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ईरान को लेकर क्या है अगली रणनीति? डोनाल्ड ट्रंप ने की पीएम मोदी से बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्ष पर चर्चा की। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने, सुरक्षित और ऐक्सेस लायक बनाने पर जोर दिया गया।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार तेहरान के साथ ‘प्रोडक्टिव’ बातचीत कर रही है। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले की अपनी डेडलाइन को 5 दिन बढ़ा दिया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था, जिससे दुनिया के तेल निर्यात पर असर पड़ रहा है।

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पीएम बोले- शांति का समर्थन

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर लिखा कि दोनों नेताओं की बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की अहमियत पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट किया, ‘राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात हुई। पश्चिम एशिया की स्थिति पर उपयोगी चर्चा हुई। भारत जल्द से जल्द तनाव कम करने और शांति बहाल करने का समर्थन करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने, सुरक्षित और सभी के लिए पहुंच योग्य रखना पूरे विश्व के लिए जरूरी है। हम शांति और स्थिरता के प्रयासों पर संपर्क में रहेंगे।’

ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि ट्रंप पीछे हट गए क्योंकि ईरान ने सख्त चेतावनी दी थी। हालांकि, तेहरान से बातचीत को लेकर मिले-जुले संकेत आ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान अमेरिका से मध्यस्थों के जरिए कुछ प्रस्ताव प्राप्त कर रहा है और उन्हें जांच रहा है।

मध्यस्थता का प्रस्ताव

पीएम मोदी ने पिछले दिनों ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बात की थी। हालांकि मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव की डिटेल्स नहीं बताई गईं। भारत के पड़ोसी पाकिस्तान समेत सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे चार देशों को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता करने वाला बताया जा रहा है।

मंगलवार को संसद में पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के नेताओं से दो बार फोन पर बात की है। वह गल्फ देशों, ईरान, इजराइल और अमेरिका से लगातार संपर्क में हैं।

कूटनीति पर जोर

मोदी ने कहा ‘कूटनीति के जरिए भारत अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। हम इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाने के पक्ष में हैं।’ उन्होंने गल्फ में रह रहे बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता बताया।

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है। वहां जाने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। पहले भी नहीं थी और आज भी नहीं है। सुरक्षा का आकलन जरूर किया जाता है लेकिन अनुमति किसी से नहीं मांगी जाती।

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मौजूदा स्थिति

फरवरी 28 को अमेरिका और इजरायल के तेहरान पर हवाई हमलों से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक ईरान में 1500 से ज्यादा, लेबनान में 1000 से ज्यादा, इजरायल में 15 और अमेरिकी सैनिकों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। गल्फ क्षेत्र में भी कई नागरिक मारे गए हैं। लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं क्योंकि इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह मिलिशिया पर हमले बढ़ा दिए हैं।

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