Homeजिला / लोकल (Local News)संगीत जगत में शोक की लहर! पार्श्व गायिका जानकी अम्मा का 88...

संगीत जगत में शोक की लहर! पार्श्व गायिका जानकी अम्मा का 88 वर्ष आयु में निधन 


20 भारतीय भाषाओं में गाए थे हजारों गीत

नई दिल्ली। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने पार्श्व गायिका एस जानकी अम्मा के निधन पर शोक प्रगट किया है। इनका कहना है कि जानकी अम्मा के निधन से संगीत ने एक महान हस्ती को खो दिया है, जिनकी असाधारण गायकी ने पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया।
दक्षिण भारत की कोकिला के नाम से मशहूर एस. जानकी का 88 वर्ष की आयु में शनिवार को मैसूरु में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। उनका 20 से अधिक भाषाओं में 48 हजार से अधिक गीतों के साथ छह दशक का करियर रहा है। एस. जानकी ने हिंदी सिनेमा में कई सदाबहार गीत गाए हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में बप्पी लाहिड़ी के साथ “यार बिना चैन कहां रे”, “गोरी का साजन, साजन की गोरी”, “सुन रुबिया” और “घायल घायल तूने मुझे कर दिया” शामिल हैं। “नैनो में निंदिया है” और “हसीनों का दस्तूर” भी उनके चुनिंदा हिंदी गानों में से हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने शोक संदेश में कहा कि उनका कालातीत संगीत हमेशा अनमोल रहेगा। उनके निधन से भारत ने एक संगीत की महान हस्ती को खो दिया है। उनकी असाधारण गायकी ने पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। उनका गौरवशाली करियर छह दशकों से अधिक समय तक फैला रहा, जिसके दौरान उन्होंने हिंदी, ओडिया, तुलु, उर्दू, पंजाबी और बंगाली सहित लगभग 20 भारतीय भाषाओं में हजारों गीत रिकॉर्ड किए।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णनन ने जानकी अम्मा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी असाधारण आवाज ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और पीढ़ियों से अनगिनत दिलों को छुआ। उनके गीतों ने भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को पार करते हुए संगीत की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से लाखों लोगों को एकजुट किया। एस. जानकी अम्मा का निधन संगीत जगत और देश की कलात्मक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने शास्त्रीय, भक्ति और लोक संगीत रचनाओं में समान महारत दिखाई और हर शैली पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। भारतीय संगीत में उनके अपार योगदान के माध्यम से, उन्होंने एक ऐसी विरासत छोड़ी है जो कलाकारों और संगीत प्रेमियों को समान रूप से प्रेरित करती रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जानकी अम्मा के निधन को संगीत और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं में उनके गीत पीढ़ियों तक लोकप्रिय रहे। उन्होंने अद्वितीय गरिमा और बहुमुखी प्रतिभा के साथ हर भावना को आवाज दी। उनकी मधुर धुनें आने वाले वर्षों में भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करती रहेंगी।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अलौकिक आवाज वाली जानकीजी ने उन गीतों में जान फूंकी जो विभिन्न भाषाओं में कालजयी क्लासिक्स बन गए। हमारे देश की सबसे सम्मानित सांस्कृतिक हस्तियों में से एक उन्होंने संगीत जगत में एक अपूरणीय रिक्ति छोड़ दी है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments