए दो स्तरों पर जानकारी जुटाई जाएगी। एक ओर परिवार और समुदाय से बातचीत कर मरीज की परिस्थितियों को समझा जाएगा,वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सेवाओं और उपचार प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा। प्रक्रिया के अनुसार मृत्यु की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर मामला निक्षय पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा और 21 दिनों के भीतर जांच पूरी की जाएगी। इसमें बीमारी का इतिहास, जांच और उपचार की समय-सीमा, टीबी के साथ अन्य रोग, दवाओं के नियमित सेवन की स्थिति, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि तथा अंतिम समय में दिखाई दिए प्रमुख लक्षणों का विश्लेषण किया जाएगा। एनटीईपी के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित होगी। इसमें जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला क्षय रोग अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सक तथा अन्य संबंधित अधिकारी भाग लेंगे। बैठक में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर समुदाय, स्वास्थ्य संस्थानों और राज्य स्तर पर आवश्यक सुधारों की रूपरेखा तय की जाएगी।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी.सिंह के अनुसार – “टीबी डेथ ऑडिट से जांच, उपचार और रेफरल प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। “ऑडिट से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा,जिससे मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके और टीबी से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।”

 
 
 
 
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