लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की तकनीकी सेवाएं मुख्यालय द्वारा शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय स्थित अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद प्रेक्षागृह में ई-समन और ई-साक्ष्य के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला भारत सरकार द्वारा लागू की गई नई आपराधिक न्याय संहिताओं के सफल क्रियान्वयन के उद्देश्य से आयोजित की गई।
कार्यक्रम में डीजीपी राजीव कृष्ण मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि पीसी मीना महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं यूपी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अपर पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोरा द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत कर की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ किया।
एडीजी तकनीकी सेवाएं ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों से सभी को अवगत कराया। अपने संबोधन में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि बदलते समय में डिजिटल तकनीक का उपयोग न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने ई-समन और ई-साक्ष्य प्रणाली को न्यायिक प्रक्रिया में क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि इससे मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
कार्यशाला में एनआईसी, जेटीआरआई, एनएफएसयू अभियोजन विभाग, यूपी एसटीएफ और एफएसएल जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें ई-साक्ष्य और ई-समन के व्यवहारिक उपयोग, चुनौतियों और समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिलों और कमिश्नरेट्स के लगभग 175 नोडल अधिकारियों ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया, जबकि करीब 350 पुलिसकर्मी ऑफलाइन रूप से शामिल हुए। इनमें समन सेल प्रभारी, विवेचना अधिकारी और तकनीकी स्टाफ शामिल रहे।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना, पर्यवेक्षक अधिकारियों को संवेदनशील करना और नई न्याय संहिताओं के प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना रहा।
इसके साथ ही समन और वारंट की समयबद्ध तामीला के जरिए न्याय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। प्रदेश में ई-साक्ष्य का औसत 46.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जिसमें भदोही, सोनभद्र और मुरादाबाद जिले शीर्ष पर हैं। वहीं ई-समन के मामले में 86 प्रतिशत औसत के साथ अमरोहा, कौशांबी और रामपुर अग्रणी जिलों में शामिल हैं। कार्यक्रम के अंत में अतिथि वक्ताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। डीआईजी तकनीकी सेवाएं द्वारा सेमिनार का सार प्रस्तुत किया गया और एसपी (एडी) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।












