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पुल नहीं, जान जोखिम में:सेमरहनीया घाट पर रोज नदी पार करते हजारों ग्रामीण


जमुनहा ब्लॉक क्षेत्र में राप्ती नदी के सेमरहनीया घाट पर पुल न होने के कारण हजारों ग्रामीणों को रोज जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। लोग पहले नाव से नदी का एक हिस्सा पार करते हैं, फिर घुटनों तक पानी में पैदल चलकर शेष दूरी तय करते हैं। तेज बहाव, फिसलन और अचानक गहराई बढ़ने से यह रास्ता बेहद खतरनाक बना रहता है। सेमरहनीया घाट के पश्चिमी तट पर लक्ष्मनपुर सेमरहनीया, पोदिला, लक्ष्मनपुर, धोबिहा, सुखरामपुरवा और नासिरगंज समेत कई गांव स्थित हैं। वहीं पूर्वी तट पर संगमपुरवा, बद्रीपुरवा, मानपुरवा, मक्कूपुरवा और बढ़इनपुरवा के लोग भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। जिला मुख्यालय भिनगा पहुंचने के लिए उन्हें यही जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ता है। वैकल्पिक मार्ग लंबा और मुश्किल
ग्रामीणों के मुताबिक, वैकल्पिक रास्ते से जाने पर बदला-नासिरगंज होते हुए बरदेहरा मोड़ तक करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से नाव चलाना भी असुरक्षित हो जाता है। कई बार नाव न मिलने या अधिक किराया मांगने पर लोगों को मजबूरन पानी में उतरना पड़ता है। महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर, बुजुर्ग लाठी के सहारे और युवा एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करते हैं। ग्रामीणों की पीड़ा लक्ष्मनपुर सेमरहनीया के रामआसरे यादव, नासिरगंज के मोहम्मद रफीक, पोदिला के शिवकुमार वर्मा और संगमपुरवा के श्यामलाल निषाद ने बताया कि यह खतरनाक सफर उनकी रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है। बद्रीपुरवा के राकेश श्रीवास्तव और मानपुरवा के सुरेश पासी ने कहा कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह सबसे ज्यादा जोखिम भरा है। पुल निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया भिनगा विधायक इंद्राणी वर्मा ने बताया कि सेमरहनीया घाट पर पुल बनने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी और जिला मुख्यालय की दूरी करीब 15 किलोमीटर कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पुल निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और स्वीकृति की उम्मीद है।

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