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पश्चिम बंगाल: भाजपा सरकार का पहला पूर्ण बजट आज, निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का पहला पूर्ण बजट सोमवार को विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेंगे।

बजट में कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के साथ राज्य के भारी कर्ज बोझ को कम करने, निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन और औद्योगिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।

राज्य में 15 वर्ष तक तृणमूल कांग्रेस के शासन के बाद भाजपा की सरकार बनने के करीब दाे महीने बाद यह पहला पूर्ण बजट पेश होगा।

सूत्रों के अनुसार, सरकार अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुरूप योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ प्रत्यक्ष नकद सहायता आधारित कल्याणकारी व्यवस्था के बजाय रोजगार, उद्योग और राजस्व बढ़ाने की दिशा में आर्थिक नीति को केंद्रित कर सकती है।

पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अपने अंतरिम बजट में 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ के कुल व्यय का अनुमान लगाया था। इसमें सामाजिक क्षेत्र के लिए 1.68 लाख करोड़, यानी कुल बजट का 41.4 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित किया गया था।

हालांकि, राज्य पर 7.5 लाख करोड़ से अधिक का बकाया कर्ज है और कर्ज-राज्य सकल घरेलू उत्पाद अनुपात करीब 38 प्रतिशत बताया जा रहा है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है।

राज्य को हर वर्ष केवल ब्याज भुगतान पर करीब 49,000 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं। इससे सरकार के पास विकास और नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश सीमित हो जाती है।

ऐसे में बजट में वित्तीय घाटा घटाने के लिए अगले 3 से 5 वर्षों का एक मध्यम अवधि का खाका पेश किया जा सकता है। पुराने और महंगे कर्ज के पुनर्गठन के लिए अलग कर्ज प्रबंधन व्यवस्था बनाने की संभावना भी जताई जा रही है।

वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, सामाजिक क्षेत्र के खर्च में बड़ी कटौती की संभावना नहीं है। हालांकि, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण वाली योजनाओं में लाभार्थियों की जांच और लक्षित वितरण की व्यवस्था को अधिक सख्त बनाया जा सकता है।

सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की लक्ष्मी भंडार योजना की जगह अन्नपूर्णा योजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को अधिक मासिक सहायता देने का प्रावधान है।

सूत्रों के अनुसार, लाभार्थियों के सत्यापन अभियान में करीब 30 लाख अपात्र नाम हटाए गए हैं। पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के अंतर्गत करीब 2.4 करोड़ लाभार्थी शामिल थे।

तृणमूल कांग्रेस सरकार ने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के लिए 42,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया था, जिसमें लक्ष्मी भंडार योजना का बड़ा हिस्सा शामिल था।

सरकार बिना नए कर लगाए राजस्व बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के कारण राज्य के पास कर बढ़ाने की सीमित गुंजाइश है, लेकिन आबकारी शुल्क, स्टांप शुल्क और कर चोरी रोकने के उपायों के जरिए राजस्व बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।

रेत और अन्य लघु खनिजों के लिए पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक नीलामी व्यवस्था, अतिरिक्त सरकारी जमीन का दीर्घकालिक पट्टा तथा वस्तु एवं सेवा कर चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे प्रस्ताव बजट में शामिल हो सकते हैं।

उद्योग और निवेश के क्षेत्र में सरकार भूमि उपलब्धता से जुड़े नियमों में सुधार कर सकती है। भूमि सीमा नियमों, अनुपयोगी औद्योगिक भूमि के इस्तेमाल और निवेशकों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के उपायों पर नीतिगत घोषणाएं होने की संभावना है।

कोलकाता महानगर क्षेत्र, दुर्गापुर-आसनसोल, हल्दिया और सिलीगुड़ी के लिए क्षेत्र विशेष औद्योगिक रणनीति भी बजट का हिस्सा बन सकती है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को आसान ऋण, ब्याज सहायता और समूह आधारित विकास के जरिए बढ़ावा देने की तैयारी है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी की व्यवस्था तथा स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा भी की जा सकती है।

उत्तर बंगाल के लिए विशेष पैकेज, पेयजल ढांचे के विस्तार और पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने वाले उपाय भी बजट में शामिल होने की संभावना है।

कुल मिलाकर भाजपा सरकार का पहला बजट कल्याणकारी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को निवेश, रोजगार और उद्यम सृजन की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।

 

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