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श्रावस्ती में बाढ़ से निपटने को प्रशासन अलर्ट:30 अप्रैल तक प्रबंधन योजना, 15 जून तक सुरक्षात्मक कार्य पूरा करने के दिए निर्देश


श्रावस्ती में संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। कलेक्ट्रेट में बाढ़ दिशा-निर्देशन कमेटी की बैठक हुई, जहाँ जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विभाग 30 अप्रैल 2026 तक अपनी-अपनी बाढ़ प्रबंधन योजना प्रस्तुत करें तथा बाढ़ से बचाव से जुड़े सभी कार्य 15 जून 2026 तक हर हाल में पूर्ण कर लिए जाएं। बाढ़ प्रभावित गांवों का भ्रमण करे जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि वे पूर्व वर्षों में आई बाढ़ के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार करें, ताकि आपात स्थिति में पीड़ितों को त्वरित राहत दी जा सके। उन्होंने बाढ़ प्रभावित गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने और उनके सुझावों के आधार पर तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड को बंधों व स्परों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर पूरा कराने के आदेश दिए गए।वहीं, उप जिलाधिकारियों को बाढ़ संभावित गांवों में राहत शिविर, नाव-नाविक, मोटरबोट, गोताखोर, जीवनरक्षक उपकरण, बाढ़ चौकियों, कार्मिकों की तैनाती तथा ब्लॉक व ग्राम आपदा प्रबंधन समितियों के गठन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश विद्युत विभाग को बाढ़ क्षेत्रों में बिजली के खंभे व तार मजबूत करने तथा वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।स्वास्थ्य विभाग को संक्रामक रोगों से बचाव और सर्पदंश की स्थिति में एंटी स्नेक वेनम सहित आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए भूसा व हरे चारे की समुचित व्यवस्था तथा शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने को कहा गया।कृषि विभाग को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सभी पात्र किसानों का बीमा करने के निर्देश दिए गए। बाढ़ संभावित गांवों के निवासियों की मोबाइल नंबर सहित सूची तैयार की जाए,ताकि आपदा की आशंका होने पर उन्हें समय रहते अलर्ट किया जा सके। साथ ही, विद्यालयों, शरणालयों, हैंडपंपों व पेयजल टैंकरों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश पंचायतीराज विभाग और नगर निकायों को दिए गए। जिलाधिकारी ने जोर दिया कि बाढ़ से पहले पूरी तैयारी ही प्रभावी बचाव का सबसे मजबूत आधार है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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