Homeदेश (National)क्या कॉकरोच जनता पार्टी अन्ना हजारे जैसा आंदोलन खड़ा कर पाएगी? मुश्किलें...

क्या कॉकरोच जनता पार्टी अन्ना हजारे जैसा आंदोलन खड़ा कर पाएगी? मुश्किलें समझिए

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की एक टिप्पणी से शुरू हुआ कॉकरोच विवाद अब भारत की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन के रूप में सामने आ सकती है। CJI की टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके नाम के एक व्यक्ति ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से सोशल मीडिया पर एक मुहिम शुरू की और कुछ ही दिनों में यह सोशल मीडिया पर बीजेपी को भी पीछे छोड़ गई। अब सोशल मीडिया की दुनिया से निकलकर यह पार्टी ग्राउंड पर उतरने की तैयारी कर रही है और सरकार के खिलाफ खासकर शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन करने की योजना बना रही है। देश में यूपीए की सरकार के समय अन्ना आंदोलन से इस पार्टी की तुलना की जा रही है और लोग उम्मीदें लगाए बैठे हैं।

CJP पिछले कुछ हफ्तों में युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ते असंतोष का प्रतीक बनकर सामने आया है। इस आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की है कि वह भारत लौटकर दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे और अपने समर्थकों के साथ मैदान में उतरेंगे।

यह भी पढ़ें: भाभी ने बदमाशों से कराई ननद की हत्या, फिर लगा दिया बुर्के वाले चोरों का नाम

सोनम वांगचुक का मिला साथ

देश के जाने माने पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक का साथ अब CJP को मिल चुका है। सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर 5 जून तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता है तो वह 6 जून को CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। अभिजीत दिपके ने खुद उनकी वीडियो रिपोस्ट की।

क्या बोले अभिजीत?

अभिजीत दिपके ने कहा है कि वह भारत आकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। उनका दावा है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही की मांग के लिए है। हालांकि, दूसरी तरफ इस आंदोलन की आलोचना भी हो रही है। आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता और जमीनी आंदोलन में बड़ा अंतर होता है और डिजिटल समर्थन हमेशा सड़कों पर भीड़ में नहीं बदलता। इससे पहले यूपीए की सरकार में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था और माना जाता है कि कांग्रेस और यूपीए की सरकार की विदाई में इस आंदोलन ने एक अहम भूमिका निभाई थी।

क्या अन्ना आंदोलन जैसा असर छोड़ पाएगी CJP?

यूपीए-2 के कार्यकाल में देशभर में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ रहे थे। अन्ना आंदोलन की शुरुआत 2011 में इसी भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई थी। उस समय कई बड़े घोटाले राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बने हुए थे और आम लोगों के बीच यह भावना मजबूत हो रही थी कि व्यवस्था में जवाबदेही की कमी है। इसी माहौल में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने जन लोकपाल कानून की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से अनशन शुरू किया। शुरुआत में यह एक सीमित विरोध प्रदर्शन था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह देशव्यापी अभियान बन गया। समाज के अलग-अलग हिस्सों के लोग इस आंदोलन में आने लगे लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के पास अभी जमीनी समर्थन नहीं है।

यह भी पढ़ें: रेप के आरोपी को लोगों ने जमकर पीटा, बचाने आई पुलिस पर भी कर दिया पथराव

कॉकरोच जनता पार्टी के सामने चुनौतियां

अन्ना आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उसके पास एक स्पष्ट मांग, जमीन पर सक्रिय नेटवर्क और राष्ट्रीय स्तर नेतृत्व था। सोशल मीडिया उस समय तेजी से उभर रहा था, लेकिन आंदोलन की असली ताकत सड़कों पर मौजूद लोग थे। यही वजह रही कि यह आंदोलन सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसने राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित किया।

अब जब कॉकरोच जनता पार्टी भी व्यवस्था के खिलाफ बोल रही है। सोशल मीडिया पर अन्ना आंदोलन जैसे आंदोलन की चर्चा हो रही है। अभी अभिजीत दिपके सोशल मीडिया पर ही अभियान चला रहे थे लेकिन उन्हें जमीनी अनुभव नहीं है। अन्ना हजारे के आंदोलन से कई जमीनी कार्यकर्ता और लोग जुड़े थे जो रोजाना जमीन पर काम कर रहे थे। अब अभिजीत दिपके के सामने चुनौती होगी कि वह किस तरह से आंदोलन को आगे बढ़ाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण शांतिपूर्ण प्रदर्शन में अहिंशा को रोकने की चुनौती।


RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments