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बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में एक अनूठी और पुरातन परंपरा आज भी जीवित है। ग्रामीण खेतों में फसल पकने पर उसे स्वयं ग्रहण करने से पहले गांव के काली माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भगवान को अर्पित करते हैं। यह परंपरा घर के सरसों के तेल के लिए भी निभाई जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, नई फसल, चाहे वह गेहूं हो या कोई अन्य अनाज, तैयार होने पर सबसे पहले उससे बने व्यंजन का भोग भगवान को लगाया जाता है। इसके बाद ही परिवार के सदस्य उसे ग्रहण करते हैं। इस प्रक्रिया में गांव की महिलाएं सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। वे पारंपरिक चूल्हे पर भोजन तैयार करती हैं और उसे काली माता सहित गांव के अन्य मंदिरों में श्रद्धापूर्वक अर्पित करती हैं। इस परंपरा को निभाने वाली सुशीला, रीता और सुनीता सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि यह रीति पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी दादी-नानी के समय से इसे निभाया जा रहा है और आज भी पूरा गांव इसे उतनी ही आस्था और श्रद्धा के साथ जारी रखे हुए है। ग्रामीणों का मानना है कि इस परंपरा के पीछे यह भावना है कि प्रकृति और भगवान की कृपा से प्राप्त फसल पर पहला अधिकार ईश्वर का होता है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आधुनिकता के इस युग में भी गांव वालों की यह आस्था और परंपरा के प्रति निष्ठा उल्लेखनीय है।
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बस्ती में फसल पकने पर भगवान को भोग:ग्रामीण पीढ़ियों से निभा रहे अनूठी परंपरा
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